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‘₹4 लाख काफी नहीं हैं?’ गुजारे भत्ते की रकम बढ़ाने की मांग पर शमी की पत्नी से सुप्रीम कोर्ट

हसीन जहां ने याचिका में कहा है कि शमी की सालाना आय 2021-22 में करीब 48 करोड़ रुपये थी और वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। इसके बावजूद उन्हें और उनकी बेटी को बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मुश्किल हो रही है। हसीन जहां ने याचिका में 10 लाख रुपए हर महीने गुजारा भत्ता देने की मांग की है।

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IANS

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उनसे अलग रह रहीं पत्नी हसीन जहां का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने शमी को नोटिस भी जारी किया है। दरअसल हसीन जहां ने गुजारे भत्ते की रकम बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने अपने और बेटी के लिए तय किए गए गुजारा भत्ते की राशि बढ़ाने की मांग की है।

कोलकाता हाई कोर्ट के 1 जुलाई और 25 अगस्त 2025 को अपने आदेश में हसीन जहां के लिए 1.5 लाख और बेटी के लिए 2.5 लाख रुपये प्रति माह का अंतरिम भत्ता तय किया था। हालांकि, उन्होंने कहा है कि यह रकम शमी की आय और लाइफस्टाइल के मुकाबले बेहद कम है। हाई कोर्ट के आदेश को ही हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

हसीन जहां की याचिका में क्या कहा गया?

हसीन जहां ने याचिका में कहा है कि शमी की सालाना आय 2021-22 में करीब 48 करोड़ रुपये थी और वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। इसके बावजूद उन्हें और उनकी बेटी को बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मुश्किल हो रही है। हसीन जहां ने याचिका में 10 लाख रुपए हर महीने गुजारा भत्ता देने की मांग की है।

हसीन जहां की वकील सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने दलील दी कि शमी की मासिक खर्च लगभग 1.08 करोड़ रुपये है, जैसा कि उन्होंने हाई कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में खुद स्वीकार किया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि शमी के पास रेंज रोवर, जगुआर, मर्सिडीज और फॉर्च्यूनर जैसी कारें हैं और उनकी कुल संपत्ति करीब 500 करोड़ आंकी गई है। इसके बावजूद, हसीन जहां और उनकी बेटी साधारण परिस्थितियों में गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। उन्होंने कोर्ट से पत्नी के लिए 7 लाख और बेटी के लिए 3 लाख मासिक गुजारा भत्ता तय करने की मांग की है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि शमी जानबूझकर अदालतों को गुमराह कर रहे हैं, ताकि उचित राशि देने से बचा जा सके। हसीन का कहना है कि शादी के बाद से वे बेरोजगार हैं और उनके पास अपनी और बेटी की जरूरतें पूरी करने का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ ने सुनवाई के दौरान हसीन जहां को फटकार लगाते हुए कहा कि “क्या 4 लाख प्रति माह काफी अच्छी रकम नहीं है? आपने यह याचिका दायर ही क्यों की है?”

हालांकि कोर्ट ने शमी और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामला चार हफ्ते बाद सुनवाई के लिए तय किया। बेंच ने कहा कि अगर दोनों पक्ष समझौते या मध्यस्थता के लिए तैयार हों, तो अदालत उसकी दिशा में कदम उठा सकती है।

घरेलू हिंसा और पहले के आदेश

शमी और हसीन जहां की शादी अप्रैल 2014 में हुई थी। 2018 में हसीन ने पश्चिम बंगाल के जादवपुर थाने में घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद शमी और उनके परिवार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने 2018 में बेटी के लिए 80,000 रुपये और पत्नी के लिए 50,000 रुपये प्रतिमाह भत्ता तय किया था। बाद में सेशन कोर्ट ने इसे बरकरार रखा, लेकिन हाई कोर्ट ने 2025 में रकम बढ़ाकर पत्नी के लिए 1.5 लाख और बेटी के लिए 2.5 लाख कर दी थी।

हसीन जहां का कहना है कि शमी अब भी करीब 2.4 करोड़ के बकाया भत्ते के देनदार हैं। हाई कोर्ट ने उन्हें यह राशि आठ किश्तों में चुकाने का निर्देश दिया था।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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