पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद संकट से जूझ रही ममता बनर्जी को शनिवार को एक और बड़ा झटका लगा। तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी में अपने सभी पदों से शनिवार को इस्तीफा दे दिया। उन्हें हाल में पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद ही टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को भेजे अपने इस्तीफे में न केवल प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ा है, बल्कि पार्टी और उससे जुड़े संगठनों के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता और चुनाव आयोग के समक्ष अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारियों से भी खुद को अलग कर लिया है।
जून में बनाया गया था प्रदेश अध्यक्ष
चंद्रिमा भट्टाचार्य को 3 जून को कोलकाता के कालीघाट में हुई बैठक में टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। यह फैसला उस समय लिया गया था जब विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी मौजूदा समितियों को भंग कर संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया था। इस दौरान उन्होंने सुभ्रत बख्शी की जगह चंद्रिमा भट्टाचार्य को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी।
अपने इस्तीफे में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने लिखा, ‘मैं 3 जून 2026 को कालीघाट में हुई बैठक में मुझे सौंपे गए तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देती हूं। इसके साथ ही मैं वर्तमान में अपने सभी अन्य पदों से भी इस्तीफा देती हूं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं पार्टी और उससे जुड़े सभी संगठनों के विभिन्न बैंकों में संचालित खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारी वापस लेती हूं। साथ ही चुनाव आयोग के समक्ष आपकी अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी स्वयं को अलग करती हूं।’
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने पत्र के अंत में ममता बनर्जी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लिखा कि उनके मन में हमेशा उनके लिए सर्वोच्च सम्मान रहेगा और भविष्य में भी वह उनका सम्मान करती रहेंगी।
पश्चिम बंगाल में मंत्री भी रह चुकी हैं भट्टाचार्य
चंद्रिमा भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल की पूर्व मंत्री रह चुकी हैं और लंबे समय तक ममता बनर्जी की करीबी सहयोगियों में उनकी गिनती होती रही है। ममता सरकार में उन्होंने वित्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भूमि सुधार तथा शरणार्थी एवं पुनर्वास जैसे विभागों में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की है और 2011 के विधानसभा चुनाव तक वकालत करती रहीं। इसके बाद टीएमसी के टिकट पर दमदम उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनीं।
चंद्रिमा भट्टाचार्य को इस बार चुनाव में उत्तर 24 परगना जिले की दमदम उत्तर विधानसभा सीट पर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट पर उन्हें 76,880 वोट मिले थे, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सौरव सिकदार ने उन्हें 26,404 मतों के अंतर से पराजित किया था।
भट्टाचार्य का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूदा नेतृत्व से दूरी बना चुके हैं। बताया जा रहा है कि हालिया चुनावी हार के बाद खासकर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। पार्टी के 80 विधायकों में से 50 से अधिक विधायक बगावती नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ चले गए हैं।
ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी भी जाएगी!
बागी गुट ने पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा जताते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा भी खटखटाया है। हालांकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी बागी गुट की ऐसी गतिविधियों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग के सामने अपने दावे को मजबूत करने में जुटा है। इस संघर्ष के बीच शुक्रवार को बागी गुट ने पार्टी के कोलकाता में मुख्यालय पर भी कथित तौर पर कब्जा जमा लिया।
बहरहाल, चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा टीएमसी में चल रहे संघर्ष को और गहरा करने वाला घटनाक्रम है। फिलहाल भट्टाचार्य की ओर से भी अभी कुछ भी साफ नहीं किया गया है कि उनका अगला कदम क्या होगा।
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