
अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब आरोपियों की संपत्तियों तक पहुंच गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की जमीनों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी मनी ट्रेल की जांच कराने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग से आरोपियों और उनके परिजनों की संपत्तियों का ब्योरा मांगा गया था। अब तक करीब 20 लैंड पार्सल के रिकॉर्ड पुलिस को मिल चुके हैं। इनका सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं दान की रकम का इस्तेमाल जमीन या दूसरी संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया।
जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि इन संपत्तियों की खरीद की तारीख और आरोपियों के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ने की तारीख का मिलान किया जा रहा है। अगर जांच में यह सामने आता है कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद खरीदी गई संपत्तियों के लिए इस्तेमाल धन का वैध स्रोत नहीं है, तो उन्हें ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ यानी अपराध से अर्जित संपत्ति मानकर जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।
रोजाना 6 से 8 लाख रुपये की हेराफेरी का अनुमान
एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में लिखा है कि एसआईटी ने बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की है। अधिकारियों ने जांच टीम को बताया कि घोटाला सामने आने से पहले राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बैंक खातों में प्रतिदिन औसतन 16 से 18 लाख रुपये जमा होते थे। मामला उजागर होने के बाद यही राशि बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन पहुंच गई। इन आंकड़ों के आधार पर जांच एजेंसियां अनुमान लगा रही हैं कि प्रतिदिन करीब 6 से 8 लाख रुपये की कथित हेराफेरी की जाती थी।
मंदिर में दान की नकदी की गिनती की जिम्मेदारी एसबीआई के पास है, जिसने इसके लिए एक निजी एजेंसी को नियुक्त किया था। नकदी चार दानपात्रों से निकालकर 14 सदस्यीय टीम गिनती करती थी, जिसमें 11 बैंककर्मी और तीन ट्रस्ट के प्रतिनिधि शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, जांच में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। एसआईटी ने उनसे पूछा कि ट्रस्ट और बैंक के बीच तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन क्यों नहीं किया गया, गिनती की व्यवस्था में बदलाव किसके निर्देश पर हुए और अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी का संदेह था तो वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। यह भी पूछा गया कि सुरक्षा के लिए नियुक्त निजी एजेंसी को नकदी गिनने जैसे संवेदनशील काम में क्यों लगाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट में बैंक अधिकारियों की भूमिका का भी उल्लेख करेगी। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। पुलिस जल्द ही ईडी को भी पत्र लिखकर पूरे मनी ट्रेल की जांच कराने की तैयारी में है।
पार्क में बांटी जाती थी कथित चोरी की रकम!
जांच के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला ने पुलिस को बताया है कि कथित तौर पर चोरी की गई रकम मंदिर के पास भीखापुर स्थित 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के एक पार्क में आपस में बांटी जाती थी। शुक्रवार को पुलिस उसे घटनास्थल पर भी लेकर गई। इससे पहले अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर उसकी मारुति ब्रेजा कार भी जब्त की गई, जिसे पुलिस अपराध से अर्जित संपत्ति मानकर जांच कर रही है।
इसी बीच जांच एजेंसियों को शुक्रवार को पहली बार ऐसी तस्वीर भी मिली है, जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के नकदी गिनती केंद्र के अंदर दिखाई दे रहे हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह तस्वीर मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।
‘छोटे कर्मचारियों को बनाया जा रहा बलि का बकरा‘
इस बीच आरोपी रमाशंकर मिश्रा के परिवार ने पूरे मामले में बड़ी साजिश का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उनकी भाभी साधना मिश्रा ने कहा कि मंदिर में चोरी जरूर हुई है, लेकिन प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि रमाशंकर को मंदिर में दान काउंटर पर काम करने के लिए 16 से 17 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था और परिवार का उनसे पिछले ढाई साल से कोई संपर्क नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख संत महंत सीताराम दास महाराज ने इस मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि दान में गड़बड़ी ने देशभर के रामभक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने एसआईटी को जांच के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया और कहा कि जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार
राम मंदिर दान गबन मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। यह मामला 25 जून को दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रखा जा सके।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ


