नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल के नतीजों पर कांग्रेस के भीतर उभरे राजनीतिक उत्साह पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को कड़ी फटकार लगाई है। राहुल गांधी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार पर खुश होना ‘छोटी राजनीति’ है और विपक्षी दलों को बड़े लोकतांत्रिक सवालों पर एकजुट होकर सोचने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने एक्स पर किए पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस के कुछ नेता और अन्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस की हार पर जश्न मना रहे हैं, जबकि उन्हें यह समझना चाहिए कि असम और पश्चिम बंगाल के जनादेश की कथित ‘चोरी’ भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में गंभीर संकेत है।
उन्होंने कहा, “छोटी राजनीति को दरकिनार कीजिए। यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का मामला है।”
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। 15 वर्षों से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को बाहर कर भाजपा दो-तिहाई बहुमत के साथ अपनी पहली सरकार बनाने जा रही है।
चुनाव के बाद ममता के लिए राहुल गांधी का बदला सुर!
बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद सोमवार रात राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव ‘चोरी’ किए गए हैं।
उन्होंने पास्ट में लिखा कि हम सीएम ममता बनर्जी से सहमत हैं। पश्चिम बंगाल में 100 से ज्यादा सीटें चुराई गईं। हमने पहले भी मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, 2024 के लोकसभा चुनाव में यह तरीका देखा है। पूरी खबर यहां पढ़ें
नतीजों के बाद राहुल गांधी भले ही टीएमसी को लेकर नरम रुख अपनाते दिख रहे हों, लेकिन चुनाव के दौरान राहुल गांधी के सुर अलग थे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर कई तीखे हमले किए थे।
हुगली जिले की एक सभा संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए बंगाल में रास्ता खोल रही हैं। क्योंकि वह सही सरकार नहीं चलातीं। बस सरकार चलाती हैं, रोजगार नहीं दिलातीं, विकास नहीं करती, नतीजा क्या है, बंगाल में भाजपा की सरकार कभी नहीं आनी चाहिए लेकिन ममता बनर्जी बंगाल में भाजपा के लिए रास्ता खोल रही हैं।
एक वीडियो में उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर ममता बनर्जी ने साफ-सुथरी सरकार चलाई होती और बंगाल में ध्रुवीकरण नहीं किया होता तो भाजपा के लिए रास्ता नहीं खुलता।
बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है। अब तक घोषित 293 सीटों के नतीजों में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत से कहीं आगे बढ़त बना ली है। दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होना है, जिसकी मतगणना 24 मई को होगी।
तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई है। सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी की व्यक्तिगत हार के रूप में सामने आया, जहां वह भवानीपुर सीट से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से 15 हजार से अधिक वोटों से हार गईं।
अन्य दलों में कांग्रेस को 2 सीटें, सीपीआई (एम) को 1 सीट, एआईएसएफ को 1 और आम जनता उन्नयन पार्टी को 2 सीटें मिली हैं।
कई जिलों में टीएमसी का पूरी तरह सफाया
इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन कई क्षेत्रों में बेहद कमजोर रहा। कूच बिहार, पूर्वी मिदनापुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग सहित 10 जिलों में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। आदिवासी और मतुआ बहुल इलाकों में भी भाजपा ने मजबूत बढ़त दर्ज की, जिसे राजनीतिक विश्लेषक सत्ता परिवर्तन की बड़ी वजह मान रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम में भी कांग्रेस के लिए नतीजे निराशाजनक रहे। भाजपा नीत गठबंधन ने 82 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस केवल 19 सीटों पर सिमट गई। इससे पूर्वोत्तर में विपक्ष की राजनीतिक स्थिति और कमजोर हुई है।
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