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तबाही में लगता है एक पल लेकिन…पृथ्वी को तबाह करने वाले ‘तानाशाहों’ पर बरसे पोप लियो

कैमरून शहर पहुंचे पोप लियो ने पृथ्वी को तबाह करने वाले तानाशाहों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि तबाही में एक पल लगता है लेकिन…

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फोटोः आईएएनएस

कैमरूनः पोप लियो XIV ने उन “मुट्ठी भर तानाशाहों” की कड़ी निंदा की जो युद्ध और शोषण से पृथ्वी को तबाह कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार (16 अप्रैल) को एक अलगाववादी संघर्ष के केंद्र कैमरून में शांति का संदेश दिया जिसे दुनिया के सबसे उपेक्षित संकटों में से एक माना जाता है। पोप लियो XIV ने कैमरून के बामेंडा शहर में यह बयान दिया।

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, लियो पश्चिमी कैमरून के बामेंडा शहर गए। यहां उत्साहित भीड़ ने सड़कों को जाम कर दिया। लोग हॉर्न बजा रहे थे और नाच रहे थे। वे इस बात से बेहद खुश थे कि एक पोप इतनी दूर से उनसे मिलने आए हैं और इस क्षेत्र में लगभग एक दशक से व्याप्त हिंसा पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है।

दुनिया में शांति का हो वासः पोप लियो

इस दौरान पोप लियो ने उम्मीद इच्छा जताई कि दुनिया में शांति का वास हो। इसके साथ ही उन्होंने उन लोगों को धिक्कारा जो “अपने सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक फायदे के लिए धर्म और ईश्वर के नाम का गलत इस्तेमाल करते हैं और जो पवित्र है उसे अंधेरे और गंदगी में धकेलते हैं।”

लियो ने एक शांति बैठक की अध्यक्षता की जिसमें मैनकॉन के एक पारंपरिक प्रमुख, एक प्रेस्बिटेरियन मध्यस्थ, एक इमाम और एक कैथोलिक नन शामिल थे। इसका उद्देश्य उस अंतरधार्मिक आंदोलन को उजागर करना था जो संघर्ष को समाप्त करने और इसके कई पीड़ितों की देखभाल करने का प्रयास कर रहा है।

वेटिकन न्यूज के अनुसार, पोप लियो ने कहा कि जंग को बढ़ावा देने वाले यह मानने से ही इनकार कर देते हैं कि तबाही में एक पल लगता है लेकिन उसे दोबारा बनाने में पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाती है।

उन्होंने कहा, “दुनिया मुट्ठी भर तानाशाहों के हाथों तबाह हो रही है फिर भी यह असंख्य सहयोगी भाइयों और बहनों के कारण एकजुट है!”

तबाही में लगता है एक पल लेकिन…

कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु ने कहा कि “कुछ तानाशाह” यह मानने से इनकार करते हैं कि “तबाही करने में बस एक पल लगता है, लेकिन सब कुछ दोबारा बनाने के लिए पूरी जिंदगी काफी नहीं होती।” पोप ने दुख जताया कि कैसे सत्ता में बैठे लोग हत्या और तबाही पर अरबों डॉलर खर्च कर देते हैं, “फिर भी इलाज, शिक्षा और बहाली के लिए जरूरी रिसोर्स कहीं नहीं मिलते।”

उन्होंने आगे कहा कि लोग अफ्रीका के संसाधन का उपयोग हथियार खरीदने के लिए करते हैं, “अस्थिरता और मौत के कभी न खत्म होने वाले चक्र को जारी रखते हैं।”

पोप ने ये बातें कैमरून के जातीय संघर्ष को लेकर कीं। हालांकि इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु पर टिप्पणियां भी चर्चा में रही हैं।

हालिया विवाद की नींव ईस्टर के आसपास पड़ी जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी धमकियां देनी शुरू कर दीं। जवाब में पोप लियो ने अपने ‘पाम संडे’ संदेश में कहा कि ईश्वर उन लोगों की प्रार्थनाओं को खारिज कर देता है जो युद्ध छेड़ते हैं।

उनकी टिप्पणियों पर ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलकर पोप की आलोचना शुरू की। बीते रविवार (12 अप्रैल) को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोप को कमजोर बताया। कैथोलिक धर्म अपना चुके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि पोप लियो को धर्मशास्त्र के बारे में बोलते समय सावधान रहना चाहिए।

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(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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