Sunday, April 19, 2026
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पीएम मोदी के राष्ट्र संबोधन पर मचा सियासी घमासान, CPI ने लिखी चुनाव आयोग को चिट्ठी

राज्यसभा सांसद कमल हासन ने सुझाव दिया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा सीटों के भीतर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए, बिना परिसीमन से जोड़े। उन्होंने कहा कि ‘चोर दरवाजे’ से परिसीमन लाने की कोशिश संघीय संतुलन को कमजोर कर सकती है।

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सियासी माहौल गरमाया हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद विपक्षी खेमा भारी आक्रोश में है। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इसे राजनीतिक भाषण करार देते हुए आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि एक हताश और निराश प्रधानमंत्री मोदी, जिनके पास पिछले 12 सालों में दिखाने के लिए कुछ भी ठोस नहीं है, उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया।

खड़गे ने कहा कि आचार संहिता पहले से लागू है, फिर भी प्रधानमंत्री ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर अपने विरोधियों पर हमला किया, जो लोकतंत्र और भारत के संविधान का घोर अपमान है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कांग्रेस का जिक्र 59 बार किया, जबकि महिलाओं का जिक्र बमुश्किल कुछ ही बार किया, जिससे उनकी प्राथमिकताएं साफ हो जाती हैं। महिलाएं भाजपा की प्राथमिकता नहीं हैं; कांग्रेस ही महिलाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने मांग की कि सरकार 2023 के कानून के तहत मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करे और परिसीमन बिलों को महिला आरक्षण के साथ जोड़ना बंद करे।

पीएम का संबोधनः सीपीआई ने चुनाव आयोग से की शिकायत

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. संदोश कुमार ने पीएम मोदी के संबोधन को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संबोधन निष्पक्ष सरकारी वक्तव्य न होकर पूरी तरह राजनीतिक था, जिसमें पक्षपातपूर्ण दावे और जनमत को प्रभावित करने की कोशिशें शामिल थीं।

संदोश कुमार ने अपने पत्र में यह भी कहा कि दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर इस तरह का प्रसारण चुनावी निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने, जांच कराने और जवाबदेही तय करने की मांग की है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पोस्ट किया कि अब कल ‘पीडीए’ प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल की भाजपाई साजिश का खुलासा किया जाएगा।

वहीं, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का बिल 2023 में ही पास हो गया था और 2 दिन पहले ही इसे नोटिफाई भी कर दिया गया है; अब इसे लागू करने और 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं को देने से आपको कोई भी चीज नहीं रोक सकती-ठीक वैसे ही, जैसा कि टीएमसी ने किया है।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी पीएम के संबोधन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उनपर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आपने परिसीमन विधेयक को पारित करवाने की कोशिश में उन्हें एक ‘डिकॉय’ के तौर पर इस्तेमाल किया है। डिकॉय यानी कोई ऐसी चीज या व्यक्ति, जिसका इस्तेमाल किसी को झांसा देकर वह काम करवाने के लिए किया जाता है, जो आप उनसे करवाना चाहते हैं।

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भाजपा पर ओबीसी नेताओं के अपमान का आरोप लगाते हुए कहा कि यही भाजपा का असली चेहरा है; पटेल समाज से आने वाले सांसद नरेश उत्तम के घर पर जूता चप्पल चलाया जा रहा है और ओबीसी नेताओं को अपमानित करना भाजपा की मानसिकता का हिस्सा है।

‘पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम का गलत इस्तेमाल किया’

दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद कमल हासन ने सुझाव दिया कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा सीटों के भीतर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए, बिना परिसीमन से जोड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘चोर दरवाजे’ से परिसीमन लाने की कोशिश संघीय संतुलन को कमजोर कर सकती है।

केरल से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री ने कभी भी राष्ट्र के नाम अपने संबोधन का इस्तेमाल इस तरह से खुले तौर पर विपक्ष की आलोचना करने के लिए नहीं किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष के कार्यों की तुलना ‘भ्रूण हत्या’ से करके प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि भाजपा संवैधानिक रीति-रिवाजों को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

भाजपा नेताओं ने क्या कहा?

उधर, सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा के नेताओं ने प्रधानमंत्री के रुख का पुरजोर समर्थन किया है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विपक्ष पूरी तरह बेनकाब हो गया है और उन्होंने महिलाओं के अधिकार छीन लिए हैं। उनकी पत्नी शोभा गुप्ता ने प्रधानमंत्री के संबोधन को एक पिता की हताशा बताया जो अपनी बेटियों को हक न मिलने पर दुखी है।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विपक्षी दलों पर ‘आपराधिक मानसिकता’ का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस, राजद, सपा और कम्युनिस्टों ने मां-बेटी के अधिकार को खत्म करने का वातावरण बनाया है, जिसके लिए महिलाएं उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह आरक्षण को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के संशोधन के लिए भी तैयार थे, लेकिन विपक्ष की कोई रुचि नहीं थी। इस प्रकार, महिला आरक्षण का मुद्दा अब एक बड़े सियासी और संवैधानिक टकराव में तब्दील हो चुका है।

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अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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