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नेपाल: अंतरिम नेता को लेकर असमंजस की स्थिति, जेन-जी ग्रुप में मतभेद

नेपाल में अंतरिम नेता के चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति है। जेन-जी समूह इसको लेकर दो-धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। इससे पहले सुशीला कार्की को अंतरिम नेता चुना गया था।

NEPAL GEN Z DIVIDED IN TWO GROUPS NO CLEARANCE ON INTERIM LEADER, नेपाल
नेपाल में अंतरिम नेता के चयन को लेकर असमंजस की स्थिति, फोटोः आईएएनएस

काठमांडूः नेपाल में जेन-जी प्रदर्शन के बीच अंतरिम नेता को लेकर असमंजस की स्थिति हो गई है। अंतरिम नेता के चुनाव को लेकर जेन-जी समूह दो धड़ों में बंटता दिखाई दे रहा है। इस बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने जोर देकर कहा कि मौजूदा गतिरोध का कोई भी समाधान मौजूदा संविधान के तहत ही निकाली जाना चाहिए।

इससे पहले बुधवार (10 सितंबर) को जेन-जी समूह ने ऑनलाइन मीटिंग के जरिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुशीला कार्की का चुनाव किया था। वहीं, गुरुवार (11 सितंबर) को जेन-जी के एक समूह ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी प्रमुख कुलमन घीसिंग के नाम का प्रस्ताव राष्ट्रपति के हालिया रुख से नेपाल के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल की अंतरिम सरकार को जल्द से जल्द संभालने की कोशिशें मुश्किल हो गई हैं। इससे पहले जनरल सिगडेल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की से अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभालने का आग्रह किया था। उन्होंने काफी अनुरोध और कुछ जेन-जी समूहों के औपचारिक बयान के बाद पद स्वीकार कर लिया था।

नेपाल का मौजूदा संविधान क्या कहता है?

नेपाल का मौजूदा संविधान किसी पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के जज को रिटायरमेंट के बाद प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने की अनुमति नहीं देता है। इसके अलावा किसी राजनैतिक या संवैधानिक पद को धारण करने की अनुमति नहीं देता है। कार्की जून 2017 में रिटायर हुईं थीं।

राष्ट्रपति पौडेल ने कहा है कि मौजूदा संविधान के तहत गतिरोध का समाधान संभव है और इस पर आगे प्रयास किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति के इस बयान को नेपाल के बदलते हालातों में मौजूदा राजनैतिक व्यवस्था और संविधान की रक्षा के लिए एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। उनके कदम को चार पार्टियों ने समर्थन दिया है। इनमें सीपीएन (माओवादी सेंटर), नेपाली कांग्रेस, सीपीएन (यूएमएल) और मदेश-केंद्रित समूह शामिल हैं।

पौडेल का यह बयान सेना प्रमुख जनरल सिगडेल के उस बयान के विपरीत है वे कई जेन-जी समूहों और अन्य नेताओं को साथ में लाकर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह किसी मौजूदा राजनैतिक दल के नेता के नेतृत्व वाली सरकार के गठन को सुगम बनाना चाहते हैं।

यदि राष्ट्रपति का कदम सफल होता है तो यह मुद्दा संसद में भेजा जाएगा जहां नेपाली कांग्रेस और सीपीएल (यूएमएल) के गठबंधन के पास बहुमत होगा। इनके गठबंधन की सरकार दो दिनों पहले तक थी। इनके नेताओं को प्रदर्शनकारियों द्वारा निशाना बनाया गया था और हमला किया गया था। ऐसे में इससे ओली या उनके द्वारा समर्थित किसी उम्मीदवार की वापसी की संभावना बढ़ जाती है। ओली ने संसदीय दल के नेता के रूप में इस्तीफा नहीं दिया है।

संविधान को बचाने के रूप में देखा जा रहा राष्ट्रपति का कदम

राष्ट्रपति द्वारा इस कदम को उठाए जाने को संसद और संविधान को बचाने के रूप में देखा जा रहा है। जेन-जी समूहों के बीच मतभेद के बीच यह कदम उठाया गया है। हालांकि, इसका कोई औपचारिक ढांचा या कमान श्रृंख्ला नहीं है और कई समूह अलग-अलग सुझाव दे रहे हैं।

मौजूदा संविधान को बचाने के संकेतों की एकता दिखाने के बावजूद कई बड़ी पार्टियों के नेताओं ने प्रदर्शनों के दौरान मारे गए 20 लोगों और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।

जहां प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने हिंसा के लिए असामाजिक तत्वों और अपराधियों को जिम्मेदार ठहराया। इनके बारे में ओली ने कहा था कि ये जेन-जी समूह के बीच घुसपैठ कर चुके हैं। वहीं, माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने इसका सीधा दोष सीपीएन (यूएमएल) और नेपाली कांग्रेस पर मढ़ा। प्रचंड दहल ने कहा कि 14 महीने पहले जब उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाने शुरू किए थे तो उन्होंने मिलकर मेरी सरकार को गिरा दिया था।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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