Monday, April 27, 2026
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राघव चड्ढा समेत ‘AAP’ के 7 सांसदों के विलय को सभापति की मंजूरी, कितना बदला राज्य सभा का सियासी गणित?

राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अन्य राज्यसभा सांसदों ने 24 अप्रैल को ‘आप’ से अलग होने की घोषणा की थी। यह अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए बड़ा झटका था। इस कदम से ‘आप’ के राज्यसभा समीकरण में भारी फेरबदल हुआ है।

नई दिल्ली: राज्य सभा सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पिछले हफ्ते आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले राघव चड्ढा और छह अन्य सांसदों द्वारा घोषित भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है। इसी के साथ राज्यसभा में भाजपा की कुल सीटों की संख्या अब 113 हो गई है। भाजपा में शामिल होने वालों में राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता का नाम शामिल है।

बदले समीकरण के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक पोस्ट के जरिए आप से भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों का स्वागत किया। रिजिजू ने कहा कि उन सांसदों ने सदन ने न कभी अपशब्दों का प्रयोग किया न अनुशासनहीनता की।

राज्यसभा सचिवालय से अधिसूचना जारी

राज्यसभा सचिवालय ने इस संबंध में सोमवार सुबह अधिसूचना जारी की। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी की गई यह सूची बताती है कि 24 अप्रैल 2026 तक की स्थिति के अनुसार जहां भाजपा सांसदों की संख्या 113 हो गयी है, वहीं आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या 10 से घटकर 3 रह गई है।

राज्य सभा सचिवालय द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, संदीप कुमार पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के नाम भाजपा सांसदों की सूची में दर्ज हैं।

वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सोशल मीडिया पर राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा विलय को मंजूरी दिए जाने की जानकारी की। रिजिजू ने AAP पर निशाना साधते हुए लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण करने वाले NDA में आपका स्वागत है और टुकड़े-टुकड़े INDI गठबंधन को अलविदा।’

रिजिजू ने भाजपा में शामिल सदस्यों की जमकर प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने कभी भी असंसदीय आचरण नहीं किया। रिजिजू ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मैंने लंबे समय से देखा है कि इन 7 माननीय सांसदों ने कभी भी अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया और न ही कभी अनुशासनहीनता या असंसदीय आचरण किया।’

राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अन्य राज्यसभा सांसदों ने 24 अप्रैल को ‘आप’ से अलग होने की घोषणा की थी। यह अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए बड़ा झटका था। इस कदम से ‘आप’ के राज्यसभा समीकरण में भारी फेरबदल हुआ और सदन में पार्टी की सीटों की संख्या घटकर केवल तीन रह गई है। पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से थे, जिससे आम आदमी पार्टी के पास राज्य से राज्य सभा में केवल एक ही सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल बचे रह गए हैं।

इससे पहले रविवार को आम आदमी पार्टी की ओर से 7 सांसदों के विलय को लेकर सभापति को याचिका सौंपी गई। आप सांसद संजय सिंह ने बताया इसमें संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत इन सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया गया है। सिंह ने कहा कि सांसदों ने पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होकर दलबदबल किया है, जिस पर संवैधानिक प्रावधानों के तहत विचार किया जाना चाहिए।

राज्य सभा का नया गणित

राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी ‘पार्टी पोजीशन’ दस्तावेज में विभिन्न दलों की मौजूदा ताकत का विवरण दिया गया है। इसके अनुसार भाजपा 113 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस 29 सांसदों के साथ दूसरे स्थान पर है। तृणमूल कांग्रेस के 13 सदस्य हैं, जबकि डीएमके के 8 सांसद उच्च सदन में मौजूद हैं।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 7 और बीजू जनता दल के 6 सदस्य भी सूची में शामिल हैं। आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है। इसके अलावा अन्नाद्रमुक के 5, जनता दल (यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 4-4 सदस्य राज्यसभा में हैं।

अन्य दलों में राष्ट्रीय जनता दल, भारत राष्ट्र समिति, माकपा और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के 3-3 सदस्य शामिल हैं। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा और भाकपा के 2-2 सांसद हैं। कई छोटे दलों और क्षेत्रीय पार्टियों के एक-एक सदस्य भी इस सूची में दर्ज हैं, जबकि 3 निर्दलीय सांसद भी राज्यसभा का हिस्सा हैं।

यह भी पढ़ें- AAP से भाजपा में गए विक्रमजीत सिंह साहनी ने भगवंत मान के ‘गद्दारी’ वाले बयान पर क्या कहा है?

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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