चेन्नईः मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार (10 मई) को तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) के विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने से रोक लगाई है। सेतुपति ने तिरुपत्तुपर विधानसभा सीट से डीएमके उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पम को एक वोट से मात दी थी। डीएमके नेता ने सेतुपति की जीत को चुनौती दी थी।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, सेतुपति को 83375 वोट मिले जबकि डीएमके नेता को 83374 वोट मिले थे। मंगलवार (10 मई) के आदेश के मुताबिक, सेतुपति फिलहाल सदन परीक्षण या विधानसभा की अन्य कार्यवाही में भाग नहीं ले सकते।
मद्रास हाई कोर्ट से टीवीके को झटका
डीएमके के पेरियाकरुप्पन सेतुपति से एक वोट से चुनाव हार गए थे। अपनी याचिका में पेरियाकरुप्पन ने आरोप लगाया था कि डाक मतपत्र (पोस्टल बैलट) गलत निर्वाचन क्षेत्र में भेजे जाने के कारण उसकी गिनती नहीं की गई। उन्होंने मतगणना प्रक्रिया में अन्य अनियमितताओं और विसंगतियों का भी आरोप लगाया था।
जस्टिस विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन सेंथिलकुमार की पीठ ने आज फैसला सुनाया कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसलिए अदालत ने टीवीके के विजयी उम्मीदवार सेतुपति को अगले आदेश तक मतदान करने या किसी भी प्रकार की सदन परीक्षा में भाग लेने से रोक दिया। इसमें विश्वास प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव, विश्वास मत या कोई भी मतदान प्रक्रिया शामिल है जहां सदन की संख्यात्मक शक्ति का परीक्षण किया जाता है।

अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस आदेश को सेतुपति के चुनाव को रद्द करने के रूप में नहीं माना जाएगा। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आदेश से पेरियाकरुप्पन को निर्वाचित घोषित होने का कोई अधिकार नहीं मिलता।
इस आदेश का अर्थ यह होगा कि तमिलनाडु विधानसभा में जिसमें 234 सदस्य हैं टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास केवल एक विधायक का मामूली बहुमत रह गया है। वर्तमान में टीवीके गठबंधन के पास सदन में 120 विधायक हैं। आज के आदेश के बाद केवल 119 विधायक ही सदन की कार्यवाही में भाग ले सकेंगे।
हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
आज के आदेश में अदालत ने निर्देश दिया कि सरकारी प्रतिवादी 4 मई को हुई विधानसभा चुनाव की गणना से संबंधित सभी अभिलेखों को सुरक्षित रखें। इन अभिलेखों में समेकित मतगणना सारांश, वैधानिक प्रपत्र, चरण-वार मतगणना पत्रक, ईवीएम मतपत्र अभिलेख, डाक मतपत्र अभिलेख, अस्वीकृत डाक मतपत्र लिफाफे, अस्वीकृत डाक मतपत्र, घोषणापत्र, लिफाफे, अस्वीकृत डाक मतपत्रों के पुनर्सत्यापन से संबंधित कार्यवाही और सभी संबंधित सामग्रियां शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 से संबंधित कोई डाक मतपत्र कथित रूप से तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में प्राप्त हुआ हो उस पर कार्रवाई की गई हो, उसे रखा गया हो या अस्वीकार किया गया हो, तो उसे अलग से चिह्नित, सीलबंद, सुरक्षित और संरक्षित किया जाना चाहिए, बिना खोले या उसमें छेड़छाड़ किए।
इसके साथ ही अदालत ने मतगणना, डाक मतपत्रों, जांच, डाक मतपत्रों की अस्वीकृति और यदि कोई पुन: सत्यापन हो, से संबंधित वीडियो फुटेज को उसके मूल इलेक्ट्रॉनिक रूप में, बैकअप प्रतियों के साथ, संरक्षित करने का भी आदेश दिया।
प्रतिवादियों को कानून के मुताबिक और न्यायालय या सक्षम चुनाव मंच के आगे के आदेशों के अधीन रहते हुए ऐसी सामग्री को नष्ट करने, बदलने, स्थानांतरित करने या उसकी अभिरक्षा से अलग करने से प्रतिबंधित किया गया है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश को पुनर्गणना, मतपत्रों को दोबारा खोलने, किसी भी अस्वीकृत डाक मतपत्र के सत्यापन या पहले से घोषित परिणाम में हस्तक्षेप करने के निर्देश के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।
इससे सभी पक्षों के अधिकारों और दलीलों के लिए प्रश्न खुले रहे जिनमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उपलब्ध उपाय भी शामिल हैं। इससे पहले कल (11 मई) अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि डीएमके नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन द्वारा कथित तौर पर गलत तिरुप्पत्तूर निर्वाचन क्षेत्र में भेजे गए डाक मतपत्र के संबंध में दायर अभ्यावेदन का उसने जवाब क्यों नहीं दिया।



