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‘आपके विपरीत मैं कोर्ट के आदेश का सम्मान करता हूं’, कार्तिकई दीपम से जुड़े मामले में बोले जस्टिस स्वामीनाथन

मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने दीपम विवाद में सुनवाई के दौरान कहा कि मैं आपके विपरीत अदालत के फैसले का सम्मान करता हूं।

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फोटोः आईएएनएस

चेन्नईः मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने बुधवार (18 मार्च) को कहा कि वे अदालत के आदेशों का सम्मान करने में विश्वास करते हैं। उन्होंने यह टिप्पणी मदुरै के स्थानीय अधिकारियों द्वारा तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर कार्तिकई दीपम प्रज्वलित करने के अदालत के फैसले पर विफल रहने पर की हैं।

कार्तिकई दीपम हिंदू प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में जलाया जाने वाला दीपक है।

जस्टिस स्वामीनाथन ने क्या टिप्पणी की?

जस्टिस ने यह टिप्पणी मदुरै अधिकारियों की ओर से पक्ष रख रहे वकील की टिप्पणी के बाद की जिसमें उन्होंने कहा कि अदालत की एक खंडपीठ ने कल जस्टिस स्वामीनाथन के समक्ष राज्य अधिकारियों के खिलाफ इस मामले से संबंधित सभी अवमानना कार्यवाहियों पर रोक लगा दी थी।

हालांकि, मंदिर के श्रद्धालुओं की तरफ से पक्ष रख रहे वकील ने इसका खंडन करते हुए कहा कि स्थगन आदेश केवल जस्टिस स्वामीनाथन द्वारा 4 दिसंबर 2025 को पारित आदेश पर लागू होता है।

जस्टिस स्वामीनाथन ने जवाब देते हुए कहा कि वे उनके समक्ष प्रस्तुत अंतरिम स्थगन आदेश के औपचारिक पाठ के आधार पर निर्णय लेंगे। उन्होंने आगे पूछा कि स्थगन आदेश में कहां यह उल्लेख किया गया है कि संपूर्ण अवमानना ​​कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।

गौरतलब है कि मंगलवार (17 मार्च) को खंडपीठ ने स्थगन आदेश पारित किया था। इसमें कहा गया है कि “दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दलीलों पर विचार करते हुए 8 अप्रैल 2026 तक अंतरिम स्थगन आदेश लागू रहेगा।”

राज्य की ओर से पेश हुए वकील ने क्या दलील दी?

राज्य के वकील ने आज यह तर्क दिया कि सामान्य अंतरिम आदेश सिविल विविध याचिका (सीएमपी) पर भी लागू होता है जिसमें अदालत की अवमानना ​​की सभी कार्यवाही को चुनौती दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि यदि इस सीएमपी में की गई प्रार्थना के संबंध में रजिस्ट्री से स्पष्टीकरण मांगा जाए तो भ्रम से बचा जा सकता है।

डिवीजन बेंच के स्थगन आदेश के पहले पृष्ठ पर सीएमपी का स्पष्ट उल्लेख है। राज्य ने कहा कि इसका अर्थ यह है कि अंतरिम स्थगन सीएमपी में उल्लिखित अवमानना ​​कार्यवाही पर भी लागू होता है।

जस्टिस स्वामीनाथन ने पूछा, “मुझे कैसे पता चलेगा कि आपने वहां क्या प्रार्थना की है?”

राज्य के वकील ने सुझाव दिया कि इस संबंध में रजिस्ट्री से रिपोर्ट मंगाई जा सकती है।

इस पर जस्टिस स्वामीनाथन ने उत्तर दिया कि ” यह मेरा काम नहीं है। मैं आपके द्वारा प्रस्तुत अंतरिम आदेश का पालन करूंगा। मुझे (रजिस्ट्री से और स्पष्टीकरण क्यों मांगना चाहिए?) क्या यह मेरा काम है? यह मेरा काम नहीं है। डिवीजन बेंच द्वारा पारित किसी भी आदेश का पालन करना मेरा कर्त्तव्य है। मैं अदालत के आदेशों का सम्मान करने में विश्वास रखता हूं, आप लोगों के विपरीत। “

गौरतलब है कि यह मामला दिसंबर 2025 के उस फैसले से जुड़ा हुआ है जो जिसमें तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित एक पत्थर के स्तंभ को अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का दीपस्तून घोषित किया गया था।

अदालत ने स्थल पर पारंपरिक कार्तिकई दीपम प्रज्ज्वलन को बहाल करने का निर्देश दिया था और स्पष्ट किया था कि ऐसा करने से पास के मुस्लिम तीर्थस्थल, सिकंदर बादुशा दरगाह के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इस फैसले के बावजूद कार्तिकई उत्सव के दौरान दीप नहीं जलाया गया, जिसके चलते श्रद्धालुओं ने अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू कर दी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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