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पर्माफ्रॉस्ट पिघलना क्यों है खतरे की घंटी? साइबेरिया की ‘एंथ्रेक्स घटना’ से समझिए

कई स्टडी के अनुसार पूरी धरती पर पर्माफ्रॉस्ट में जमा कुल कार्बन की मात्रा करीब 1600 अरब टन है जो आज हमारे पूरे वातावरण में मौजूद कार्बन की मात्रा से लगभग दोगुना है।

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फोटो- बोले भारत

साल 2016, जुलाई-अगस्त का महीना, रूस के साइबेरिया के टुंड्रा क्षेत्र में अचानक एंथ्रेक्स बीमारी फैली। यहां बड़ी संख्या में रेनडियर या बारहसिंगा कह लीजिए…उसे पालने वाले खानाबदोश समुदाय रहते हैं। बीमारी में 12 साल के बच्चे की मौत हो गई….90 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और 2000 से ज्यादा रेनडियर की भी मौत हुई। इसके अलावा कई इलाकों को क्वारंटीन करना पड़ा। इस पूरी घटना के पीछे की जो वजह बाद में सामने आई, वो बेहद हैरान करने वाली थी।

वजह थी पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना और उससे एंथ्रेक्स जैसी खतरनाक बीमारी के बैक्टीरिया का बाहर आना। आखिर क्या होते हैं पर्माफ्रॉस्ट, बैक्टीरिया के बाहर आने की कहानी क्या है, पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना क्यों खतरे की घंटी है और इससे हमें-आपको और हमारे पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंच सकता है…आज इन्हीं मुद्दों को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही वीडियो में साइबेरिया में 2016 में फैले एंथ्रेक्स बीमारी की कहानी को भी विस्तार से जानेंगे।

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सबसे पहले जानते हैं कि पर्माफ्रॉस्ट क्या होते हैं? पर्माफ्रॉस्ट ऐसी जमीन को कहा जाता है जो कम से कम दो साल तक लगातार जमी रहती है। इसमें मिट्टी, पत्थर और अन्य कण होते हैं जो बर्फ की वजह से आपस में सीमेंट की तरह चिपके रहते हैं। इसकी गहराई कुछ सेंटीमीटर से लेकर सैकड़ों मीटर तक हो सकती है और ये एक परत से ढकी होती है, जिसे एक्टिव लेयर कहा जाता है। यह ऊपरी मिट्टी की परत अक्सर गर्मियों में पिघल जाती है, लेकिन इसके ठीक नीचे का हिस्सा जमा रह जाता है। हालांकि कुछ जगहों पर पर्माफ्रॉस्ट जमीन की सतह पर भी पाया जाता है।

बहरहाल, आज जो पर्माफ्रॉस्ट मौजूद है उसका ज्यादातर हिस्सा हिमयुग यानी Ice Age के दौरान या उसके बाद बना था। क्योंकि यह बहुत पुराना है, इसलिए इसके अंदर डिकम्पोज हो चुके या कह लीजिए कि गल चुके जैविक पदार्थों की वजह से…….बड़ी मात्रा में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइ़ड- जैसी ग्रीनहाउस गैसें जमा हो गई हैं। और यही है जमीन के नीचे दबा ‘टाइम बम’। इसे हम टाइम बम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई स्टडी के अनुसार पूरी धरती पर पर्माफ्रॉस्ट में जमा कुल कार्बन की मात्रा करीब 1600 अरब टन है जो आज हमारे पूरे वातावरण में मौजूद कार्बन की मात्रा से लगभग दोगुना है। इसलिए अगर पर्माफ्रॉस्ट पिघलता है और ये गैसें बाहर निकलती हैं, तो यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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