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कोलकाता में मेसी के आने पर हुई हिंसा मामले में आयोजक को 14 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया

कोलकाता में फुटबॉलर मेसी के आने पर हुई हिंसा मामले में आयोजक को 14 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। घटना के बाद सीएम ममता बनर्जी ने माफी मांगी थी।

kolkata organiser sent to 14 day police custody in connection with violence that erupted during messi india visit, कोलकाता

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने रविवार, 14 दिसंबर को अर्जेंटीना के फुटबॉल स्टार खिलाड़ी लियोनल मेसी के GOAT इंडिया टूर 2025 के प्रमोटर और मुख्य आयोजक को 14 दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। कोलकाता में बीते शनिवार को हुए कार्यक्रम में अराजकता और तोड़फोड़ की घटना के बाद यह कदम उठाया गया।

मेसी के खेल आयोजन के मुख्य आयोजक शतद्रु दत्ता को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (जिसे सॉल्ट लेक स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है) में कथित कुप्रबंधन और सार्वजनिक अव्यवस्था के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद बिधाननगर अदालत में पेश किया गया। जब उन्हें अदालत में लाया जा रहा था, तब भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाहर विरोध प्रदर्शन किया, नारे लगाए और आयोजकों पर दर्शकों को धोखा देने का आरोप लगाया।

भव्य फुटबॉल मैच का था आयोजन

गौरतलब है कि 13 दिसंबर को एक भव्य फुटबॉल मैच का आयोजन था। हालांकि, लियोनल मेसी के संक्षिप्त उपस्थिति के बाद यहां हिंसा हो गई और लोगों ने तोड़फोड़ की। मेसी थोड़ी देर ही रुके जिससे फैंस को काफी निराशा हुई क्योंकि वे मेसी की झलक तक नहीं देख पाए। कई समर्थक तो दूर-दूर राज्यों से आए थे।

इसके बाद दर्शकों का गुस्सा गैलरी में फूट पड़ा। उन्होंने सीटों, बैरिकेड्स, रेलिंग को नुकसान पहुंचाया। इस मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई और भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा योजना में खामियों का हवाला देते हुए मुख्य आयोजक को तुरंत हिरासत में ले लिया।

घटना के एक दिन बाद रविवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय जांच समिति ने स्टेडियम का दौरा किया ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके और घटनाक्रम का पुनर्निर्माण किया जा सके।

सेवानिवृत्त कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस आशीष कुमार राय की अध्यक्षता में गठित पैनल में मुख्य सचिव मनोज पंत और गृह सचिव नंदिनी चक्रवर्ती शामिल थे। पैनल ने आयोजन स्थल का व्यापक निरीक्षण किया। टीम ने स्टेडियम के प्रवेश द्वार से लेकर मेसी की गतिविधियों का पता लगाया और सुरक्षा व्यवस्था, गलियारों और आसपास की गैलरी का निरीक्षण किया।

स्टेडियम में मौजूद थे 50 हजार दर्शक

कई ब्लॉकों में टूटी हुई प्लास्टिक की कुर्सियां, मुड़ी हुई धातु की बैरिकेड्स, फटे हुए बैनर, बिखरे हुए जूते और क्षतिग्रस्त फाइबरग्लास की सीटें दिखाई दे रही थीं। सफाई और मरम्मत का काम रोक दिया गया ताकि समिति तोड़फोड़ की सीमा का आकलन कर सके और भीड़ के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की पहचान कर सके। समिति के साथ आए अधिकारियों ने जांच के हिस्से के रूप में वीडियोग्राफी और तस्वीरों के माध्यम से निरीक्षण को रिकॉर्ड किया।

इस घटना के तुरंत बाद सीएम ममता बनर्जी ने मेसी और फुटबॉल प्रशंसकों से माफी मांगी थी। इसके साथ ही जिम्मेदारी तय करने और हाई-प्रोफाइल आयोजनों में इस तरह की घटनाओं का दोहराव न हो, इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा भी की थी।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जांच टिकटों की व्यवस्था, प्रवेश प्रबंधन, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और आयोजकों तथा अधिकारियों के बीच समन्वय पर केंद्रित होगी।

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया। स्टेडियम में लगभग 50,000 दर्शक मौजूद थे जिनके टिकटों की कीमत 4,000 रुपये से 12,000 रुपये तक थी और खबरों के अनुसार काला बाजार में यह 20,000 रुपये तक पहुंच गई थी।

प्रशंसक असहाय होकर देखते रह गए क्योंकि राजनेताओं, वीवीआईपी, सुरक्षाकर्मियों और उनके दल ने मेसी को घेर लिया जिससे स्टैंड में आक्रोश और अराजकता फैल गई।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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