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वायनाड में कंस्ट्रक्शन साइट पर भूस्खलन से 4 लोगों की मौत, प्रियंका गांधी ने स्थानीय लोगों से मदद की लगाई गुहार

कांग्रेस नेता और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है और राज्य प्रशासन आपसी तालमेल के साथ काम कर रहा है। उन्होंने लोगों से मदद की भी अपील की है।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

वायनाड: केरल के वायनाड में एक टनल बनाने की जगह के पास जबरदस्त भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने से चार लोगों की मौत हो गई और दस लोग घायल हो गए। इस घटना में कम से कम सात मजदूर अभी भी लापता हैं। यह घटना वायनाड में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के बीच हुई है।

शुरुआत में दो लोगों की मौत की खबर थी लेकिन बाद में बचावकर्मियों को दो और शव मिले। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग फंसे हुए हैं।

वायनाड भूस्खलन की घटना में घायल लोगों का इलाज जारी

दस घायल लोगों का दो अस्पतालों में इलाज चल रहा है जबकि बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी आईएएनएस की खबर के मुताबिक, इस बड़े भूस्खलन में एक चर्च और पास का एक घर भी बह गया। अच्छी बात यह रही कि घर पर ताला लगा था क्योंकि उसमें रहने वाले लोग मक्का की तीर्थयात्रा पर गए हुए थे और घटना के समय चर्च के अंदर भी कोई नहीं था।

प्रभावित इलाकों को जोड़ने वाला एक पुल मलबे के नीचे दब गया है जिससे बचाव कार्यों में भारी रुकावट पैदा हुई।

सांसद प्रियंका गांधी ने मदद की अपील की

मिट्टी हटाने और बचाव टीमों के लिए रास्ता बनाने के लिए दो एक्सकेवेटर लगातार काम कर रहे हैं। कांग्रेस नेता और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है और राज्य प्रशासन आपसी तालमेल के साथ काम कर रहा है। उन्होंने लोगों से मदद की भी अपील की है।

प्रियंका गांधी ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन खुद बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं जबकि पुलिस, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों की टीमें पहले ही घटनास्थल पर तैनात कर दी गई है।

इस त्रासदी पर दुख जताते हुए प्रियंका गांधी ने जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और मुश्किल समय में उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

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उन्होंने कहा, “हमारी प्रार्थनाएं और उम्मीदें उन लोगों के साथ हैं जो अभी भी लापता हैं। जब तक बचाव टीमें उन तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, वे मजबूत बने रहें और उनके प्रियजनों को इस दर्दनाक पल को सहने की हिम्मत मिले।”

उन्होंने यूडीएफ कार्यकर्ताओं, पार्टी पदाधिकारियों और आम जनता से भी अपील की कि वे जिला प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए हरसंभव मदद करें।

उन्होंने कहा, “ऐसे समय में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बचाव और राहत कार्यों में कोई रुकावट न आए। बिना किसी तरह की बाधा पैदा किए सभी को हरसंभव मदद करनी चाहिए।”

राहत और बचाव कार्य जारी

बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और भारी मात्रा में मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि लगातार बारिश के कारण साइट पर खोदी गई मिट्टी के बड़े ढेर ढह गए, जिससे काम करने वाली जगह का कुछ हिस्सा मलबे में दब गया।

यह घटना मेप्पाडी में हुई बहुत ज्यादा बारिश के बाद हुई, जहां पिछले 24 घंटों में 226 मिमी बारिश दर्ज की गई।

यह इलाका पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है और जब मिट्टी खिसकने की घटना हुई, तो पास ही कई निजी गाड़ियां और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को लाने-ले जाने वाली एक बस खड़ी थी। बचाव कर्मियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी लोग दबे हो सकते हैं।

यहां केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मुख्यालय में आपातकालीन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद, सीएम सतीशन ने कहा कि लगातार बारिश के कारण बचाव कार्यों में भारी बाधा आने के बावजूद बचाव दल काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने निर्माण कंपनी को कई बार निर्देश दिए थे कि साइट पर जमा की गई खोदी हुई मिट्टी के बड़े ढेर को हटा दिया जाए।

इस संबंध में 20 जून को एक औपचारिक सरकारी आदेश जारी किया गया था लेकिन कंपनी ने उसका पालन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी को बचाव कार्यों की निगरानी के लिए वायनाड जाने का निर्देश दिया गया है।

दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि सुरंग निर्माण स्थल पर खोदी गई मिट्टी को किस तरह से डंप किया गया था।

उन्होंने कहा कि शुरुआती आकलन से पता चलता है कि पहले चिंता जताए जाने के बावजूद मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से जमा किया गया था।

सिद्दीकी ने कहा, “यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है। यह मानव-जनित आपदा है।” उन्होंने कहा कि सरकार इस बात की जांच करेगी कि क्या पहले दी गई चेतावनियों के बाद क्या कोई कार्रवाई की गई थी।

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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