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जम्मू-कश्मीर: 30 सालों में पहली बार मई महीने में आतंक से नहीं गई एक भी जान

jammu-kashmir no terror related incident in may for three decades, जम्मू-कश्मीर
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में मई महीना शांतिपूर्ण तरीके से गुजरा। बीते तीन दशकों से अधिक समय में ऐसा पहली बार हुआ है जब आतंकवाद से संबंधित घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ है। यह आंकड़े दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (SATP) पर जारी किए गए। यह स्थिति जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार को दर्शाता है।

जम्मू-कश्मीर में तीन दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है कि मई महीने में किसी भी आतंकी घटना या घुसपैठ के प्रयास में कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। एसएटीपी के आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में इस साल आतंकी घटनाओं में 12 लोग मारे गए हैं इनमें जनवरी में तीन, फरवरी में छह, मार्च में दो और अप्रैल में एक मौत शामिल है। मृतकों में 10 आतंकवादी और एक जवान शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर में मई महीने की आतंकी घटनाओं का इतिहास

SATP के आंकड़ों में आगे बताया गया कि आतंकवाद संबंधित हिंसा में 2025 के मई महीने में 14 लोग मारे गए। 2024 में यह आंकड़ा 7 था और 2023 में 14 लोग आतंकी घटनाओं में मारे गए। इसी तरह 38 लोग 2022 में मारे गए, 2021 में 16 लोग मारे गए, 2020 में 28 लोग मारे गए। इससे पहले के सालों में भी आतंकी घटनाओं में मौतें दर्ज की गईं।

इन आंकड़ों के मुताबिक, आतंकवादी हिंसा का चरम दौर 2000 से 2006 तक देखा गया जब हर साल लोग बड़ी संख्या में मारे गए। आंकड़ों के मुताबिक, मई 2000 में 288 लोग, 2001 में 300 लोग, 2002 में 288 लोग,2003 में 241 लोग, 2004 में 195 लोग, 2005 में 188 लोग, 2006 में 140 लोग मारे गए। 2007 से आतंकी घटनाओं में मारे गए लोगों की संख्या पिछले सालों की तुलना में कम होकर 2 अंकों तक रही।

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सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दियों के महीनों में शांति रहने और बर्फ पिघलने के कारण नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के दर्रों के फिर से खुलने के बाद मई में जम्मू-कश्मीर में हिंसा बढ़ जाती थी। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए जारी आतंकवाद विरोधी अभियानों और घुसपैठ रोधी ग्रिड को मजबूत करने से जमीनी स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा कि “आतंकवादियों द्वारा स्थानीय स्तर पर भर्ती अब तक के सबसे निचले स्तर पर है और घुसपैठ भी सबसे कम है।”

विशेषज्ञों ने क्या बताया?

उन्होंने कहा कि “सभी शीर्ष आतंकी संगठनों के कमांडरों को मार गिराया गया है। आतंकी ढांचे और समर्थन प्रणाली जिसमें ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क भी शामिल है, को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है और नई भर्ती रोक दी गई है।” जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस प्रमुख एस पी वैद्य ने कहा, “ सुरक्षा बलों और पुलिस ने आतंकवादियों की भर्ती को काफी हद तक कम करने के लिए कड़ी मेहनत की है। ”

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रविवार (31 मई) को सेना ने पीओके के रहने वाले 22 वर्षीय जीशान मीर को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि उसने सोशल मीडिया पर पनपे स्थानीय गांव की इरुम बानो से प्रेम संबंध के चलते नियंत्रण रेखा पार की थी। उसी दिन एक अन्य घटना में सेना ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में तीन लोगों को गिरफ्तार कर कथित तौर पर सीमा पार घुसपैठ के प्रयास को विफल कर दिया।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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