1990 के अक्टूबर में ईराक द्वारा कुवैत पर कब्जा कर लिया गया था। दुनिया भर में इसका व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। भारत में भी ईंधन संकट पैदा हो गया। मैं गुजरात से ट्रांसफर हो कर भुवनेश्वर पहुंचा था। मेरे पास एक ‘धरोहर’ भी था। गुजरात से भाजपा के राज्य सभा सदस्य चिमन भाई शुक्ला ने गुजरात का प्रिय- खखरा, गठिया और जलेबी भरा थैला दिया था। उन्होंने यह मुख्य तौर पर तब ओडिशा के राज्यपाल यज्ञदत्त शर्मा के लिए भिजवाया था।
उन्होंने बताया दोनों राज्य सभा के सदस्य थे। नार्थ एवेन्यू में पड़ोसी थे। साथ में सुबह का नाश्ता गठिया, खखरा और जलेबी रहता था। शर्मा जी को यह बहुत प्रिय था, इसीलिए सारे आइटम मेरे द्वारा प्रेषित किए गए। मैंने स्टेशन स्क्वायर के पास एक होटल में कमरा लिया। वहां नहा धोकर होटल से ही राज भवन का नंबर लिया। राज्यपाल के एडीसी से संपर्क हुआ। मैने अपना परिचय दिया तब उन्होंने कहा ‘महामहिम आपका इंतजार कर रहे हैं, आप आ जाइए।’
मैने उन्हें बताया कि मेरे पास गुजरात से कुछ सामान भी है, उन्होंने कहा कि शुक्ल जी ने राज्यपाल को पूरी बात बता दी है आपके बारे में, आप आ जाएं। मैने गाड़ी भेजने का निवेदन किया तब जवाब आया ‘आज तो पूरे राज्य में कोई भी गाड़ी नहीं मिलेगी, यहां तक कि दो पहिया भी नहीं, मुख्य मंत्री बीजू पटनायक ने ईंधन संकट को देखते हुए सप्ताह में एक दिन सभी सवारी चलाने पर प्रतिबंध लगाया है।’
उन्होंने सुझाव दिया कि रिक्शा से राज भवन आ जाइए। आपकी रिक्शा के लिए राज भवन का मुख्य प्रवेश द्वार खोल दिया जाएगा। इसके बाद मास्टर कैंटीन से राज भवन तक रिक्शा पर गया। वहां पहुंच कर रिक्शा चालक ने प्रवेश द्वार पर ही ड्रॉप कर दिया,तभी एक संतरी आया और हमारे रिक्शा को राज भवन के पोर्टिको तक ले गया। मुझे बहुत ही आश्चर्य हुआ। लुंगी पहनकर राज्यपाल महोदय वहीं खड़े थे, बहुत खुश हुए, गुजराती आइटम वाले झोले को लेकर आभार व्यक्त किया, साथ ही खेद भी प्रकट किया कि गाड़ी नहीं भेजी जा सकी।
यह इसलिए प्रासंगिक हो जाता है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी ईंधन संकट से चिंतित हैं, कार पुल की बात कर रहे हैं, काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का सुझाव दिया है। बिहार में इसकी शुरुआत कर दी गई है, मुख्य मंत्री सम्राट चौधरी ने भी सीएम कारकेड में गाड़ियों की संख्या घटा दी है और सभी अधिकारियों को भी सरकारी गाड़ी के प्रयोग में कमी लाने को कहा।
औरंगाबाद के जिला एवं सत्र न्यायधीश बुधवार को ही अपने आवास से अदालत साइकिल पर गए। उधर जबलपुर उच्च न्यायालय के एक न्यायधीश भी साइकिल से कोर्ट गए हैं। ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक तो और भी कड़ाई दिखाई। उन्होंने स्कूलों के खुलने और छुट्टी के समय पुलिस को आदेश दिया, कोई भी सरकारी गाड़ी मिले जो अधिकारियों के बच्चों को ले जाने के लिए खड़ी मिले, थाने ले जाकर जब्त करे और प्राथमिकी भी दायर हो।
यही निर्देश बाजारों, दुकानों तथा सिनेमा घरों के बाहर पार्क किए गए सरकारी वाहनों के लिए भी दिया गया था।
बीजू पटनायक खुद एक अम्बेसडर पर चलते। कोई फॉलो या पायलट गाड़ी नहीं रहती, सिर्फ मुख्यमंत्री का अम्बेसडर।
यह भी पढ़ें- राज की बातः जब हार के बाद रो पड़ते थे बड़े नेता, मतगणना के दिन की अनकही कहानियाँ



