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देश के साथ-साथ अपनी भी तो बचत होगी! पीएम मोदी की अपील मानी तो Forex Reserve पर क्या असर पड़ेगा?

कोविड लॉकडाउन के दौरान भारत ने विदेश यात्रा कम होने और ईंधन की मांग घटने से भारी विदेशी मुद्रा बचाई थी। तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 478 अरब डॉलर से बढ़कर 607 अरब डॉलर तक पहुँच गया था।

PM Modi advice amid West Asia crisis

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुए पश्चिम एशिया के जंग का असर अब और गहराने लगा है। भारत पिछले करीब दो महीने से इससे प्रभावित हो रहा है। हालांकि, शुरुआत में मुख्यतौर पर अफरा-तफरी एलपीजी रिफिल को लेकर ही मची रही, लेकिन ज्यादातर कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। पेट्रोल-इंजन के दाम भी नहीं बढ़े। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील ने संकेत दे दिया है कि भारत को आने वाली चुनौती को लेकर और गंभीर हो जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे वर्क फ्रॉम होम को अपनाए। गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचे और ईंधन की भी बचत करें। इसके अलावा उन्होंने लोगों से एक साल तक सोने की खरीदारी से बचने की सलाह दी है। यह सबकुछ इसलिए ताकि भारत अपनी विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को ज्यादा से ज्यादा बचा सके।

हालांकि दूसरे नजरिए से देखें तो अगर पीएम मोदी की अपील गंभीरता से मानी गई तो देश के साथ-साथ ये हर व्यक्ति के लिए भी अपनी बचत होगी। व्यक्ति बचत करेगा तो जाहिर तौर पर देश की बचत होगी। इससे पहले कोविड के दौरान लॉकडाउन, वर्क फ्रॉम होम और कम विदेश यात्राओं से भारत के फॉरेन रिजर्व में अरबों डॉलर की बचत हुई थी।

पीएम मोदी की अपील मानी तो क्या असर होगा?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 90% आयात करता है। इसमें भी खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में कच्चा तेल, एलपीजी वगैरह आता है। यह सबकुछ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्तेआता है, जहां अभी सबसे बड़े स्तर पर तनाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करने, घर से काम करने और विदेश यात्राओं से बचने का आग्रह किया है। सवाल यह है कि अगर भारतीय ऐसा करते हैं तो वे देश के लिए कितनी बचत कर सकते हैं। कोविड-19 के साल के आंकड़ों को देखते हुए, हम एक अनुमानित आंकड़ा लगा सकते हैं।

कोविड लॉकडाउन के दौरान भारत ने विदेश यात्रा कम होने और ईंधन की मांग घटने से भारी विदेशी मुद्रा बचाई थी। 2019 में विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या 2.69 करोड़ थी, जो 2020 में घटकर लगभग 92 लाख और 2021 में 85 लाख रह गई थी। साथ ही विमानन ईंधन (ATF) की खपत भी तेजी से घटी थी।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2020 के बीच भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 2019 की तुलना में 23.8 अरब डॉलर कम खर्च किए। इसकी मुख्य वजह थी- कम यात्रा, वर्क फ्रॉम होम, उड़ानों में कमी और ईंधन की मांग में गिरावट।

कोविड काल में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 478 अरब डॉलर से बढ़कर 607 अरब डॉलर तक पहुँच गया था। अभी यह 690 अरब डॉलर है। यह आंकड़े बता रहे हैं कि यदि लोग थोड़ी भी सावधानी बरतें तो देश बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बचा सकता है।

ईंधन की बचत से होगा बड़ा फायदा!

भारत लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए पेट्रोल और डीजल की हर बचत सीधे विदेशी मुद्रा बचत से जुड़ी होती है। कोविड के साल में 2020-21 में पेट्रोल की खपत लगभग 2 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) और डीजल की खपत लगभग 10 मिलियन मीट्रिक टन कम हुई।

आंकड़े बताते हैं कि 2018-19 में पेट्रोल की खपत 28.3 एमएमटी और डीजल की 83.5 एमएमटी थी। 2019-20 में यह क्रमश: 29.9 और 82.6 एमएमटी (पेट्रोल और डीजल खपत) था। यह कोविड के साल में यानी 2020-23 में घटकर 27.9 और 72.7 रह गया था। हालांकि इसके बाद इसमें लगातार वृद्धि होती जा रही है। 2024-25 में पेट्रोल की खपत भारत में 40.5 एमएमटी और डीजल की खपत 91.4 एमएमटी रही। इस साल का पहले से लगाया गया अनुमान क्रमश: 42 एमएमटी और 94.7 एमएमटी है।

साल 2019 में अप्रैल से जुलाई के बीच भारत ने 74.9 मिलियन टन कच्चा तेल आयात करने पर 36.2 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं 2020 में इसी अवधि में आयात घटकर 57.2 मिलियन टन रह गया और खर्च केवल 12.4 अरब डॉलर रहा। यानी सिर्फ चार महीनों में 23.8 अरब डॉलर की बचत हुई।

वर्क फ्रॉम होम से फॉरेन रिजर्व कैसे बचेगा?

वर्क फ्रॉम होम बढ़ने से रोजाना ऑफिस आने-जाने की जरूरत कम होगी। कोविड काल में भी यह हुआ था। इससे शहरी क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी। कॉर्पोरेट यात्राएँ भी कम होंगी। मीटिंग्स ऑनलाइन होंगी। गौर करने वाली बात है कि आज भारत की पेट्रोल और डीजल की मांग कोविड के समय के मुकाबले कहीं अधिक है। ऐसे में यदि थोड़ी भी कमी आती है, तो करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

ऐसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी विदेश यात्राएँ टालने की भी अपील की है। विदेश यात्रा से विदेशी मुद्रा दो तरीकों से बाहर जाती है। इसमें पहला ये है कि भारतीय पर्यटक विदेशों में होटल, खरीदारी और अन्य खर्च के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करते हैं। इसके अलावा दूसरी अहम बात ये है कि विमानन ईंधन (एटीएफ) की खपत बढ़ती है।

कोविड के दौरान एटीएफ की खपत आधे से भी कम होकर 3.7 एमएमटी रह गई थी। साथ ही विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या में 72.9% की गिरावट आई थी।

साल 2018 में जहां 2.62 करोड़ लोग विदेश गए थे, वहीं 2019 में यह संख्या घटकरर 72.9 लाख हो गई थी। 2021 में यह 85.5 लाख और 2022 में यह बढ़कर 2.16 करोड़ हो गई थी। इसके बाद 2023 में यह संख्या 2.78 करोड़ और फिर 2024 में यह 3.08 करोड़ तक पहुंच गई।

यह आंकड़ा दिखा रहा है कि कैसे कोविड के बाद विदेश जाने वालों की संख्या में लगातार और तेजी से वृद्धि आई है। ऐसे में विदेश छुट्टियों, डेस्टिनेशन वेडिंग्स और लग्जरी शॉपिंग यात्राओं में कमी भी जाहिर तौर पर भारत के चालू खाता घाटा पर दबाव कम कर सकती है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने सोने की खरीदारी कम करने की भी सलाह दी है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़े सोना आयातक है। सोने का आयात भी विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा दबाव बढ़ाता है। यही वजहें हैं कि सरकार मान कर चल रही है कि यदि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें तो सामूहिक रूप से देश अरबों डॉलर बचा सकता है। साथ ही इन आदतों से लोगों की अपनी भी बचत होगी, ये भी तय है।

यह भी पढ़ें- भारत कितना गोल्ड आयात करता है, फॉरेन रिजर्व पर कितना और कैसे दबाव बना रहा है सोने का आयात?

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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