जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कुलगाम में हुए आतंकी हमले पर कुछ ऐसी बातें कही हैं, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया है। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। अब्दुल्ला ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए यह सवाल उठाया कि जब भी उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग उठाती है, तभी इस तरह की घटनाएं क्यों होने लगती हैं।
उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में पत्रकारों से बातचीत करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘मुझे इस घटना पर बेहद दुख है। हमें यह भी नहीं पता कि उन्हें किसने मारा और कैसे मारा। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि हत्यारे कौन हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता कि जब भी हम राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करते हैं, तभी ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं।’
फारूक अब्दुल्ला के अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार के कैबिनेट मंत्री जावेद राणा सहित उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस मंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने भी आतंकी हमले की टाइमिंग समय को लेकर सवाल उठाए। जावेद राणा ने दावा किया कि कुछ एजेंसियां जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल नहीं होने देना चाहतीं और संभव है कि इस हत्या में उनका भी हाथ हो। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की।
वहीं, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने कहा कि कुछ ताकतें राज्य का दर्जा बहाल नहीं होने देना चाहतीं और इसी वजह से ऐसी हत्याएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन हत्याओं में पाकिस्तान की भूमिका है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
भाजपा का पलटवार
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सवाल किया कि क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष आतंकियों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं?
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करना संसद का विषय है और इसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है। शर्मा ने आरोप लगाया कि जब भी आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तब फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता उन्हें निर्दोष बताने लगते हैं।
भाजपा नेता रविंद्र रैना ने फारूख अब्दुल्ला के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। रविंदर रैना ने कहा, ‘वे एक बहुत ही जिम्मेदार व्यक्ति हैं। कुलगाम में हुए आतंकी हमले के संदर्भ में उन्होंने एक बेहद विवादास्पद बयान दिया है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।’
भाजपा नेता ने कहा, ‘वे (फारूक अब्दुल्ला) इस आतंकी हमले को जायज ठहरा रहे हैं और इसे राज्य के मुद्दे से जोड़ रहे हैं। यह बेहद निंदनीय है। हर नेता को हत्यारों की सीधे तौर पर निंदा करनी चाहिए और पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त करनी चाहिए। आतंकियों को राष्ट्रीय एकता से हराया जाना चाहिए, न कि इस दुखद घटना का राजनीतिकरण करके। राज्य का मुद्दा संवैधानिक और लोकतांत्रिक है। इस तरह आतंकी हमले को राज्य के मुद्दे से जोड़ना एक अनुचित बयान है।’
कुलगाम में कैसे हुआ हमला?
दरअसल, शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने कुलगाम जिले के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की। हमले में दो मजदूर दीपक रात्रे और बोपिंदर गंभीर रूप से घायल हो गए। दीपक रात्रे की अस्पताल ले जाने से पहले ही मौत हो गई। वहीं बोपिंदर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) ले जाया गया, जहां से उन्हें श्रीनगर के सौरा स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
कुलगाम हमले के बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे राजौरी जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने राष्ट्रीय राजमार्ग और शहर के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर अतिरिक्त नाके स्थापित किए हैं। वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है, जबकि लोगों की जांच और पूछताछ भी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।
इससे करीब 10 दिन पहले अनंतनाग शहर में आतंकवादियों ने एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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