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कौन थे दिग्गज नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा? PoK में हिमस्खलन में मौत, ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहे थे

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Nirmal Purja
ये तस्वीर निर्मल पुर्जा के इंस्टाग्राम अकाउंट से ली गई है

दुनिया के सबसे चर्चित पर्वतारोहियों में शुमार नेपाल के निर्मल ‘निम्स दाई’ पुर्जा की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) स्थित ‘ब्रॉड पीक’ पर कुछ दिन पहले भीषण हिमस्खलन में मौत हो गई है। 43 साल के पुर्जा की मौत की पुष्टि शनिवार को उनकी अभियान कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ ने की। साल 2019 में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को महज छह महीने से कुछ अधिक समय में फतह कर इतिहास रचने वाले निर्मल पुर्जा गुरुवार को आए हिमस्खलन के बाद से लापता थे।

इसके बाद से उन्हें और उनके साथियों का पता लगाने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। कंपनी ने अपने बयान में कहा, ‘गहरे दुख और भारी मन के साथ हम पुष्टि करते हैं कि ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन के बाद निर्मल ‘निम्स दाई’ पुर्जा का दुखद निधन हो गया।’

कंपनी ने यह भी बताया कि पुर्जा के साथ अभियान में शामिल उनके साथी और गाइड पुर बहादुर गुरूंग (युक्ता) सहित नीमा शेरपा की भी इस हादसे में मौत हो गई। अभियान दल के अन्य सदस्य भी हिमस्खलन की चपेट में आकर मारे गए। 30 जुलाई को यह हिमस्खलन उस समय आया, जब अभियान दल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित 8,047 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर कैंप-2 से ऊपर की ओर चढ़ाई कर रहा था।

हादसे के समय 6660 मीटर की ऊंचाई पर थे निर्मल पुर्जा

रिपोर्ट के अनुसार गुरुवाल के भीषण हिमस्खलन के बाद पूरी टीम से संपर्क टूट गया था। खराब मौसम और लगातार नए हिमस्खलन का खतरा होने के कारण बचाव अभियान बेहद मुश्किल रहा। ट्रैकिंग डेटा के अनुसार हादसे से कुछ समय पहले पुर्जा लगभग 6,660 मीटर की ऊंचाई पर थे। इसके बाद उनके ट्रैकिंग डिवाइस ने अचानक ऊंचाई से तेज गिरावट दर्ज की, जिससे संकेत मिला कि वे हिमस्खलन के साथ सैकड़ों मीटर नीचे बह गए। कुछ देर बाद उनका सिग्नल भी पूरी तरह बंद हो गया।

बचाव अभियान में सैन्य हेलीकॉप्टरों के साथ अनुभवी नेपाली पर्वतारोहियों की जमीनी टीमें भी शामिल थी। बचावकर्मियों ने लापता पर्वतारोहियों में से कई के शव को खोज निकाला है। बाकी लापता सदस्यों की तलाश जारी रही।

निर्मल पुर्जा: पर्वतारोहण की दुनिया की दमदार शख्सियत

निर्मल पुर्जा ने 2019 में ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ के तहत दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को महज छह महीने और छह दिन में फतह कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इससे पहले यह रिकॉर्ड सात वर्ष से अधिक समय का था।

बाद में उन्होंने बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के इन सभी 14 चोटियों पर सबसे तेजी से चढ़ाई पूरा करने का रिकॉर्ड भी बनाया। इस बार उनका लक्ष्य बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सभी 14 चोटियों को दो बार फतह करने वाले दुनिया के पहले पर्वतारोही बनने का था।

उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों पर आधारित नेटफ्लिक्स की चर्चित डॉक्यूमेंट्री ’14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल’ भी बनी थी।

गोरखा सैनिक से पर्वतारोही बनने तक का सफर

पूर्व ब्रिटिश गोरखा और ब्रिटेन की ही स्पेशल बोट सर्विस (SBS) के सैनिक रहे निर्मल पुर्जा ने 2012 में एवरेस्ट बेस कैंप की ट्रेकिंग के बाद पर्वतारोहण की दुनिया में कदम रखा। जनवरी 2021 में वे उस नेपाली टीम का भी हिस्सा थे जिसने पहली बार सर्दियों में K-2 के शिखर पर सफल चढ़ाई की थी।

इसके बाद उन्होंने एलीट एक्सपेड और निम्सदाई फाउंडेशन की स्थापना की तथा नेपाली पर्वतारोहियों और ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने वाले कर्मियों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए प्रमुख आवाज बने। हादसे से कुछ दिन पहले ही पुर्जा ने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि उनकी केवल एक ही प्रार्थना है- ‘ब्रॉड पीक पर सुरक्षित चढ़ाई और सुरक्षित वापसी’। उन्होंने यह भी कहा था कि वे किसी भी पर्वत को कभी हल्के में नहीं लेते।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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