वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (11 जून) को ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने ईरान पर नए सैन्य हमलों की धमकी दी और कहा कि अमेरिका आज रात ईरान पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले ही बहुत कमजोर हो चुकी है।
ट्रंप ने इस बाबत ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिका ईरान के बड़े तेल और गैस ठिकानों (जिनमें खार्ग द्वीप भी शामिल है) पर कब्जा कर सकता है ठीक वैसे ही जैसे उसने वेनेज़ुएला में किया था।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जे की दी धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि ” अमेरिका आज रात ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगा (जिसकी नेवी, एयर फोर्स, रडार, एंटी-एयरक्राफ़्ट और सुरक्षा के सभी अन्य साधन, साथ ही उसकी ज्यादातर हमला करने की क्षमता भी खत्म हो चुकी है!)। “
ट्रंप ने आगे लिखा “भविष्य में कभी, हम खार्ग आइलैंड और तेल से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर कब्जा कर लेंगे और उनके तेल और गैस बाजार पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने वेनेजुएला के मामले में किया है, जो वेनेजुएला और अमेरिका, दोनों के लिए बहुत बढ़िया साबित हो रहा है।”
ट्रुथ पर की गई इस पोस्ट के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी इच्छा फिर से जाहिर की। “हम उनसे बातचीत कर रहे हैं और सब कुछ लेकिन देखिए, मेरी प्राथमिकता हमेशा से यही रही है – खार्ग द्वीप पर कब्जा करना… मेरी प्राथमिकता यही होगी। मुझे नहीं पता कि अमेरिका में इसके लिए हिम्मत है या नहीं।”
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जब से यह टकराव शुरू हुआ है, ट्रंप की नजरें लगातार खार्ग द्वीप पर टिकी हैं, जो छोटा होने के बावजूद रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल व्यापार की रीढ़ है और देश के ज्यादातर कच्चे तेल के निर्यात को संभालता है।
हर दिन, खाड़ी के इस छोटे से द्वीप से लगभग 20 लाख बैरल तेल भेजा जाता है। इसमें से ज्यादातर चीन जाता है। उनके ये बयान टकराव के एक बहुत नाजुक मोड़ पर आए हैं। दोनों तरफ से हो रहे नए हमलों की वजह से यह इलाका बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है और कूटनीति इसके साथ तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रही है।
पश्चिमी एशिया में जारी है संकट
शांति कायम करने के लिए राजनयिक बातचीत के बीच पूरे इलाके में लड़ाई जारी रही। अमेरिका ने गुरुवार (11 जून) को ईरान के सर्विलांस सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क और एयर डिफेंस साइट्स को निशाना बनाते हुए पूरे ईरान में हमले किए।
ये हमले वाशिंगटन के मुताबिक ईरान की लगातार आक्रामकता के जवाब में किए गए। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर तेहरान ने जल्द ही अमेरिकी शर्तें नहीं मानीं तो सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है।
इसके बाद ईरान ने खाड़ी इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करके जवाब दिया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इनमें कुवैत और बहरीन में मौजूद एयर बेस और अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय शामिल है। ईरानी सेना ने जॉर्डन में अल-अजराक एयर बेस पर हुए एक और मिसाइल हमले की जिम्मेदारी भी ली।



