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TMC के विलय की चर्चा को कांग्रेस ने किया खारिज, बताया – बेबुनियाद अफवाहें

तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि विलय की संभावना पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना जरूरी है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना बाकी है कि यह सहयोग गठबंधन का रूप लेगा या विलय का।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्ली: कांग्रेस ने गुरुवार (11 जून) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ संभावित विलय की अटकलों को खारिज कर दिया। कांग्रेस ने टीएमसी के विलय की चर्चा को बेबुनियाद अफवाहें करार दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ हाल ही में हुई बैठक में बातचीत केवल राष्ट्रीय मुद्दों तक ही सीमित थी और इसमें दोनों पार्टियों के विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

उन्होंने कहा “ये बेबुनियाद अफवाहें हैं। TMC और कांग्रेस नेताओं के बीच हुई बैठक का मकसद सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों को ज्यादा असरदार ढंग से उठाने पर चर्चा करना था।”

TMC के कांग्रेस में विलय की चर्चा क्यों हुई तेज?

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के बीच संभावित विलय की अटकलें तेज हो गईं। इसके बाद दोनों ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ अलग-अलग बैठकें की थीं। इससे इस चर्चा को और जोर मिला।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की बैठकों में चुनिंदा तौर पर ही शामिल होती रही हैं। इसके अलावा वह अक्सर TMC का प्रतिनिधित्व करने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजती रही हैं। उन्होंने जून 2023 में पटना में हुई विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी में हुई कई बाद की बैठकों में भी हिस्सा नहीं लिया था।

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यह अटकलें TMC के विधायी और संसदीय धड़ों के बीच फूट के बीच लगाई जा रही हैं। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बमुश्किल एक महीने बाद सामने आया है जहां 294 सदस्यों वाली विधानसभा में उसे केवल 80 सीटें मिली थीं।

TMC ने क्या प्रतिक्रिया दी?

तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि विलय की संभावना पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि पार्टी के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना जरूरी है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना बाकी है कि यह सहयोग गठबंधन का रूप लेगा या विलय का।

यहां तक ​​कि पश्चिम बंगाल में TMC के 80 में से 64 विधायकों का समर्थन होने का दावा करने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने भी कांग्रेस के साथ विलय की खबरों को खारिज कर दिया है।

उन्होंने आगे कहा “विलय के बारे में कहूं तो हमारी विधायी पार्टी निश्चित रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो रही है। संसद में मौजूद सांसद जिनमें से दो-तिहाई से ज्यादा हैं – भी कांग्रेस में विलय नहीं कर रहे हैं। तो फिर कौन किसके साथ विलय कर रहा है?”

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ममता ने कांग्रेस में बिताया लंबा समय

बताते चलें कि पश्चिम बंगाल की तीन बार की मुख्यमंत्री रही ममता बनर्जी ने काफी लंबा समय कांग्रेस में बिताया लेकिन 1997 में राज्य के नेताओं के साथ बढ़ते मतभेदों के कारण पार्टी छोड़ दी। वह इस बात से भी नाराज थीं कि कांग्रेस आलाकमान पश्चिम बंगाल को नजरअंदाज कर रहा था। उनका मानना ​​था कि पार्टी में CPI(M) के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट सरकार को मजबूती से चुनौती देने का संकल्प नहीं था।

1998 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनाई। यह पार्टी राज्य में मुख्य विपक्षी ताकत बनकर उभरी। 2011 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों में लेफ्ट फ्रंट को टीएमसी ने सत्ता से बाहर कर दिया। फिलहाल कांग्रेस और TMC दोनों ने ही विलय की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हालांकि TMC के अंदरूनी कलह और चुनावी हार से जूझने के बीच राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं कि क्या ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक स्थिति को फिर से मजबूत करने के लिए कांग्रेस के साथ किसी बड़े गठबंधन की कोशिश कर सकती हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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