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पेशावर में ढहने की कगार पर दिलीप कुमार और राज कपूर के पुश्तैनी मकान!

पेशावर के ऐतिहासिक किस्सा ख्वानी बाजार इलाके के ढाकी नालबंदी में स्थित करीब सौ साल पुरानी कपूर हवेली हाल की लगातार बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई है। 3 अप्रैल को आए भूकंप के झटकों ने पहले से कमजोर हो चुकी इमारत को और जर्जर कर दिया है।

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Sepia-toned poster showing two men in vintage clothes above a ruined cityscape.
हाल ही में आए भूकंप के झटकों और लगातार हो रही बारिश के कारण इन ऐतिहासिक इमारतों की संरचना बेहद कमजोर हो चुकी है और ये ढहने की कगार पर हैं।

भारतीय सिनेमा के दो महान अभिनेताओं- दिलीप कुमार और राज कपूर के पाकिस्तान के पेशावर स्थित पुश्तैनी घरों पर ढहने का खतरा मंडरा रहा है। लगातार बारिश और हालिया भूकंप के झटकों के बाद दोनों ऐतिहासिक इमारतें बेहद कमजोर हो गई हैं। विरासत संरक्षण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द संरक्षण कार्य शुरू नहीं हुआ तो ये इमारतें कभी भी गिर सकती हैं।

पाकिस्तान सरकार ने 2016 में इन दोनों भवनों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था। लेकिन संरक्षण के दावों के बावजूद वर्षों से इनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।

बारिश और भूकंप से बढ़ा खतरा

पेशावर के ऐतिहासिक किस्सा ख्वानी बाजार इलाके के ढाकी नालबंदी में स्थित करीब सौ साल पुरानी कपूर हवेली हाल की लगातार बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई है। 3 अप्रैल को आए भूकंप के झटकों ने पहले से कमजोर हो चुकी इमारत को और जर्जर कर दिया है।

वहीं, दिलीप कुमार का पुश्तैनी घर मोहल्ला खुदादाद में स्थित है। कभी जीवन और रौनक से भरा रहने वाला यह पारंपरिक पेशावरी मकान अब खंडहर जैसा दिखने लगा है। कई कमरों की छतें गिर चुकी हैं और हर बारिश के साथ इसकी दीवारें टूटकर मलबे में बदल रही हैं।

सरकार पर लापरवाही का आरोप

पीटीआई के अनुसार, कल्चरल हेरिटेज काउंसिल केपीके के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने कहा कि सरकार ने ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के बजाय उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया है।

उन्होंने पीटीआई को बताया कि प्री-मानसून बारिश शुरू हो चुकी है और बरसात का मौसम करीब है, ऐसे में दोनों इमारतों को तत्काल संरक्षण की जरूरत है।

खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने 2021-22 में दोनों मकानों को खरीदने और पुरातत्व विभाग के जरिए उन्हें संग्रहालय में बदलने के लिए 2.35 करोड़ पाकिस्तानी रुपये जारी करने की मंजूरी दी थी।

इसके बाद जुलाई 2025 में दोनों इमारतों के संरक्षण और मरम्मत के लिए 3.38 करोड़ पाकिस्तानी रुपये और मंजूर किए गए। हालांकि पांच साल से अधिक समय बीतने के बावजूद जमीन पर कोई ठोस काम शुरू नहीं हो सका।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि धन और संसाधनों की कमी के कारण संरक्षण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है, हालांकि सरकार अब भी दोनों इमारतों को राज कपूर और दिलीप कुमार के नाम पर संग्रहालय में बदलने को लेकर गंभीर है।

कपूर हवेली के पास प्रिंटिंग की दुकान चलाने वाले आबिद हुसैन ने कहा कि हाल की भारी बारिश और भूकंप के झटकों ने इमारत की नींव और दीवारों में गहरी दरारें डाल दी हैं। उनके मुताबिक, किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

भारतीय सिनेमा के इतिहास से जुड़ी हैं ये इमारतें

कपूर हवेली भारतीय सिनेमा के मशहूर कपूर परिवार की विरासत मानी जाती है। यह हवेली पृथ्वीराज कपूर के पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918 से 1922 के बीच बनवाई थी। यहीं राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था।

दूसरी ओर, दिलीप कुमार का पुश्तैनी घर भी भारतीय सिनेमा इतिहास की अहम धरोहर माना जाता है। स्थानीय लोग और विरासत कार्यकर्ता अब मांग कर रहे हैं कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि इन ऐतिहासिक इमारतों को बचाने के लिए तुरंत संरक्षण कार्य शुरू करे।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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