नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार (4 जून) को शाम में भयंकर आंधी-तूफान के चलते बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। तेज आंधी में नोएडा और आसपास के इलाकों में करीब 400 पेड़ गिरे। पेड़ों के गिरने से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवाजाही में भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस बीच नोएडा प्राधिकरण ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। प्राधिकरण की विभिन्न टीमें शहर के अलग-अलग सेक्टरों में पहुंचकर सड़कों पर गिरे पेड़ों और टूटी हुई शाखाओं को हटाने का कार्य कर रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर में आंधी-तूफान के बाद राहत और बचाव कार्य जारी
समाचार एजेंसी आईएएनएस ने अधिकारियों के हवाले से लिखा कि सभी सेक्टरों का निरीक्षण किया जा रहा है और जहां भी पेड़, शाखाएं या अन्य अवरोध पाए जा रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा रहा है। प्राधिकरण ने बताया कि राहत एवं सफाई कार्य युद्धस्तर पर जारी है और प्रयास किया जा रहा है कि रात तक शहर की सभी प्रमुख सड़कों और आवासीय क्षेत्रों से गिरे हुए पेड़ों तथा शाखाओं को पूरी तरह हटाकर यातायात और सामान्य गतिविधियों को सुचारू बनाया जा सके।
राहत और बचाव कार्य के लिए अन्य विभागों को भी अलर्ट पर रखा गया है। दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर बिजली के तारों और खंभों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। ऐसे में प्रशासन ने नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि वे टूटे हुए पेड़ों, लटकती शाखाओं और बिजली के तारों के पास जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना संबंधित विभागों को दें।
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नोएडा प्राधिकरण ने नागरिकों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा है कि शहर को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन और आम जनता का संयुक्त प्रयास आवश्यक है। मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों तक बदलते मौसम की संभावना जताई गई है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
क्यों आया इतना तेज तूफान?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह आंधी दिन के समय अत्यधिक गर्मी, प्रचुर मात्रा में नमी और अनुकूल ऊपरी वायुमंडल की स्थितियों के संयोजन से उत्पन्न हुई। गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में गर्म और आर्द्र मौसम बना हुआ था। इससे सतह के निकट ऊष्मा ऊर्जा के संचय के लिए एक आदर्श वातावरण बना जिसने दिन के समय तापमान बढ़ने के साथ गर्म हवा को तेजी से वायुमंडल में ऊपर उठाने में योगदान दिया।
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अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी हवाओं ने बादल निर्माण के लिए आवश्यक आर्द्रता प्रदान की। जब यह गर्म, नम हवा ऊपर उठी और अधिक ऊंचाई पर ठंडी हवा से मिली, तो इसके परिणामस्वरूप ऊंचे क्यूमुलस बादल तेजी से विकसित हुए, जो आमतौर पर आंधी, बिजली और तेज हवाओं जैसी गंभीर मौसम संबंधी घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)



