एफआईएच हॉकी विश्व कप-2026 में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमें अपनी पारंपरिक नीली जर्सी की बजाय केसरिया रंग की जर्सी में मैदान पर उतरेंगी। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर शुरू हुए विवाद के बीच गुरुवार को हॉकी इंडिया ने बयान जारी करते हुए ये बताया कि आखिर इस बदलाव के पीछे की क्या वजहें हैं। दरअसल, नई जर्सी के जारी होने के बाद पूर्व भारतीय कप्तान वीरेन रासक्विन्हा ने भी इस पर सवाल उठाए थे।
सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही थी। साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी होने लगी थी। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का भी इस मामले पर बयान आया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे हॉकी टीम का जर्सी बदल दे या पाठ्यक्रम के जरिए इतिहास को नए सिरे से लिखने का प्रयास करे, देश के युवा सब देख रहे हैं। कुछ और नेताओं की ओर से भी बयान आए। इन सबके बीच हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि तकनीकी जरूरतों और राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखकर लिया गया है।
नीली टर्फ पर नीली जर्सी बनी परेशानी!
हॉकी इंडिया के मुताबिक, आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अब अधिकांश मुकाबले नीले रंग की सिंथेटिक टर्फ पर खेले जाते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों और कोचों ने महसूस किया कि नीली जर्सी कई बार पिच के रंग में घुल-मिल जाती है, जिससे खिलाड़ियों को मैच के दौरान अपने साथियों को पहचानने और उनकी स्थिति का आकलन करने में दिक्कत होती है।
हॉकी इंडिया के अनुसार इस समस्या के समाधान के लिए खिलाड़ियों और कोचों से सुझाव मांगे गए। इस दौरान पीले और केसरिया रंग जैसे विकल्प सामने आए और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद केसरिया रंग को अंतिम रूप दिया गया।
हॉकी इंडिया ने कहा कि तकनीकी आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ केसरिया रंग का चयन इसलिए भी किया गया क्योंकि यह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों में से एक है और साहस, त्याग तथा राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है।
पहले भी बदली गई है जर्सी: हॉकी इंडिया
हॉकी इंडिया ने विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर जरूरतों और अन्य कारणों से टीम की जर्सी में बदलाव किए जाते रहे हैं। उसने याद दिलाया कि 2014 के हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 वर्ल्ड कप में में टीम स्काई ब्लू रंग की बिल्कुल अलग डिजाइन वाली जर्सी में उतरी थी।
हॉकी इंडिया के अनुसार इस बार भी बदलाव खिलाड़ियों और कोचों से मिले तकनीकी फीडबैक सहित केसरिया रंग के प्रतीकात्मक महत्व को ध्यान में रखकर किया गया है।
हॉकी टीम की नई जर्सी में क्या कुछ है?
हॉकी इंडिया के अनुसार नई जर्सी को भारत की विरासत और राष्ट्रीय पहचान को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। केसरिया रंग साहस, त्याग और विजय का प्रतीक है, जबकि गले के पास और बाहों पर गहरे नेवी ब्लू रंग का इस्तेमाल अशोक चक्र से प्रेरित होकर किया गया है, जो प्रगति, शांति और एकाग्रता को दर्शाता है।
जर्सी पर मंडला शैली से प्रेरित पैटर्न बनाए गए हैं। वहीं, छाती पर बना सुदर्शन चक्र से प्रेरित ग्राफिक शक्ति, एकता और आगे बढ़ने की भावना का प्रतीक है। कंधों और किनारों पर तिरंगे की पाइपिंग है, जो राष्ट्रीय गौरव को दर्शाती है। साथ ही सामने देवनागरी शैली को दर्शाते हुए ‘इंडिया’ लिखा गया है, जिसे भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान बताया गया है। इसी डिजाइन की सफेद रंग की जर्सी भी टीमों के लिए उपलब्ध होगी। एफआईएच हॉकी विश्व कप-2026 का आयोजन 15 अगस्त से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम में होगा।
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