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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन, आम्बेडकर की तस्वीर हाथ में लिए दिखे फाउंडर अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के लिए शनिवार सुबह से ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। संगठन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हजारों लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंच रहे हैं।

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CJP Protest
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन कर रही है।

सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। प्रदर्शन में ज्यादातर युवा पहुंचे हैं। कुछ बुजुर्ग भी इसका हिस्सा बने हैं। प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के नारे लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि सीजेपी नीट-यूजी पेपर लीक सहित अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार सुबह अमेरिका से दिल्ली लौटे और एयरपोर्ट से सीधे वे प्रदर्शन करने पहुंचे। दिल्ली एयरपोर्ट पर वह संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की आत्मकथा की प्रति हाथ में लिए दिखाई दिए।

अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में स्नातक की पढ़ाई की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए। हाल ही में उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में दो वर्षीय मास्टर डिग्री पूरी की है। दीपके 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के साथ भी जुड़े रहे और सोशल मीडिया प्रबंधन तथा चुनावी अभियानों में भूमिका निभाई।

प्रदर्शन से पहले संगठन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि शिक्षा मंत्री जनता के टैक्स से वेतन पाते हैं और उनके कार्यकाल में लाखों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। संगठन ने अपने संदेश में लिखा, “हमने शिक्षा मंत्री को चुना और वहां भेजा। उनके कार्यकाल में युवाओं का भविष्य अंधकार में है। कॉकरोच आ रहे हैं, धर्मेंद्र प्रधान जा रहे हैं।”

सीजेपी का आरोप है कि नीट-यूजी पेपर लीक और सीबीएसई मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े विवादों ने देश के छात्रों का भरोसा कमजोर किया है, इसलिए शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के लिए शनिवार सुबह से ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। संगठन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हजारों लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंच रहे हैं। सीजेपी ने अपने एक्स हैंडल से कई वीडियो भी जारी किए हैं और अपने समर्थकों से प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो साझा करने की भी अपील की।

सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट, दिल्ली की सीमाओं पर स्थित प्रवेश बिंदुओं और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन से जुड़े ऑनलाइन अभियानों और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के आह्वान पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी के मद्देनजर राजधानी के कई महत्वपूर्ण इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है।

सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल की दी चेतावनी

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी सीजेपी के प्रदर्शन को समर्थन दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि वह 6 जून को लद्दाख से दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे।

उन्होंने कहा, “अगर किसी भी कारण से मुझे या कॉकरोच जनता पार्टी के किसी सदस्य को गिरफ्तार किया जाता है, तो मुझे वह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जो मैं नहीं उठाना चाहता। मैं कल से ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दूंगा और इस बार यह 42 दिनों तक चलेगी।”

वांगचुक ने समर्थकों से कहा कि वे उम्मीद बनाए रखें, लेकिन हर स्थिति के लिए तैयार रहें। उन्होंने इस आंदोलन को “भारत के इतिहास का सबसे शांतिपूर्ण आंदोलन” बनाने की अपील भी की। वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों से खास तौर पर संयम बरतने को कहा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जंतर-मंतर केवल पानी की बोतल, मोबाइल फोन और फूल लेकर आएं।

उन्होंने कहा, “लाठी, पत्थर या किसी भी प्रकार की हिंसा से जुड़ी वस्तु साथ न लाएं। यदि कोई व्यक्ति हथियार या हिंसा भड़काने वाली सामग्री लेकर आता दिखे, तो उसकी तस्वीर लें, वीडियो रिकॉर्ड करें और तुरंत पुलिस को सूचित करें।” वांगचुक ने समर्थकों को किसी भी उकसावे में न आने और आंदोलन की शांतिपूर्ण छवि बनाए रखने का भी आग्रह किया।

वांगचुक ने कहा कि वह खुद इस बात से हैरान हैं कि इतने कम समय में कॉकरोच जनता पार्टी से कितनी गहराई से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं इनके सदस्यों से मिला तो मुझे लगा कि ये सरल, ईमानदार, सच्चे और देशभक्त युवा हैं।”

इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगर 5 जून तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ तो वह 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल होंगे। वांगचुक ने कहा था कि उनके लिए यह मुद्दा सिर्फ नीट या सीबीएसई तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा था, “पिछले चार दशकों से मैं दूरदराज के इलाकों के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार के लिए काम कर रहा हूं। जब बदलाव नहीं दिखता तो निराशा होती है और कुछ करने की जरूरत महसूस होती है।”

कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान?

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत पिछले महीने एक अदालत की सुनवाई के दौरान की गई कुछ टिप्पणियों के विरोध में व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी। बाद में यह अभियान एक संगठित आंदोलन में बदल गया। युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। संगठन का नारा है, “युवाओं के लिए, युवाओं द्वारा, युवाओं का राजनीतिक मंच।”

सोशल मीडिया पर इसकी पहुंच भी तेजी से बढ़ी है। संगठन के इंस्टाग्राम अकाउंट के 2.2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं, जो कई स्थापित राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया आधार से भी अधिक हैं।

अपने प्रभाव का दायरा बढ़ाने के लिए सीजेपी ने हाल ही में तीन आधिकारिक प्रवक्ताओं की घोषणा भी की थी। संगठन के अनुसार, खोजी पत्रकार सौरव दास मुख्य प्रवक्ता होंगे। वहीं राजनीतिक शोधकर्ता एवं फिल्मकार विजेता दहिया और पूर्व प्रबंधन सलाहकार आशुतोष रांका संगठन का पक्ष जनता और मीडिया के सामने रखेंगे।

प्रदर्शन के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका

प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी। सेव इंडिया फाउंडेशन नामक संगठन ने अदालत से मांग की थी कि जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि याचिका पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही विचार किया जाएगा।

याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील विकास शर्मा ने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन बिना स्पष्ट अनुमति और पर्याप्त व्यवस्थाओं के लाखों लोगों की भीड़ जुटाने की घोषणा चिंता का विषय है। उन्होंने कहा था कि आयोजकों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इतने बड़े जमावड़े का संचालन कैसे किया जाएगा और सार्वजनिक व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाएगी। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता उमेश चंद शर्मा ने अदालत से मांग की थी कि जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली क्षेत्र में बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की इजाजत न दी जाए।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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