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छत्तीसगढ़ः सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता, 5 लाख के इनामी माओवादी प्लाटून कमांडर को मार गिराया

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 5 लाख के इनामी माओवादी प्लाटून कमांडर को मार गिराया है।

chhattisgarh police encountered 5 lakh bounty maoist cadre, छत्तीसगढ़
फोटोः आईएएनएस

रायपुरः छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में रविवार (29 मार्च) को पोलमपल्ली इलाके की घनी जंगली पहाड़ियों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक माओवादी कमांडर मारा गया। उस पर 5 लाख रुपये का इनाम था। सरकार के नक्सल विरोधी अभियान में इसे एक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने माओवाद के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च तय की है।

सुदूर क्षेत्र में माओवादी कैडरों की उपस्थिति के संबंध में विशिष्ट खुफिया सूचनाओं पर कार्रवाई करते हुए सुकमा जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) ने एक लक्षित तलाशी अभियान शुरू किया।

डीआरजी टीम और माओवादियों के बीच हुई झड़प

सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक किरन चव्हाण ने बताया कि ” एक दिन पहले शुरू किए गए इस अभियान के दौरान रविवार सुबह डीआरजी टीम और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी हुई। झड़प स्थल की गहन तलाशी के बाद सुरक्षाकर्मियों ने एक पुरुष माओवादी का शव और भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किया। “

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अधिकारी ने आगे बताया कि मारे गए कैडर मुचाकी कैलाश की पहचान माओवादी संगठन के एक प्रमुख कार्यकर्ता के रूप में हुई है। वह सीपीआई (माओवादी) की प्लाटून नंबर 31 का सेक्शन कमांडर था और उस पर 5 लाख रुपये का इनाम था।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने और क्या बताया?

पुलिस ने बताया कि वह कई नागरिकों की हत्याओं, सुरक्षा बलों पर सीधे हमलों और आईईडी विस्फोटों की साजिश रचने के कई मामलों में वांछित था। चल रहे अभियान के मद्देनजर पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर रेंज), सुंदरराज पी ने बचे हुए सक्रिय माओवादी कार्यकर्ताओं को कड़ी चेतावनी और अपील जारी की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का समय तेजी से समाप्त हो रहा है।

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आईजी ने कहा कि ” माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर अंतिम चरण में है। इस मार्ग को चुनने के लिए बचा हुआ समय अत्यंत सीमित है। ” गौरतलब है कि नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित समय सीमा 31 मार्च है। ऐसे में यह सफलता उसी अभियान के मद्देनजर देखी जा रही है। इससे पहले भी सुरक्षाबलों को कई बड़े अभियानों में सफलता मिली है जिसमें बड़ी इनामी राशि वाले माओवादियों कैडरों को मार गिराने में सफल रहे हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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