नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (CBSE) ने रविवार (24 मई) को स्वीकार किया कि 12वीं कक्षा के रिजल्ट के बाद की प्रक्रिया में ‘तकनीकी खामियों’ के चलते गलत शुल्क वसूला गया। बोर्ड ने छात्रों को आश्वासन दिया कि छात्रों से लिया गया अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा।
यह कदम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगने के एक दिन बाद आया है। गौरतलब है कि बोर्ड के पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर फीस में असामान्य वृद्धि की व्यापक शिकायतें मिली थीं।
CBSE ने जारी किया बयान
बोर्ड ने 24 मई को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई कॉपियां प्राप्त करने के लिए 21 और 22 मई को कुछ छात्रों से निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क लिया गया वहीं कुछ से कम शुल्क लिया गया। इस नोटिस में कहा गया कि “कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ मामलों में गलत शुल्क कटौती हुई।”
इसमें यह भी कहा गया कि सभी अतिरिक्त भुगतान स्वतः ही भुगतान के मूल माध्यम से वापस कर दिए जाएंगे। जबकि जिन उम्मीदवारों से कम शुल्क लिया गया है उन्हें आवश्यकता पड़ने पर शेष राशि का भुगतान करने के लिए अलग से सूचित किया जाएगा।
बोर्ड की तरफ से स्पष्टीकरण पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में हुई खामियों के चलते उपजे गहरे विवाद के बाद आई हैं। यह प्रक्रिया 19 मई को शुरु हुई थी। छात्रों ने आरोप लगाया था कि बोर्ड का वेब पोर्टल या तो हैक हो गया है या ठीक से काम नहीं कर रहा है।
100 रुपये की बजाय वसूला गया हजारों का शुल्क
सीबीएसई के नियमों के मुताबिक, छात्रों को उनकी चेक की गई स्कैन कॉपियों को प्राप्त करने के लिए 100 रुपये प्रति विषय भुगतान करना था। हालांकि, कुछ छात्रों ने शिकायत की कि उनसे प्रति विषय 8,000 से 67,000 रुपये और यहां तक कि कुछ मामलों में 69,420 रुपये की मांग की गई।
इन उतार-चढ़ाव वाले आंकड़ों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इससे छात्रों और अभिभावकों में दहशत फैल गई। कई लोगों ने यह भी दावा किया कि उनसे या तो अधिक शुल्क लिया गया था या बार-बार कोशिश करने के बावजूद वे भुगतान पूरा नहीं कर पाए।
सीबीएसई ने हालांकि किसी भी हैकिंग के प्रयास की पुष्टि नहीं की लेकिन उसने पहले पोर्टल पर व्यवधान के कारणों के रूप में “अभूतपूर्व ट्रैफिक” और “अनाधिकृत हस्तक्षेप के प्रयासों” का हवाला दिया था।
बोर्ड ने इसके अलावा आवेदन करने की समयसीमा दो बार बढ़ाई। इसके लिए आखिरी समयसीमा 24 मई तय की गई थी। इस बीच बोर्ड ने स्पष्ट किया कि प्रभावित छात्रों को स्कैन की गई प्रतियों के लिए नए सिरे से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। बोर्ड ने कहा कि ” मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां ऐसे सभी मामलों में उपलब्ध कराई जाएंगी। “

इस आश्वासन के बावजूद तकनीकी गड़बड़ी के दौरान भुगतान कर चुके और धनवापसी या पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे छात्रों में चिंता बनी हुई है।
इससे पहले शनिवार (23 मई) को जारी एक बयान में सीबीएसई ने कहा था कि वह सभी रिपोर्ट की गई समस्याओं की निगरानी कर रहा है और समय सीमा बढ़ाने और तकनीकी हस्तक्षेप सहित सुधारात्मक उपाय कर रहा है।
बोर्ड के बयान में बयान में कहा गया कि ” यदि अभिभावकों और छात्रों को ऐसी कोई समस्या आई है तो उनसे निःसंकोच होने का अनुरोध है। सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन तंत्र का मूल उद्देश्य वास्तविक चिंताओं का व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से समाधान करना है। “



