नई दिल्लीः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद् (CBSE) के 12वीं कक्षा की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बोर्ड की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों ने गलत मार्किंग, स्कैन की गई ब्लर कॉपियां और वेबसाइट पोर्टल पर होने वाली बार-बार गड़बड़ियों की शिकायत की है।
गौरतलब है कि सीबीएसई का 12वीं कक्षा का रिजल्ट इस बार विवादों से घिरा रहा है। बोर्ड ने परीक्षा के मूल्यांकन के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई थी। इस प्रक्रिया को लेकर कुछ छात्रों का आरोप है कि इसके चलते उन्हें अप्रत्याशित तौर पर कम अंक मिले।
CBSE की नई मूल्यांकन प्रणाली पर उठ रहे सवाल
CBSE ने इसी साल से परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए ओएसएम प्रणाली लागू की। इसके तहत कॉपियों को पहले स्कैन करने के लिए डिजिटली अपलोड किया जाता है। मूल्यांकन को निष्पक्ष रखने के उद्देश्य से इसे लागू किया गया था। इसमें छात्रों का रोल नंबर आदि जरूरी चीजें छुपा दी जाती हैं। कॉपी चेक करने वाले टीचर ऑनलाइन ही लैपटॉप, टैबलेट आदि पर जांचते हैं और नंबर देते हैं। अंकों की गणना सिस्टम द्वारा ही की जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए हैं।
छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच बोर्ड ने अंकों के सत्यापन के लिए प्रक्रिया शुरू की जिसमें छात्रों को उनकी स्कैन कॉपियां देखने और पुनर्मूल्यांकन का विकल्प दिया गया। इसकी आखिरी तारीख 23 मई थी। हालांकि, वेबसाइट पोर्टल पर बार-बार होने वाली गड़बड़ियों के चलते CBSE ने इसे 24 मई कर दिया गया है।

इस बीच छात्रों ने सोशल मीडिया पर कई तरह की गड़बड़ियों की बात लिखी। इन शिकायतों में स्कैन की गई कॉपियां ब्लर दिख रही हैं। वहीं, रि-इवैल्यूएशन के लिए ली जाने वाली फीस कई बार बढ़ी दिख रही है।
कई अन्य यूजर्स ने भी शिकायत की है कि उनका पैसा कट गया है लेकिन पेमेंट अपडेशन नहीं हुआ है। ऐसी खामियों के चलते यूजर्स ने कॉपियों को मैन्युअली चेक करने की बात कही है।
बोर्ड की पुनर्मूल्यांकन प्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है क्योंकि छात्रों ने पोर्टल की गड़बड़ियों, न पढ़ी जा सकने वाली आंसर शीट्स दिखाई हैं। गौरतलब है कि बोर्ड ने इस बार परीक्षा में मूल्यांकन के लिए ओएसएम प्रणाली लागू की थी। इसके तहत आंसर शीट को पहले डिजिटल रूप से स्कैन किया जाता है और फिजिकली चेक करने की बजाय ऑन स्क्रीन मूल्यांकन किया गया।
सीबीएसई ने हालांकि आज (22 मई) सुबह एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वेबसाइट सही से काम कर रही है हालांकि, यूजर्स ने परेशानियों की बात कही है।
छात्रों ने क्या आरोप लगाए?
गौरतलब है कि 12वीं कक्षा के नतीजे जारी होने के बाद छात्रों ने फिजिक्स, मैथ, अकाउंट्स और इकॉनमिक्स जैसे विषयों में अंकों में गड़बड़ियों और कम अंक के आरोप लगाए थे। सीबीएसई ने हालांकि इस प्रणाली का बचाव करते हुए कहा था कि यह प्रणाली सही है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता से इंकार किया था।
हालांकि छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों ने कई तरह की परेशानियों को लेकर एक्स पर पोस्ट कर शिकायत की है। छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि पेमेंट और एप्लिकेशन सबमिशन के दौरान साइट सही से काम नहीं कर रही है जिसके चलते पेमेंट बार बार करना पड़ रहा है।
इसके अलावा कई छात्रों ने पेमेंट के लिए अचानक से फीस बढ़ने की भी शिकायत की है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, एक छात्र ने री-इवैल्युएशन के लिए पहले एक रुपये फीस दिखी, जो बाद में 69.67 रुपये हुई फिर 8,000 रुपये तक पहुंची।
वहीं, कुछ मामलों में यह फीस 69,420 रुपये तक भी पहुंच गई। सोशल मीडिया पर बढ़ी फीस के कई स्क्रीनशॉट्स वायरल हो रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, इंग्लिश विषयों के लिए 69,420 रुपये फीस दिखाई। ऐसे में चारों विषयों के लिए कुल फीस 2,77,680 रुपये हो गई।
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सीबीएसई के इन खामियों के चलते एक अभिभावक ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में बार-बार आ रही तकनीकी खामियों को लेकर प्रधानमंत्री को एक विस्तृत पत्र लिखा। पत्र में अभिभावक ने बताया कि सीबीएसई ने पहले पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया का पहला चरण 18 से 22 मई, 2026 तक निर्धारित किया था लेकिन बाद में इसे बदलकर 19 से 22 मई कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि आधी रात और तड़के बार-बार लॉगिन करने की कोशिश करने के बावजूद आवेदन विंडो ठीक से काम नहीं कर रही थी। पत्र में आगे बताया गया कि 20 मई को सीबीएसई ने एक और नोटिस जारी कर प्रक्रिया को 23 मई तक बढ़ा दिया और बाद में छात्रों को सूचित किया कि “तकनीकी खराबी” के कारण पोर्टल दोपहर 2 बजे फिर से खुल जाएगा। हालांकि, शिकायत के अनुसार, दोपहर 3:15 बजे के बाद भी प्रक्रिया पूरी तरह से बंद थी।



