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बांग्लादेशः दीपू चंद्र दास के परिवार की जिम्मेदारी लेने का वादा सरकार ने किया, पीट-पीटकर की गई थी हत्या

बांग्लादेश सरकार ने भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारे गए दीपू चंद्र दास की हत्या के बाद परिवार की जिम्मेदारी लेने का वादा किया है।

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने दीपू चंद्र दास के परिवार की जिम्मेदारी का किया वादा, फोटोः आईएएनएस

ढाकाः बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि बीते सप्ताह ईशनिंदा के आरोप में मारे गए दीपू चंद्र दास के परिवार की जिम्मेदारी राज्य लेगा।

शिक्षा सलाहकार सीआर अबरार ने मंगलवार, 23 दिसंबर को 25 वर्षीय दीपू दास के शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की। दीपू दास की बीते 18 दिसंबर को मेमनसिंह में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी और उनके शव को आग लगा दी थी।

बांग्लादेश सरकार ने क्या कहा?

अबरार ने कहा “राज्य ने दीपू दास के बच्चे, पत्नी और माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी ली है।” उन्होंने फैक्ट्री मजदूर दीपू दास की हत्या को एक क्रूर अपराध बताया जिसका कोई बहाना नहीं है।

अबरार ने कहा कि परिवार से मिलने से पहले उन्होंने मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से बात की। जिन्होंने उनसे परिवार को सरकार की ओर से “गहरा दुख और गहरी संवेदना” व्यक्त करने को कहा।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दास के पिता रबी चंद्र दास ने अपने बेटे की हत्या के लिए न्याय की मांग की और सलाहकार को परिवार की स्थिति के बारे में बताया। यूनुस के कार्यालय ने इस बीच इस बात की पुष्टि की कि दास के परिवार को वित्तीय और कल्याणकारी सहायता प्रदान की जाएगी और संबंधित अधिकारी आने वाले समय में उनके साथ लगातार संपर्क में रहेंगे।

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दीपू दास की हत्या में कथित तौर पर संलिप्तता के आरोप में अब तक बारह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यूनुस के प्रेस विंग ने मंगलवार को एक बयान में कहा, “आरोप, अफवाहें या मतभेद हिंसा का औचित्य साबित नहीं कर सकते और किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।”

इस बयान में आगे कहा गया, “सरकार ने कानून के शासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है और यह स्पष्ट किया है कि कथित अपराधों की जांच करने और उचित प्रक्रिया के माध्यम से न्याय सुनिश्चित करने का अधिकार केवल राज्य के पास है।”

दास की हत्या के बाद ढाका और बांग्लादेश के अन्य हिस्सों में कारखाने के श्रमिकों, छात्रों और मानवाधिकार समूहों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए वहीं भारत ने भी अपनी चिंता व्यक्त की।

उस्मान हादी की मौत के बाद हुई हत्या

यह भीड़ का हमला उसी समय हुआ जब ढाका में नकाबपोश बंदूकधारियों द्वारा गोली मारे जाने के छह दिन बाद कट्टरपंथी दक्षिणपंथी सांस्कृतिक समूह इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई।

हादी बीते साल शेख हसीना की सरकार के विरुद्ध हुए प्रदर्शनों का एक बड़ा चेहरा थे। हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में अशांति देखी गई। भीड़ ने बांग्लादेश के अखबारों द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालयों पर हमला कर आग लगा दी। इसके अलावा छायानौत जैसे प्रमुख सांस्कृतिक समूहों के कार्यालयों में आग लगा दी।

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छायानौत की स्थापना बांग्लादेश में 1961 में हुई थी। यह संस्था बंगाली संस्कृति को समर्पित है। इसकी स्थापना का उद्देश्य बंगाल की सांस्कृतिक और संगीत की विरासत को बढ़ावा देना था।

बांग्लादेश में दीपू दास की हत्या के बाद भारत में तनाव देखा जा रहा है। दीपू की हत्या के विरोध में भारत में कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में भारत और बांग्लादेश के संबंधों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है जो कि शेख हसीना के भारत आने से जारी है।

बीते दिनों बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए वीजा सेवाएं निलंबित कर दी थीं। वहीं, 23 दिसंबर को बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायोग को तलब कर बांग्लादेशी दूतावास की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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