विनीत कुमार ने मीडिया, टेलीविज़न, एफएम रेडियो और उसकी भाषा पर गंभीर पढ़ाई की है। ब्लॉगिंग के दौर से लिखने को रोज़ की ज़रूरत में शामिल करने वाले विनीत कुमार की पहचान युवा मीडिया विश्लेषक की है। मीडिया पर लिखित अपनी पहली किताब "मंडी में मीडिया (2013)" से चर्चा में आए कुमार ने दस साल बाद "मीडिया का लोकतंत्र (2023)" नाम से दूसरी किताब लिखी और इस किताब के लिए इन्हें साल 2024-25 का श्री हरिकृष्ण त्रिवेदी स्मृति सम्मान भी मिला। इस बीच डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर मीडिया, शहर, घर-गृहस्थी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखना जारी रहा और इसके बीच एक किताब निकलकर आयी-"इश्क़ कोई न्यूज़ नहीं (2015)"।
बैचलर्स किचन के साथ हैशटैग लगाकर वो पिछले पन्द्रह साल से फ़ेसबुक पर खाने-पकाने की दुनिया पर लिखते आए हैं। बैचलर्सकिचनः अपना स्वाद, अपना अंदाज़ (2026) खाने-पीने की दुनिया पर इनकी पहली किताब है। लड़के को भात तक बनाना नहीं आता ये उलाहना सुनने के बाद से मनोरमा रसोई से कुकिंग की ट्यूशन लेने के बाद विनीत ने बैचलर्सकिचन गुलज़ार किया, इसे एक गंभीर वैचारिक सांस्कृतिक परिघटना में बदला और इसके बहाने जापान तक की यात्रा की। इनसे
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