ममता सिंह
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ममता सिंह आकाशवाणी के लोकप्रिय राष्ट्रीय रेडियो चैनल विविध भारती की वरिष्ठ उद्घोषिका हैं। श्रोताओं के बीच वह 'रेडियो सखि' के नाम से जानी जाती हैं। साहित्य, संगीत और प्रसारण के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट पहचान है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया और संस्कृत में पीएचडी के लिए शोधकार्य भी शुरू किया, हालांकि वह पूरा नहीं हो सका। इसके अलावा उन्होंने रूसी भाषा में डिप्लोमा तथा प्रयाग संगीत समिति से शास्त्रीय संगीत में 'प्रभाकर' की उपाधि प्राप्त की।
ममता सिंह की पहली पुस्तक 'राग मारवा' (कहानी संग्रह) राजपाल एंड संस से प्रकाशित हुई। इस पुस्तक को महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सम्मान के साथ-साथ मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के 'वागीश्वरी सम्मान' से भी नवाजा गया। उनका पहला उपन्यास 'अलाव पर कोख' प्रतिबिंब प्रकाशन से प्रकाशित हुआ, जिसे भी महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने सम्मानित किया। इसके बाद उनका कहानी संग्रह 'किरकिरी' राजकमल प्रकाशन समूह के राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित हुआ, जिसे मुंबई के आशीर्वाद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका उपन्यास 'बीज और आकाश' शिवना प्रकाशन से प्रकाशित है।
उत्कृष्ट प्रसारण के लिए ममता सिंह को आकाशवाणी का राष्ट्रीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ उद्घोषिका (बेस्ट एनाउंसर) पुरस्कार भी मिल चुका है। वह देशभर में आयोजित साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित मंच संचालन करती हैं। विविध भारती से उनकी अनेक कहानियों का प्रसारण हुआ है और उन्होंने कई रेडियो नाटकों में भी अपनी आवाज दी है। इसके अलावा वह 'कॉफी हाउस' ऑडियो ब्लॉग के माध्यम से अपनी तथा देश के अनेक प्रतिष्ठित लेखकों की रचनाओं का वाचन करती हैं। वह 'बतकही' नाम से एक साहित्यिक ब्लॉग भी संचालित करती हैं।

