चेन्नई। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘वी द लीडर्स’ के गठन की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में अन्नामलाई ने कहा कि उनका यह फैसला उस मूल उद्देश्य से प्रेरित है, जिसके तहत उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था। उन्होंने कहा कि वह तमिलनाडु में सकारात्मक बदलाव लाने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए राजनीति में आए थे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की जरूरत है।
अन्नामलाई ने खुलासा किया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही भाजपा नेतृत्व को पार्टी छोड़ने की अपनी मंशा से अवगत करा दिया था। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे अनुरोध किया था कि वे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारियां पूरी होने तक संगठन के साथ बने रहें। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से विस्तृत चर्चा की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि पिछले करीब 18 महीनों के दौरान कई राजनीतिक मुद्दों पर उनके और भाजपा नेतृत्व के बीच मतभेद उभरकर सामने आए। उन्होंने अपनी इस पुरानी राय को दोहराया कि भाजपा को 2026 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अकेले लड़ना चाहिए था। उनका इशारा ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम के साथ गठबंधन की ओर था।
उन्होंने कहा, “मैं पार्टी के लिए किसी प्रकार की समस्या या असहज स्थिति पैदा नहीं करना चाहता था, इसलिए मैंने सम्मानपूर्वक अलग राह चुनने का फैसला किया।”
नई पार्टी और नया राजनीतिक एजेंडा
अन्नामलाई ने शुक्रवार अपनी नई पार्टी ‘वी द लीडर्स’ की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी व्यक्ति-पूजा और वंशवादी राजनीति के खिलाफ जनकेंद्रित राजनीति का विकल्प प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय दल अक्सर तमिलनाडु की भावनाओं, आकांक्षाओं और क्षेत्रीय जरूरतों को पूरी तरह समझने में विफल रहते हैं। इसी कारण उन्होंने राज्य की पहचान और जनता की अपेक्षाओं को केंद्र में रखकर नई राजनीतिक पहल शुरू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा को “अकेले लड़ी गई लड़ाई” बताते हुए कहा कि अब उनका पूरा ध्यान आम लोगों के साथ मिलकर जनकल्याण आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने पर होगा।
द्रमुक और विजय पर निशाना
अन्नामलाई ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति किसी एक परिवार, व्यक्ति या चेहरे तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र में व्यक्ति-पूजा और वंशवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति व्यक्तियों के बजाय जनता और उनके मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित हो।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने बयान जारी कर बताया कि पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने के. अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अन्नामलाई ने हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान अपना इस्तीफा सौंपा था। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा की थी।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि तमिलनाडु भाजपा की कमान नैनार नागेंद्रन को सौंपे जाने और अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन बहाल किए जाने के बाद अन्नामलाई पार्टी की रणनीति से असहमत थे। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका निर्णय व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण और राज्य के लिए अलग राजनीतिक विकल्प तैयार करने की सोच से जुड़ा है।
आईपीएस से राजनीति तक का सफर
कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने 2019 में भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर वे 2020 में भाजपा में शामिल हुए और बेहद कम समय में पार्टी के प्रमुख चेहरों में शुमार हो गए। महज एक वर्ष के भीतर उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में संगठन विस्तार और राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की कोशिश की।
अब भाजपा से अलग होकर नई पार्टी के गठन के साथ अन्नामलाई ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण खड़ा कर दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी नई पार्टी कितना प्रभाव डाल पाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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