भारतीय सिनेमा में ऐसे कलाकार कम ही हुए हैं, जिन्होंने अपनी लोकप्रियता की सीमाएं देश की सरहदों से बहुत दूर तक फैला दीं। मिथुन चक्रवर्ती उन चुनिंदा सितारों में शामिल हैं, जिनकी दीवानगी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। एक समय ऐसा था जब रूस और पूर्व सोवियत संघ के देशों में उनका नाम किसी अंतरराष्ट्रीय सुपरस्टार की तरह लिया जाता था। वहां बच्चे उनके डांस स्टेप्स की नकल करते थे, युवा उनके जैसे कपड़े और हेयरस्टाइल अपनाते थे, और उनकी फिल्मों का इंतजार किसी बड़े त्योहार की तरह किया जाता था।
16 जून 1950 को कोलकाता में जन्मे मिथुन चक्रवर्ती का असली नाम गौरांग चक्रवर्ती है। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) से प्रशिक्षण प्राप्त किया। युवावस्था में उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। कुछ समय के लिए नक्सलवाद से भी जुड़ाव रहा। परिवार में हुई एक दुखद घटना के बाद उन्होंने घर लौटने और जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया। यही निर्णय आगे चलकर भारतीय सिनेमा को एक ऐसा कलाकार देने वाला था, जिसने अपनी अलग पहचान बनाई।
मिथुन ने 1976 में निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ से अभिनय की शुरुआत की। इस फिल्म में एक संथाल विद्रोही की भूमिका निभाने वाले मिथुन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। हालांकि शुरुआती सफलता के बावजूद बॉलीवुड में उनकी राह आसान नहीं रही। कई वर्षों तक उन्हें संघर्ष करना पड़ा और वे खुद को स्थापित करने की कोशिश करते रहे।
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फिर आया साल 1982 और फिल्म ‘डिस्को डांसर’। इस फिल्म ने न केवल मिथुन चक्रवर्ती का करियर बदल दिया, बल्कि उन्हें वैश्विक पहचान भी दिलाई। फिल्म में निभाया गया ‘जिमी’ का किरदार और इसके गीत-संगीत लोगों के दिलों पर छा गए। भारत में फिल्म सुपरहिट रही, लेकिन इसकी असली सनसनी रूस और सोवियत संघ के देशों में देखने को मिली।
उस दौर में जब भारत में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जीतेंद्र और अन्य बड़े सितारों का दबदबा था, तब रूस में मिथुन चक्रवर्ती की लोकप्रियता अलग ही स्तर पर पहुंच चुकी थी। बताया जाता है कि वहां लोग उनके डांस मूव्स की नकल करते थे, उनके पोस्टर घरों में सजाए जाते थे और उनकी फिल्मों के शो हाउसफुल चला करते थे। ‘जिमी जिमी जिमी आजा’ जैसे गीत सोवियत देशों में सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन गए थे। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में उस समय मिथुन को भारत के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक बताया गया।
90 के दशक में गिरा सफलता का ग्राफ
‘डिस्को डांसर’ की सफलता के बाद मिथुन ने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने रोमांस, एक्शन और डांस, तीनों ही शैलियों में कई यादगार किरदार निभाए। जिसमें ‘मेरा रक्षक’ (1978), ‘शौकीन’ (1982), ‘डिस्को डांसर’ (1982), ‘कसम पैदा करने वाले की’ (1984), ‘प्यार झुकता नहीं’ (1985), ‘डांस डांस’ (1987), ‘कमांडो’ (1988), ‘वक्त की आवाज’ (1988), ‘अग्निपथ’ (1990), ‘ताहादेर कथा’ (1992), ‘स्वामी विवेकानन्द’ (1998), ‘गुरु’ (2007) और ‘फिर कभी’ (2009) शामिल हैं। इन फिल्मों ने उन्हें व्यावसायिक और समानांतर सिनेमा, दोनों में एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
हालांकि उनका फिल्मी सफर भी उनके जीवन की तरह उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 1990 के दशक में उन्हें एक कठिन दौर का सामना करना पड़ा। 1993 से 1998 के बीच उनकी लगातार 33 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकीं। इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता में कोई बड़ी कमी नहीं आई। यही उनकी स्टार अपील की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है कि असफलताओं के दौर में भी दर्शकों का प्यार उनके साथ बना रहा।
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मिथुन ने सिर्फ फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी सफल कारोबार खड़ा किया। ऊटी और अन्य स्थानों पर उनके होटल लंबे समय से चर्चित रहे हैं। बाद के वर्षों में उन्होंने टेलीविजन के जरिए भी नई पीढ़ी से मजबूत जुड़ाव बनाया और डांस रियलिटी शो में अपनी मौजूदगी से घर-घर तक पहुंचे।
अभिनय के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारतीय सिनेमा में उनके लंबे और प्रभावशाली योगदान को मान्यता देते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारतीय फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान ‘दादासाहेब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। करीब पांच दशक लंबे करियर के बाद भी मिथुन चक्रवर्ती आज अभिनय और की दुनिया में सक्रिय हैं। मौजूदा वक्त में वह एक राजनेता भी हैं और भाजपा से जुड़े हुए हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

