चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने जीवन के संभवत: सबसे बड़े राजनीतिक और धार्मिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। यह विवाद एक आपत्तिजनक वायरल वीडियो को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके आधार पर 15 जून को अकाल तख्त ने उन्हें ‘गुरु दोषी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया। अकाल तख्त ने कहा कि संबंधित वीडियो की जांच दो सरकारी मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं से कराई गई। उनकी रिपोर्ट में यह वीडियो असली, बिना किसी छेड़छाड़ वाला और एआई से तैयार नहीं किया हुआ पाया गया।
किस विवादित वीडियो पर फंसे भगवंत मान
यह वीडियो, जिसमें कथित तौर पर भगवंत मान जैसे दिखने वाला एक शख्स सिख गुरुओं की तस्वीरों के पास शराब छिड़कता नजर आता है, पहली बार अक्टूबर 2025 में कनाडा के जगमन समरा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने एफआईआर दर्ज कराई थी और मोहाली की एक अदालत ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को वीडियो हटाने का आदेश दिया था।
जनवरी 2026 में यह वीडियो फिर से वायरल हुआ, जिसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब ने भगवंत मान को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया। 15 जनवरी 2026 को मान अकाल तख्त के सामने पेश हुए और उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और एआई आधारित डीपफेक है।
हालांकि अब जून 2026 में यही वीडियो एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक विवाद का कारण बन गया। 15 जून को अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने बताया कि दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की जांच के बाद वीडियो को प्रमाणिक पाया गया है। इसके बाद अकाल तख्त की समिति ने भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया।
भगवंत मान ने आरोपों को किया खारिज
इस पूरे विवाद पर मंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान जारी करते हुए अपने खिलाफ आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला शख्स वे नहीं हैं। उनका कहना था कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की कद-काठी, लंबाई और चेहरे की बनावट उनसे मेल नहीं खाती। मान ने ये भी कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी है कि इतने उच्च धार्मिक पदों का इस्तेमाल उनके खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘हाल ही में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने एक वीडियो के आधार पर मेरे खिलाफ बयान दिए और कहा कि यह वीडियो एआई से तैयार नहीं किया गया है। जब मुझे अकाल तख्त साहिब बुलाया गया था, तब मैंने स्पष्ट किया था कि उस वीडियो में मैं बिल्कुल नहीं हूं और उसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति मुझसे मेल नहीं खाता। इसके बावजूद मुझे आश्चर्य है कि इतने सम्मानित धार्मिक पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर झूठा प्रचार कर रहे हैं और मुझे बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार फैला रहे हैं। धर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है। मैं श्री अकाल तख्त साहिब को सर्वोच्च मानता हूं, लेकिन पूरा ‘संगत’ उन लोगों के फैसलों की प्रकृति से भली-भांति परिचित है, जो राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए वहां बैठे हैं। इसलिए मैं इस वीडियो की प्रामाणिकता को पूरी तरह खारिज करता हूं। मुझे बदनाम करने के ये प्रयास पूरी तरह गलत हैं।’
दूसरी ओर अकाल तख्त ने सिख समुदाय से मुख्यमंत्री भगवंत मान से सामाजिक दूरी बनाए रखने या उनका बहिष्कार करने का आह्वान किया है। इसके अलावा, अकाल तख्त ने पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों के सिख विधायकों और पंजाब मंत्रिमंडल को 29 जून को कथित बेअदबी विरोधी कानून के मुद्दे पर पेश होने के लिए तलब किया है।
मान से इस्तीफे की मांग
इस बीच पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च संस्था है और उसके हर निर्देश का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब अकाल तख्त किसी व्यक्ति को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित करता है तो इसके गंभीर सामाजिक और नैतिक परिणाम होते हैं।
ढिल्लों ने कहा कि ऐसी स्थिति में पंजाब सरकार में कार्यरत सिख मंत्री और अधिकारी असहज स्थिति में आ सकते हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज और निर्णय प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य के हित में मुख्यमंत्री भगवंत मान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी भगवंत मान से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता गंभीर आरोपों पर मुख्यमंत्री के जवाब का इंतजार कर रही है। वड़िंग ने कहा, ‘अकाल तख्त के फैसले सभी के लिए बाध्यकारी हैं। जब कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने दो अलग-अलग फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की जांच के बाद वीडियो को प्रमाणिक बताया है, तो भगवंत मान को अकाल तख्त के सम्मान और लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।’
उन्होंने आगे कहा, ‘जब मुख्यमंत्री बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बना सकते हैं, तो उन्हें यह भी उदाहरण पेश करना चाहिए कि वे वही करते हैं जो कहते हैं।’

