Wednesday, April 22, 2026
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वैभव सूर्यवंशी से साकिब हुसैन तक, IPL 2026 में बिहार के खिलाड़ियों का दिख रहा दम

साल 2000 में बिहार-झारखंड के विभाजन ने बिहार के क्रिकेट को बहुत नुकसान पहुंचाया। हालांकि, पिछले कुछ सालों में बिहार में क्रिकेट की तस्वीर तेजी से बदल रही है।

नई दिल्ली: IPL-2026 की हलचल अपने चरम पर है। अगल कुछ दिनों में इस सीजन का आधा सफर खत्म हो जाएगा। इस बार के आईपीएल में भी धमाकेदार प्रदर्शन देखने को मिले हैं लेकिन इन सबके बीच एक और खास बात भी है। इस बार के आईपीएल में बिहार से निकले क्रिकेट खिलाड़ियों की भी खूब चर्चा है। लंबे समय तक इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं, अलग-अलग एसोसिएशन, गुटबाजी जैसे अंधेरे युग से निकलकर फिर से क्रिकेट के मैदान पर छा जाना आसान सफर नहीं रहा है।

पिछले एक दशक में बिहार में क्रिकेट की तस्वीर तेजी से बदली है और इसका असर घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक पर नजर आ रहा है। खासकर आईपीएल के जरिए बिहार के उभरते हुए क्रिकेटरों को बड़ा मंच मिलने लगा है जब अब से कुछ साल पहले तक दमखम होने के बावजूद गुमनाम रह जाते थे। वहीं, कई खिलाड़ियों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। चुनौतियां अब भी हैं, लेकिन बिहार के चेहरे आईपीएल में अपना प्रभाव दिखाने लगे हैं।

आईए जानते हैं इस बार यानी आईपीएल-2026 में बिहार के कौन-कौन से खिलाड़ी छाए हुए हैं। बिहार क्रिकेट का इतिहास क्या रहा है और किन अंधेरे रास्तों से निकल अब ये अपनी पहचान बना रहा है।

आईपीएल-2026 में बिहारी खिलाड़ियों का दम

वैभव सूर्यवंशी: बिहार के समस्तीपुर जिले से आने वाले वैभव सूर्यवंशी इन दिनों पूरी दुनिया में क्रिकेट फैंस की जुबान पर हैं। इसकी वजह उनकी विस्फोटक और निडर बल्लेबाजी है। महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के जल्द इंटरनेशनल क्रिकेट में भी कदम रखने की संभावना है। इस सीजन में वे राजस्थान रॉयल्स के लिए खेल रहे हैं और सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की लिस्ट में 5वें स्थान पर हैं।

मुकेश कुमार: बिहार के गोपालगंज से आने वाले मुकेश अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम में भी अपनी जगह बना चुके हैं। आईपीएल-2026 में वे दिल्ली कैपिटल्स की जर्सी में खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। मुकेश भारत की ओर से तीनों ही फॉर्मेट में खेल चुके हैं। वैसे यहां ये भी बताना जरूरी है कि वे घरेलू क्रिकेट बंगाल की ओर से खेले। 2014 में वे बिहार से पश्चिम बंगाल चले गए थे और फिर वही से उनके क्रिकेट के सफर ने रफ्तार पकड़ी।

साकिब हुसैन: सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज साकिब हाल में सुर्खियों में आए जब उन्होंने अपने डेब्यू आईपीएल मैच में ही 24 रन देकर 4 विकेट झटके। बिहार के गोपालगंज से आने वाले साकिब बिहार की ही टीम से खेलते हैं।

ईशान किशन: बिहार की राजधानी पटना में जन्मे ईशान किशन की विस्फोटक बल्लेबाजी पूरी दुनिया देख चुकी है। ईशान हालांकि झारखंड की ओर से घरेलू क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन जब बिहार से निकले खिलाड़ियों का जिक्र होता है तो ईशान किशन का नाम भी आता ही है।

इसके अलावा कुछ और खिलाड़ी भी हैं जिन्हें अलग-अलग फ्रेंचाइजी ने खरीदा है, और इनके मैदान पर उतरने का इंतजार है। मसलन तेज गेंदबाज मोहम्मद इजहार (मुंबई इंडियंस), जो सुपौल जुले से आते हैं। ऐसे ही आकाशदीप (केकेआर/फिलहाल चोटिल) भी हैं, जो चोट के कारण सीजन से बाहर हो चुके हैं। आकाशदीप वैसे घरेलू क्रिकेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हैं पर ये मूलरूप से बिहार के सासाराम से हैं।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन- 1935 में स्थापना

बिहार क्रिकेट असोसिएशन (BCA) देश के चुनिंदा सबसे पुराने क्रिकेट संघो में से एक है। इसकी स्थापना 1935 में हुई थी। बिहार ने 1937 में अपना पहला रणजी ट्रॉफी मैच खेला था। पटना का मोइन-उल-हक स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी भी कर चुका है, जिससे यह साफ है कि राज्य में क्रिकेट का बुनियादी ढांचा काफी पहले से मौजूद था।

हालांकि, ये कहानी तब की है जब बिहार और झारखंड साथ थे। अहम ये भी है कि तब ज्यादातर क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर जमशेदपुर, रांची जैसे इलाके में केंद्रित थे। साल 2000 में बिहार-झारखंड के विभाजन ने बिहार के क्रिकेट को बहुत नुकसान पहुंचाया।

ज्यादातर स्टेडियम, एकेडमी और प्रशासनिक ढांचा झारखंड में चले गए। झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन को BCCI की मान्यता भी मिल गई। दूसरी ओर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में गुटबाजी और अराजकता ने इसे धीरे-धीरे हाशिए पर धकेल दिया।

हालत ऐसी हुई कि बिहार की टीम वर्षों तक रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में हिस्सा ही नहीं ले पाई। ये राज्य में एक तरह से पेशेवर क्रिकेट की मौत थी। एसोसिएशन के अंदर गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष ने तूल पकड़ा और फिर दो-दो एसोसिएशन बन गए। लेकिन किसी को भी बीसीसीआई की मान्यता नहीं थी। यही कारण है कि बिहार क्रिकेट लंबे समय के लिए पीछे चला गया। यहां टैलेंट तो था, लेकिन प्लेटफॉर्म नहीं, जहां से खिलाड़ी आगे बढ़ सके।

बिहार क्रिकेट के लिए फिर से बदलाव 2016 के बाद शुरू हुआ। लोढा कमिटी की सिफारिशें लागू हुई और सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) को घरेलू टूर्नामेंट में टीमें उतारने की अनुमति दी। इसके बाद बिहार की टीम को आधिकारिक तौर पर घरेलू क्रिकेट में बहाल कर दिया गया।

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विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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