काठमांडूः नेपाल में नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह उर्फ बालेन के पदभार ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। यह विरोध प्रदर्शन सड़कों से फैलकर देश के प्रशासनिक केंद्र, सिंह दरबार तक पहुंच गए हैं। छात्र, राजनीतिक समूह और आम नागरिक सहित प्रदर्शनकारी काठमांडू और अन्य शहरों में सड़कों पर उतर आए हैं।
दरअसल बालेन सरकार ने सीमा पार से 100 रुपये का सामान लाने पर अनिवार्य सीमा शुल्क लागू किया है। बालेन के प्रधानमंत्री बनने के एक महीने के भीतर ही उनके इस अलोकप्रिय कदम के विरोध में नेपाल में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
भारत और नेपाल के बीच दशकों से लोगों और उत्पादों का निर्बाध आवागमन रहा है। इससे नेपाली नागरिकों को लाभ हुआ है जो किराने का सामान, दवाइयां, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और शादियों के सामान खरीदने के लिए भारत के सीमावर्ती बाजारों में आते हैं।
सीमा पार नेपाल में इन उत्पादों को ले जाना अब तक कोई समस्या नहीं थी लेकिन अब प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने लंबे समय से लागू सीमा शुल्क की अनदेखी की है और अब उसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल की तुलना में भारतीय सामान सस्ते में उपलब्ध
नेपाल के लोगों के लिए भारतीय सामान उनके देश में उपलब्ध सामान की तुलना में सस्ता है। लेकिन अब सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नेपाली लोग बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा दुनिया की सबसे खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक है। दोनों देश लगभग 1,751 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं।
देश में हो रहे प्रदर्शनों की वजह नेपाल की बालेन शाह सरकार द्वारा भारत से आयातित 100 नेपाली रुपये (63 रुपये) से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क है। वस्तु के आधार पर, सीमा शुल्क 5% से 80% तक हो सकता है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने एक प्रदर्शनकारी के हवाले से लिखा कि ” जन्म से लेकर मृत्यु तक यहां [नेपाल में] होने वाले सभी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए हम सभी आवश्यक वस्तुएं वहां [भारत से] लाते हैं। यहां तक कि उर्वरक भी, जो नेपाल सरकार कभी-कभी समय पर उपलब्ध नहीं करा पाती, हम भारत से मंगवाते हैं। अब स्थिति बदल गई है; यह एक अघोषित नाकाबंदी है। “
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समाचार एजेंसी आईएएनएस की खबर के मुताबिक, बालेन सरकार ने पिछले कुछ दिनों से इस नियम को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। हालांकि यह प्रावधान कई साल पहले बनाया गया था, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों के कारण इसे लागू नहीं किया जा रहा था। नई सरकार के इस फैसले से अब स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई है। इसके चलते अब प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
संवाद समूह ने सरकार से उठाई ये मांगे
नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने शनिवार को सरकार से सीमा शुल्क नीति में तुरंत संशोधन करने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा नियम सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर अनावश्यक बोझ डाल रहे हैं।
संगठन की प्रमुख मांगों में 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तत्काल खत्म करना शामिल है। उनका कहना है कि यह नियम खासकर कम आय वाले परिवारों को प्रभावित करता है और इसे लागू करना भी मुश्किल है। इसके बजाय घरेलू उपयोग के सामान पर शून्य शुल्क की मांग की गई है।
इसके अलावा संगठन की एक मांग है कि सीमा क्षेत्रों में सुव्यवस्थित और सस्ते बाजार विकसित किए जाएं जिससे लोगों को जरूरी वस्तुएं आसानी से मिल सकें। इसके साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं के लिए विशेष कस्टम-फ्री सुविधा देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत श्रद्धालु 48 घंटे तक बिना शुल्क सामान ले जा सकें। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच लोगों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
वहीं, सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि इस कदम से उनके दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि वे आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए सीमा पार से होने वाली खरीदारी पर बहुत अधिक निर्भर हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह नीति आम नागरिकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालती है और इन क्षेत्रों की जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज करती है।
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भारत से सामान लाने को लेकर नेपाली नागरिकों और नेपाल के सुरक्षा एवं सीमा शुल्क कर्मियों के बीच बहस के वीडियो सामने आ रहे हैं। नेपालगंज में अपने बच्चों के लिए चिप्स के कुछ पैकेट ले जा रही एक महिला को नेपाल में प्रवेश करने से रोक दिया गया और उसे बताया गया कि उसका सामान नेपाल पुलिस द्वारा जब्त कर लिया जाएगा।
बालेन सरकार के इस कदम का विरोध देश के राजनैतिक दल भी कर रहे हैं। नेपाली कांग्रेस पार्टी ने सीमा शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की है और इसे “जनविरोधी और असंवेदनशील” कदम बताया है।
छात्र संघों पर प्रतिबंधों के चलते भी बालेन सरकार विरोध में घिरी
एक अन्य घटनाक्रम में नेपाल की नई सरकार द्वारा छात्र संघों पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में कुछ प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि मुख्य प्रदर्शन आम नेपाली लोगों द्वारा उन नियमों के खिलाफ है जिसके चलते उन्हें भारत से आने वाले उत्पादों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
वहीं, एक अन्य घटनाक्रम में नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बुधवार (22 अप्रैल) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बिजनेसमैन दीपक भट्टा के साथ कथित कनेक्शन के मामले को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुंग ने गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दिया है। नेपाली मीडिया के मुताबिक, दीपक भट्टा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच चल रही है। नेपाल में बालेन शाह की सरकार बनने के बाद से गुरुंग काफी चर्चा में रहे। ऐसे में भ्रष्टाचार के विरोध से उपजे प्रदर्शनों के बाद सत्ता में परिवर्तन तो हुआ लेकिन सरकार फिर से वैसे ही आरोपों के चलते सवालों के घेरे में है। नई सरकार बनने के बाद यह दूसरे मंत्री का इस्तीफा है।
इससे पहले श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में हटा दिया गया था। नेपाल में 5 मार्च को हुए चुनाव के बाद 8 मार्च को चुनाव के परिणाम घोषित हुए, जिसके बाद 27 मार्च को बालेन शाह ने बतौर पीएम शपथ ग्रहण किया। महीनेभर के अंदर ही नेपाल की सियासत में भूचाल देखने को मिल रहा है।
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(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

