तेहरानः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा बुधवार (21 अप्रैल) को दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को आगे बढ़ाने के कुछ घंटों बाद, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दो जहाजों पर हमला कर उन्हें जब्त कर लिया। इनमें गुजरात जा रहा एक मालवाहक जहाज भी शामिल था। बीते हफ्ते महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे होर्मुज को पार करने की कोशिश कर रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर हुए हमले के बाद, इस घटना से ईरान और भारत के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के मुताबिक, पनामा ध्वज वाले एमएससी फ्रांसेस्का और लाइबेरिया ध्वज वाले एपामिनोड्स नामक दो जहाज अब आईआरजीसी (IRGC) की हिरासत में हैं और उन्हें ईरान ले जाया गया है। एक तीसरा जहाज, ग्रीक स्वामित्व वाला यूफोरिया भी निशाने पर था और अब ईरान के तट पर फंसा हुआ है।
दुबई से गुजरात के मुंद्रा जा रहा था जहाज
समुद्री यातायात डेटा से पता चलता है कि एपामिनोंडास दुबई से गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह की ओर जा रहा था। ईरानी नौसेना ने कहा कि जहाजों के पास “आवश्यक अनुमति” नहीं थी और उन्होंने “नेविगेशन सिस्टम में हेरफेर” किया, जिससे समुद्री सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
यह घटनाक्रम दो भारतीय जहाजों, जग अर्नव और सनमार हेराल्ड, पर ईरानी नौसेना द्वारा गोलीबारी किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। तेहरान ने हालांकि आश्वासन दिया था कि पांच “मित्र” देशों के जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा।
इससे पहले, यूनाइटेड किंगडम (UK) मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने कहा था कि होर्मुज में तीन व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी हुई, जो युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के नियंत्रण में है। इस जलमार्ग पर ईरान के पूर्ण नियंत्रण ने तेल आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है और कच्चे तेल की कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है।
यह भी पढ़ें – ईरान ने ओमान के पास होर्मुज में कंटेनर जहाज पर की गोलीबारी, ब्रिटेन की सैन्य इकाई का दावा
अमेरिकी नाकेबंदी युद्धविराम हेतु ईरान के लिए बनी शर्त
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक जहाज के ब्रिज (केंद्रीय कमान केंद्र) को गोलीबारी और रॉकेट-चालित ग्रेनेड से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालांकि, चालक दल को कोई चोट नहीं आई। यह घटनाक्रम संभवतः अमेरिकी मरीन द्वारा हाल ही में ओमान की खाड़ी के पास दो ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाजों पर नौसैनिक नाकाबंदी के तहत चढ़कर उन्हें जब्त करने के जवाब में उठाया गया कदम है।
गौरतलब है कि ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिका ने नाकाबंदी की है। यह नाकाबंदी दोनों देशों के बीच विवाद का नया कारण बन गई है। तेहरान ने शांति वार्ता के लिए नाकाबंदी हटाने को एक शर्त बना दिया है। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। इसका उद्देश्य ईरान के तेल राजस्व को रोकना और उसकी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करना है।
यह भी पढ़ें – अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्षविराम बढ़ाया, शहबाज शरीफ ने ट्रंप का जताया आभार, तेहरान ने क्या कहा?
ज्ञात हो कि अमेरिका ने ईरान के साथ 8 अप्रैल को हुए 15 दिन के युद्धविराम समझौते को बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रंप ने इस महत्वपूर्ण फैसले का श्रेय पाकिस्तान के नेतृत्व, विशेषकर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध को दिया है। इस दौरान ट्रंप ने हालांकि होर्मुज पर नाकाबंदी जारी रखने का आदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि तेहरान को वार्ता आगे बढ़ाने के लिए पहले एक एकजुट होकर प्रस्ताव पेश करना होगा।

