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एच-1बी वीजा के लिए 100,000 डॉलर फीस को लेकर अमेरिका ने अब क्या कहा है?

20 सितंबर को व्हाइट हाउस ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह एक बार के लिए लागू होने वाली फीस है, जो केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होगी,नवीनीकरण या मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं।

एच-1बी वीजा (H-1B Visa) की 100,000 डॉलर की फीस को लेकर अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने स्पष्टीकरण जारी किया है। इसमें कई छूट और विशेष अपवाद शामिल किए गए हैं।

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जो विदेशी पेशेवर अन्य वीजा श्रेणियों (जैसे एफ-1 छात्र वीजा) से एच-1बी वीजा में स्विच कर रहे हैं, उन्हें यह 100,000 डॉलर की फीस नहीं देनी होगी। इसी तरह, जो आवेदक अमेरिका के भीतर रहकर वीजा संशोधन, स्थिति परिवर्तन या अवधि बढ़ाने का आवेदन कर रहे हैं, वे भी इस शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।

गृह सुरक्षा विभाग ने इसके साथ ही यह भी साफ किया कि मौजूदा एच-1बी वीजा धारकों को अमेरिका आने-जाने में किसी प्रकार की रोक नहीं होगी।

कौन देगा 100,000 डॉलर की फीस

डीएचएस ने कहा कि नया शुल्क केवल उन नए वीजा आवेदनों पर लागू होगा जो अमेरिका के बाहर मौजूद व्यक्तियों के लिए दायर किए गए हैं और जिनके पास वैध एच-1बी वीजा नहीं है। इन आवेदनों के लिए ऑनलाइन भुगतान लिंक भी उपलब्ध कराया गया है।

अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने इससे पहले कहा था कि इन आवेदनों के साथ भुगतान का प्रमाण pay.gov के जरिए जमा करना होगा या किसी स्वीकृत छूट का दस्तावेज़ देना होगा। जो आवेदन बिना प्रमाण के जमा होंगे, उन्हें अस्वीकार कर दिया जाएगा।

यह नियम उन मामलों पर भी लागू है जिनमें वाणिज्य दूतावास या पोर्ट-ऑफ-एंट्री पर सूचना दी जाती है, या पहले से अमेरिका में मौजूद विदेशी नागरिकों के लिए “pre-flight inspection” की मांग की जाती है। हालांकि, वीजा संशोधन, स्थिति परिवर्तन या वैध वीजा धारकों के विस्तार वाले मामलों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।

USCIS ने स्पष्ट किया था कि जो आवेदक पहले से स्वीकृत एच-1बी वीजा धारक हैं, वे यदि उनकी याचिका आज से पहले दायर की गई है, तो बिना नई फीस के यात्रा कर सकते हैं।

ट्रंप प्रशासन पर कानूनी चुनौती

यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब अमेरिका के सबसे बड़े व्यावसायिक संगठन यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने ट्रंप प्रशासन के इस नियम के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।

वॉशिंगटन की जिला अदालत में दाखिल याचिका में कहा गया है कि यदि यह शुल्क लागू हुआ तो यह अमेरिकी व्यवसायों को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और उन्हें या तो श्रम लागत में भारी वृद्धि करनी पड़ेगी या फिर उच्च कुशल विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति घटानी पड़ेगी, जिनका विकल्प घरेलू स्तर पर आसानी से उपलब्ध नहीं है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि 19 सितंबर को जारी ट्रंप का आदेश कानूनी रूप से अवैध है और इससे अमेरिका के आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों को लाभ मिलेगा।

यह मामला ट्रंप प्रशासन के एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों के खिलाफ दायर दूसरा सबसे बड़ा मुकदमा है। इससे पहले 3 अक्टूबर को शिक्षाविदों, धार्मिक संगठनों और श्रमिक यूनियनों के समूह ने भी प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

ट्रंप का क्या कहना है?

सितंबर में आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इस नीति का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। हालांकि, आदेश जारी होने के बाद व्यापक भ्रम की स्थिति बनी रही क्योंकि ऐसा लगा कि यह नियम वर्तमान एच-1बी वीज़ा धारकों को भी प्रभावित कर सकता है।

20 सितंबर को व्हाइट हाउस ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह एक बार के लिए लागू होने वाली फीस है, जो केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होगी,नवीनीकरण या मौजूदा वीजा धारकों पर नहीं।

भारत के पेशेवरों पर सबसे अधिक असर

साल 2024 में जारी कुल स्वीकृत एच-1बी वीजाओं में से 70 प्रतिशत से अधिक भारत में जन्मे पेशेवरों को मिले थे। इसका मुख्य कारण लंबित मामलों की बड़ी संख्या और भारत से आने वाले उच्च कौशल वाले आवेदकों की अधिक भागीदारी रही।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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