दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक (डीजी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने सुरक्षा बलों का बचाव करते हुए कहा कि जवान बिना किसी डर के अपना कर्तव्य निभाते रहें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ड्यूटी के दौरान लिए गए फैसलों और की गई कार्रवाई की जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे।
सीआरपीएफ से जुड़े एक समारोह को संबोधित करते हुए ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार को कहा, ‘सीआरपीएफ के महानिदेशक के रूप में मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि चाहे वह कोई ऑपरेशनल बटालियन हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली इकाई, ड्यूटी के दौरान आपने जो भी फैसले लिए हैं और जो भी कार्रवाई की है, उनकी पूरी जिम्मेदारी मैं लेता हूं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘आप बिना किसी भय के अपना कर्तव्य निभाते रहिए। जहां भी जिम्मेदारी या जवाबदेही तय करने की जरूरत होगी, उसे मैं महानिदेशक के रूप में स्वीकार करूंगा।’
‘चलो संसद’ मार्च के दौरान एक्शन पर विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के विरोध में 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च का आयोजन किया था। इस पेपर लीक विवाद से देशभर में लाखों छात्र प्रभावित हुए थे। यह मार्च उस समय हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर झड़पें हुईं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में 65 से अधिक प्रदर्शनकारी और 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इस दौरान सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर पैलेट के इस्तेमाल की भी खबरें सामने आईं। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद यह मामला बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर क्या सामने आया है?
हाल में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीआरपीएफ द्वारा कराई गई आंतरिक जांच में पाया गया कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के एक जवान ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से सात राउंड फायर किए, जिनमें से पांच पेलेट प्रदर्शनकारियों को लगे।
रिपोर्ट के अनुसार, संसद की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गया था और कम से कम तीन प्रदर्शनकारियों का अस्पतालों में पैलेट गन से लगी चोटों का इलाज किया गया।
वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सीआरपीएफ की घटना के बाद की समीक्षा (पोस्ट-इवेंट रिव्यू) में कहा गया है कि ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और अन्य गैर-घातक (नॉन-लीथल) भीड़ नियंत्रण उपायों के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली पुलिस की अनुमति प्राप्त थी और यह कार्रवाई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत की गई थी।
समीक्षा के अनुसार, सीआरपीएफ की विशेष दंगा-रोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा का जवाब देते समय निर्धारित मानकों का पालन किया। इसमें पहले कम तीव्रता वाले भीड़ नियंत्रण उपाय अपनाए गए और जब उनसे भीड़ नहीं छंटी, तब पंप एक्शन गन से पैलेट राउंड दागे गए।
बताते चलें कि सीजेपी ने पिछले हफ्ते शनिवार को जंतर-मंतर पर चल रहा अपना 36 दिनों का धरना समाप्त कर दिया था। पार्टी ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उसकी कई प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। इन मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना, आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई से सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विचार करने की प्रतिबद्धता शामिल है।
यह भी पढ़ें- राहुल गांधी ने छात्रों के ऊपर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना, अमित शाह को हटाने की मांग दोहराई



