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अमेरिका ने भारतीयों समेत सभी विदेशी नागरिकों के लिए Anthropic Claude Fable 5 & Mythos पर क्यों लगाई पाबंदी?

अमेरिका के इस आदेश के कारण Anthropic को दुनिया भर में इन मॉडल्स को अचानक बंद करना पड़ा। कंपनी के मुताबिक, यह कदम अमेरिकी अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं के कारण उठाया गया है।

अमेरिकी सरकार ने Anthropic को आदेश दिया है कि वह भारतीयों समेत सभी विदेशी नागरिकों के लिए अपने सबसे नए और सबसे शक्तिशाली AI मॉडल, Claude Fable 5 और Mythos 5 का एक्सेस बंद कर दे। इस आदेश के कारण Anthropic को दुनिया भर में इन मॉडल्स को अचानक बंद करना पड़ा। कंपनी के मुताबिक, यह कदम अमेरिकी अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं के कारण उठाया गया है।

Anthropic का कहना है कि उसे जो सबूत दिखाए गए, वे इतनी व्यापक पाबंदी को सही नहीं ठहराते। फिर भी, कंपनी का कहना है कि उसके पास सरकारी आदेश का पालन करने के अलावा कोई चारा नहीं था, जबकि वह एक्सेस को फिर से बहाल करने की कोशिश कर रही है।

Mythos 5 और Fable 5 पर लगी रोक ने दुनिया भर में लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि यह फैसला सरकारों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को रेगुलेट करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। अब तक पाबंदियां ज्यादातर AI सिस्टम बनाने और चलाने में इस्तेमाल होने वाले चिप्स और हार्डवेयर पर ही केंद्रित रही हैं। हालांकि यह पहली बार है जब किसी सरकार ने खुद AI सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर रोक लगाई है।

अमेरिका ने विदेशी नागरिकों के लिए क्यों बंद की सुविधाएं?

एन्थ्रोपिक के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों का मानना ​​है कि Fable 5 में मौजूद सुरक्षा उपायों को बायपास करने या “जेलब्रेक” करने का कोई तरीका हो सकता है। इन सुरक्षा उपायों का मकसद यूजर्स को उस शक्तिशाली साइबर-सिक्योरिटी क्षमता का इस्तेमाल करने से रोकना है जो इसके बेस में मौजूद Mythos मॉडल में है।

अमेरिकी सरकार को चिंता है कि अगर एडवांस्ड AI सिस्टम गलत हाथों में पड़ जाएं तो उनका इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की कमियों का पता लगाने या साइबर-हमले करने में किया जा सकता है।

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक ये चिंताएं अमेजन के रिसर्चर्स की हालिया रिसर्च से भी जुड़ी हैं। बताया जाता है कि रिसर्चर्स ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के मॉडल से कुछ सॉफ्टवेयर कमजोरियों के बारे में जानकारी निकलवाने के लिए कई प्रॉम्प्ट्स का इस्तेमाल किया। इसके बाद इन नतीजों को अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के साथ शेयर किया गया। इसने बाद में इन मॉडल्स तक पहुंच को सीमित करने का आदेश जारी किया।

एंथ्रोपिक का हालांकि कहना है कि यह समस्या सीमित थी और इसमें पहले से ज्ञात कुछ कमियां ही शामिल थीं। कंपनी का तर्क है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अन्य AI मॉडल भी ऐसी कमियों का पता लगा सकते हैं और इस समस्या के कारण पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना सही नहीं है।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारी इससे सहमत नहीं दिखते। उनका मानना ​​है कि शक्तिशाली AI मॉडल का इस्तेमाल साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। खासकर बैंकों, सरकारी सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के खिलाफ। अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा माना है।

एन्थ्रोपिक का कहना है कि सरकार ने सुरक्षा में किसी बड़ी या खतरनाक चूक का कोई सबूत नहीं दिया है। कंपनी के मुताबिक, जिस तथाकथित ‘जेलब्रेक’ की बात की जा रही है, वह बहुत सीमित था और उससे सिर्फ कुछ ऐसी सॉफ्टवेयर कमियों का ही पता लगाया जा सकता था जिनके बारे में पहले से जानकारी थी। एन्थ्रोपिक ने यह भी तर्क दिया कि आम लोगों के लिए उपलब्ध दूसरे AI मॉडल भी बिना किसी बाईपास के ऐसी ही कमियों का पता लगा सकते हैं।

कंपनी ने कहा कि लॉन्च से पहले उसने हफ्तों तक अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, यूके के AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट और स्वतंत्र रिसर्चर्स के साथ Fable 5 की टेस्टिंग की। कंपनी का दावा है कि किसी को भी ऐसा कोई यूनिवर्सल जेलब्रेक नहीं मिला जो मॉडल के सेफ्टी फीचर्स को बड़े पैमाने पर बायपास कर सके।

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एन्थ्रोपिक का कहना है कि उसे लगता है कि कोई “गलतफहमी” हुई है और वह जल्द से जल्द एक्सेस बहाल करने के लिए काम कर रहा है। एन्थ्रोपिक के खिलाफ यह आदेश कंपनी और ट्रंप प्रशासन के कुछ हिस्सों के बीच महीनों से बढ़ते तनाव के बाद आया है।

इस साल की शुरुआत में एन्थ्रोपिक ने अपने AI मॉडल का इस्तेमाल घरेलू निगरानी और पूरी तरह से ऑटोमैटिक हथियार सिस्टम के लिए करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। कहा जाता है कि इसी असहमति की वजह से कई सरकारी एजेंसियों और रक्षा अधिकारियों के साथ बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

भारत समेत पूरी दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

गौरतलब है कि अब तक अमेरिका की पाबंदियां मुख्य रूप से AI चिप्स और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर केंद्रित रही हैं खासकर चीन की एडवांस्ड कंप्यूटिंग पावर तक पहुंच को सीमित करने के लिए। एंथ्रोपिक पर सख्ती करके ऐसा लगता है कि वाशिंगटन ने अपनी रणनीति बदल ली है और सॉफ्टवेयर तक पहुंच को राष्ट्रीय सुरक्षा का एक तत्काल मुद्दा मानने लगा है।

दूसरे शब्दों में अब बात सिर्फ AI को चलाने वाले हार्डवेयर पर कंट्रोल करने तक सीमित नहीं है सरकारें अब सक्रिय रूप से यह तय कर रही हैं कि सबसे शक्तिशाली और अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कौन कर सकता है और कौन नहीं।

यह बात हालांकि चिंता पैदा कर रही है। असल में जोहो (Zoho) के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इन पाबंदियों को भारत के लिए एक बड़ी चेतावनी (wake-up call) बताया है। उन्होंने कहा है कि “ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) खत्म हो चुका है” और देश को तेजी से अपनी खुद की सॉवरेन (स्वतंत्र) AI क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।

वेम्बू के मुताबिक देश अब यह मानकर नहीं चल सकते कि उन्हें हमेशा दुनिया की सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत को विदेशी AI कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय देश में ही AI रिसर्च में ज्यादा निवेश करना चाहिए और ओपन-सोर्स मॉडल का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।

गौरतलब है कि Anthropic ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि उसे 12 जून को अमेरिकी सरकार से एक्सपोर्ट-कंट्रोल का निर्देश मिला है। इस निर्देश में सभी विदेशी नागरिकों के लिए Fable 5 और Mythos 5 का एक्सेस रोकने के लिए कहा गया है। यह पाबंदी उन सभी लोगों पर लागू होती है चाहे वे अमेरिका के अंदर हों या बाहर। इसमें Anthropic के विदेशी नागरिक कर्मचारी भी शामिल हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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