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Amazon ने पहली बार बताया, उसके डेटा सेंटर कितना पानी पीते हैं…दावा- ये दूसरी कंपनियों से ज्यादा किफायती

Amazon ने ये आंकड़े एक ब्लॉग पोस्ट में साझा किए हैं। अमेजन ने अपने ब्लॉग पोस्ट में एक चार्ट भी साझा किया, जिसमें उसने पानी के इस्तेमाल की तुलना प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से की है।

नई दिल्ली: दुनिया भर में डेटा सेंटर को लेकर एक बहस चलती रहती है कि यहां कितना पानी और बिजली खर्च हो रहा है। इस बहस के बीच अमेजन (Amazon) ने यह दावा करते हुए कि उसका डेटा सेंटर दूसरी कंपनियों से कहीं अधिक किफायती है, बताया कि पिछले साल उसने कितना पानी इस्तेमाल किया। कंपनी ने बताया है कि 2025 में उसके ग्लोबल डेटा-सेंटर ऑपरेशन्स में लगभग 2.5 बिलियन गैलन, यानी 9 अरब लीटर से ज्यादा पानी का इस्तेमाल हुआ।

यह पहली बार है जब Amazon ने सार्वजनिक रूप से ऐसा आंकड़ा जारी किया है। सुनने में 9 अरब लीटर बड़ी मात्रा लगती है, लेकिन कंपनी का ये भी दावा है कि जिन साइट्स का वह खुद मालिक है और जिन्हें वो सीधे चलाता है, वहां पानी का इस्तेमाल 2024 के मुकाबले 2 प्रतिशत कम हुआ है। जबकि उसने अपने डेटा-सेंटर का दायरा बढ़ाया है।

Amazon ने ये आंकड़े एक ब्लॉग पोस्ट में साझा किए हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में डेटा-सेंटर चलाने वाली कंपनियां AI के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर बढ़ती चर्चाओं के केंद्र में हैं। इसी बीच अमेरिका के सिएटल शहर ने हाल ही में डेटा सेंटरों पर एक वर्ष के लिए रोक लगाने का फैसला भी किया है। इस कदम के लिए अमेजन के कुछ कर्मचारियों ने भी दबाव बनाया था और इसकी मांग की थी।

Amazon के डेटा सेंटर कम पानी का इस्तेमाल कर रहे?

अमेजन ने अपने ब्लॉग पोस्ट में एक चार्ट भी साझा किया, जिसमें उसने पानी के इस्तेमाल की तुलना प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से की है। इसमें 2021 से 2025 तक के आंकड़े हैं। चार्ट के अनुसार 2025 में अमेजन के डेटा सेंटरों ने प्रति किलोवाट-घंटा (kWh) बिजली खपत पर 0.12 लीटर पानी का इस्तेमाल किया। कंपनी के अनुसार यह आंकड़ा माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और मेटा जैसी कंपनियों की तुलना में सबसे कम है।

हालांकि, ये भी है कि केवल पानी की खपत के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमेजन के डेटा सेंटर इस मामले में ज्यादा बेहतर हैं। जानकारों के अनुसार डेटा सेंटर की दक्षता का आकलन ऊर्जा खपत, कार्बन उत्सर्जन, रिन्यूएबल एनर्सी के इस्तेमाल और सर्वर क्षमता जैसे कई अन्य मानकों के आधार पर भी किया जाता है। अमेजन द्वारा जारी आंकड़े कंपनी के संपूर्ण परिचालन से जुड़े हैं। वहीं, चार्ट में दिखाए गए गूगल के आंकड़े केवल उसके Gemini AI डेटा सेंटरों की पानी की खपत पर आधारित हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो अमेजन का दावा जल उपयोग के मामले में बेहतर प्रदर्शन दिखाता है, लेकिन यह तुलना पूरी तरह समान आधार पर नहीं दिखती है। दरअसल, आमतौर पर AI डेटा सेंटर अधिक पानी की खपत करते हैं, क्योंकि उनमें इस्तेमाल होने वाले उच्च क्षमता वाले GPU को ठंडा रखने के लिए ज्यादा कूलिंग की जरूरत पड़ती है।

अमेजन के दुनिया भर में कितना डेटा सेंटर?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन के जल उपयोग के आंकड़ों में उन नए डेटा सेंटरों के निर्माण में खर्च होने वाला पानी शामिल नहीं है, और न ही उन बिजली संयंत्रों द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी को गिना गया है जो उसके डेटा सेंटरों को बिजली उपलब्ध कराते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेजन के दुनिया भर में करीब 924 डेटा सेंटर हैं। साल 2022 में लीक हुए एक आंतरिक मेमो में अनुमान लगाया गया था कि 2030 तक अमेजन के डेटा सेंटर सालाना 7.7 अरब गैलन पानी की खपत कर सकते हैं। हालांकि, कंपनी ने इन रिपोर्टों पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी।

बता दें कि डेटा सेंटरों को लेकर अब आम लोगों की राय भी लगातार नकारात्मक होती जा रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के एक सर्वे में ये बात सामने आई। यह सर्वे 8 जून को समाप्त हुआ। इसमें पाया गया कि लगभग हर तीन में से एक अमेरिकी डेटा सेंटरों के निर्माण का समर्थन करता है। लेकिन केवल 14 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने घर या इलाके के पास डेटा सेंटर बनाए जाने को लेकर सहज महसूस करेंगे।

डेटा सेंटरों में पानी की खपत

यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी इंस्टट्यूट फॉर वाटर, एनवायरोमेंट एंड हेल्थ का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटरों का वाटर फूटप्रिंट बढ़कर 9.3 ट्रिलियन लीटर तक पहुंच सकता है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इससे सब-सहारा अफ्रीका क्षेत्र (सहारा रेगिस्तान के दक्षिण के इलाके) के लगभग 1.3 अरब निवासियों की एक वर्ष की घरेलू जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है।

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हालांकि, अमेजन का कहना है कि उसके डेटा सेंटरों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला पानी अमेरिकी नागरिकों द्वारा हर साल अपने लॉन और बगीचों में उपयोग किए जाने वाले पानी की तुलना में कहीं कम है। कंपनी के अनुसार, अमेरिका में लोग हर साल अपने लॉन और बगीचों की सिंचाई के लिए लगभग 3.3 ट्रिलियन गैलन पानी का उपयोग करते हैं। अमेजन का दावा है कि यह मात्रा उसके डेटा सेंटरों द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी से 1300 गुना से भी अधिक है।

अमेजन ने ये भी बताया कि उसका लक्ष्य 2030 तक ‘वॉटर पॉजिटिव’ बनना है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने डेटा सेंटरों के प्रत्यक्ष संचालन में जितना पानी इस्तेमाल करेगी, उससे अधिक पानी समुदायों और जल स्रोतों को वापस उपलब्ध कराएगी। कंपनी का दावा है कि वह अब तक इस लक्ष्य का करीब 75 प्रतिशत हासिल कर चुकी है।

कंपनी ने यह भी कहा कि उसके कुछ डेटा सेंटरों में पीने योग्य पानी की बजाय अपशिष्ट जल (ट्रीटेड या रिक्लेम्ड/पुनर्चक्रित वेस्टवाटर) का उपयोग किया जाता है। अमेजन के अनुसार, उसके 26 केंद्र ऐसे हैं जो 100 प्रतिशत पुनर्चक्रित (साफ करके दोबारा उपयोग के लायक) पानी का इस्तेमाल करते हैं, जबकि दुनिया भर में 130 अन्य केंद्रों के लिए भी ऐसी व्यवस्था को लेकर तैयारी की जा चुकी है।

अमेजन का कहना है कि उसके डेटा सेंटरों में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश पानी सर्वरों को ठंडा रखने के लिए होता है। कंपनी के मुताबिक, उसके डेटा सेंटर लगभग 90 प्रतिशत समय बाहरी हवा के जरिए ही कूलिंग करते हैं। पानी आधारित कूलिंग का उपयोग केवल साल के सबसे गर्म दिनों के सबसे गर्म घंटों में किया जाता है।

बताते चलें कि हाल के सालों में डेटा सेंटरों की जल खपत को लेकर पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। कुल मिलाकर AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ डेटा सेंटरों की पानी और ऊर्जा खपत को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर कंपनियां अपनी जल दक्षता और पुनर्चक्रण पहलों को सामने रख रही हैं, तो दूसरी ओर सरकारें, पर्यावरण समूह और स्थानीय समुदाय इन परियोजनाओं से जुड़े संसाधन उपयोग पर अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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