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डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में भारतीय जहाजों पर हुए हमलों के लिए ईरान को ठहराया जिम्मेदार, कहा – बिल्कुल स्वीकार्य नहीं

इस घटना का जिक्र करते हुए ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि “कल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर उनका ड्रोन हमला जिसे पूरी तरह नाकाम कर दिया गया, बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (12 जून) को ईरान पर आरोप लगाया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन से हमला करने की नाकाम कोशिश की। इस घटना का जिक्र करते हुए ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि “कल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर उनका ड्रोन हमला जिसे पूरी तरह नाकाम कर दिया गया, बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह नहीं बताया कि वे किन जहाजों की बात कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों ने इस आरोप पर हालांकि कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

भारत के 3 टैंकर फंसे होने के बीच डोनाल्ड ट्रंप की आई टिप्पणी

डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब इस इलाके में हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों में दर्जनों भारतीय नाविकों वाले 3 तेल टैंकर फंस गए हैं। 8 जून को अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले टैंकर ‘मैरीवेक्स’ को बेकार कर दिया। इस पर 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। उन सभी को सुरक्षित बचा लिया गया।

इसके दो दिन बाद पलाऊ के झंडे वाले एक और टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर अमेरिकी हमला हुआ। इस जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे और हमले में उनमें से तीन की मौत हो गई। गुरुवार (11 जून) को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले एक तीसरे टैंकर ‘जलवीर’ पर भी हमला हुआ। इस पर 20 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे।

बढ़ते खतरों को देखते हुए ओमान के तट के पास भारतीय क्रू मेंबर वाले एक और कमर्शियल जहाज पर हमले के बाद भारत ने इस हफ्ते दूसरी बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया। अमेरिकी राजनयिक को विदेश मंत्रालय (MEA) में एडिशनल सेक्रेटरी (America) ने बुलाया था।

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बीच आई ट्रंप की टिप्पणियां

इससे पहले दिन में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आस-पास के इलाकों में काम कर रहे लगभग 18,000 भारतीय नाविकों के लिए समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एक नई एडवाइजरी जारी की। इसमें जहाजों और उनके क्रू को ज्यादा सतर्क रहने के लिए कहा गया।

ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें बढ़ रही थीं। उसी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने तेहरान पर चल रही बातचीत के बारे में गलत जानकारी लीक करने का आरोप लगाया और कहा कि ईरान के सार्वजनिक बयानों में दोनों पक्षों के बीच तय हुई शर्तों की सही तस्वीर नहीं दिखती है।

यह भी पढ़ें – भारतीय बेडरूम पावर ग्रिड पर कैसे डाल रहे हैं दबाव?

ट्रंप ने लिखा कि “ईरान ने ‘फेक न्यूज’ को जो शर्तें बताई हैं, उनका लिखित रूप में तय हुई शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने संभावित समझौते के बारे में ईरान की टिप्पणियों की भी आलोचना की और कहा कि उनका ” सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है ” और तेहरान पर ईमानदारी से बातचीत न करने का आरोप लगाया।

उन्होंने संभावित समझौते के बारे में ईरान की टिप्पणियों की भी आलोचना की और कहा कि उनका “सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है” और तेहरान पर ईमानदारी से बातचीत न करने का आरोप लगाया।

यूरोप में हो सकती है डील: ट्रंप

ट्रंप के यह कहने के बाद कि इस वीकेंड यूरोप में एक डील साइन हो सकती है। ईरानी मीडिया ने अमेरिका के साथ शांति के लिए प्रस्तावित 14-सूत्रीय फ्रेमवर्क की जानकारी प्रकाशित की थी। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस प्रस्तावित समझौते के ड्राफ्ट में उस तीन महीने पुराने टकराव को खत्म करने के उपाय बताए गए हैं। इसने होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को बाधित किया है।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के हवाले से बताया कि किसी भी अंतिम समझौते को मंजूरी नहीं दी गई है। इस योजना में मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर होने के बाद 60 दिनों की बातचीत की अवधि के दौरान अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील और ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करना शामिल है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हालांकि कहा है कि समझौता होने ही वाला है। ईरानी अधिकारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बातचीत जारी है और अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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