जून और जुलाई की शुरुआत में कमजोर नजर आ रहा दक्षिण-पश्चिम मानसून अब एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, झारखंड और बिहार समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में मानसूनी बारिश की कमी घटकर करीब 14 प्रतिशत रह गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कि मानसून अब इस सीजन के सबसे सक्रिय चरण में प्रवेश कर रहा है और अगस्त के पहले पखवाड़े में इसके और मजबूत होने की संभावना है। इसके पीछे दो बड़ी मौसमी घटनाओं को प्रमुख वजह माना जा रहा है- बंगाल की खाड़ी में बना डीप डिप्रेशन और तिब्बत के पठार के ऊपर बना विशाल मानसूनी सर्कुलेशन। इन दोनों प्रणालियों के साथ सक्रिय मानसूनी ट्रफ और मजबूत सोमाली जेट मिलकर देश के बड़े हिस्से में व्यापक और तेज बारिश की परिस्थितियां बना रहे हैं।
बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन क्या है?
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे मजबूत होकर गहरे अवदाब (डीप डिप्रेशन) में बदल गया है। यह चक्रवात बनने से पहले की स्थिति होती है। यह प्रणाली पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तट को पार करने के बाद अब देश के भीतर उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रही है।
आसान भाषा में समझें तो यह समुद्र से नमी सोखने वाले एक बड़े स्पंज की तरह काम करती है। यह बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी लेकर देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच रही है। मौसम विभाग के अनुसार, जैसे-जैसे यह प्रणाली आगे बढ़ेगी, इसका असर भी व्यापक होता जाएगा और कई राज्यों में बारिश की तीव्रता बढ़ेगी।
तिब्बत के पठार पर विशाल मानसूनी सर्कुलेशन
इसी हफ्ते की शुरुआत में जारी सैटेलाइट तस्वीरों में तिब्बत के पठार के ऊपर एक विशाल मानसूनी सर्कुलेशन देखा गया। यह सीधे बारिश नहीं करवाता, बल्कि मानसूनी हवाओं को उत्तर की ओर खींचने का काम करता है।
इसे एक बड़े पंखे की तरह समझिए। यह हवा को ऊपर उठने में मदद करता है, जिससे नमी से भरी मानसूनी हवाएं तेजी से ऊपर जाती हैं और बादल जल्दी बनने लगते हैं। नतीजे ये होता है कि बारिश की गतिविधियां तेज हो जाती हैं।
दोनों प्रणालियां साथ आईं तो बढ़ गई बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मौजूदा स्थिति में बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन नीचे से लगातार नमी उपलब्ध करा रहा है, जबकि तिब्बत के पठार पर बना मानसूनी सर्कुलेशन ऊपर की ओर हवा के प्रवाह को मजबूत कर रहा है।
यानी एक प्रणाली नीचे से नमी पहुंचा रही है और दूसरी ऊपर की ओर हवा को खींच रही है। जब ये दोनों प्रक्रियाएं एक साथ सक्रिय हैं तो नमी वाली हवा तेजी से ऊपर उठ रही है, घने बादल बन रहे हैं और बारिश हो रही है।
मानसूनी ट्रफ और सोमाली जेट ने भी बढ़ाई मानसून की ताकत
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा समय में मानसूनी ट्रफ भी सक्रिय है। मानसूनी ट्रफ उसी कम दबाव वाली लंबी पट्टी को कहते हैं, जो मानसून सीजन में उत्तर भारत में पश्चिम से पूर्व तक फैली रहती है। इसके दोनों ओर की हवाएं आकर मिलती हैं। जब ये हवाएं आपस में मिलती हैं तो वे ऊपर उठती हैं, बादल बनते हैं और बारिश होती है। इसके साथ ही डीप डिप्रेशन महाराष्ट्र की ओर बढ़ते हुए अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से बड़ी मात्रा में नमी खींच रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया को सोमाली जेट भी मजबूती दे रही है। सोमाली जेट दरअसल अरब सागर के ऊपर बहने वाली तेज निचले स्तर की हवाओं की धारा है, जो अरब सागर से नमी लेकर भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचाती है। यह पूर्वी अफ्रीका के सोमालिया के तट से शुरू होकर भारत की ओर बढ़ती है। इसी वजह से इसे सोमाली जेट कहा जाता है। डीप डिप्रेशन के बाद सक्रिय मानसूनी ट्रफ और मजबूत सोमाली जेट की वजह से मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से में व्यापक और तेज बारिश की परिस्थितियां बन गई हैं।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर?
पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में भारी बारिश हो चुकी है। वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पिछले सप्ताह के दौरान बारिश में बड़ा सुधार दर्ज किया गया है।
आईएमडी के अनुसार, पूर्वी भारत में शुरू हुआ बारिश का दायरा धीरे-धीरे उत्तर और पश्चिम भारत तक फैल रहा है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
आईएमडी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देशभर में मानसूनी बारिश की कमी अब घटकर करीब 14 प्रतिशत रह गई है। मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में अब मौसमी बारिश सामान्य के करीब पहुंच चुकी है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है।
अगस्त के पहले 15 दिन बेहद अहम
यदि मौजूदा बारिश और मौसमी परिस्थितियों का रुझान अगले कुछ सप्ताह तक जारी रहता है तो कई मामलों में यह बड़ी राहत होगी। इससे जलाशयों में जल भंडारण बढ़ेगा, खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा और कृषि उत्पादन को लेकर बनी चिंताओं में भी कमी आ सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त का पहला पखवाड़ा इस लिहाज से बेहद अहम रहेगा। इसी दौरान यह तय होगा कि जून और जुलाई की शुरुआत में हुई बारिश की कमी की भरपाई किस हद तक हो पाती है। वहीं, मौसम विभाग ने निचले इलाकों और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है, क्योंकि लगातार बारिश के कारण जलभराव, स्थानीय बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

