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कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन, जिनकी अपील पर इमिग्रेशन के खिलाफ लंदन की सड़कों पर उतरे लाखों लोग?

टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन यक्सले-लेन्नन है, एक ब्रिटिश धुर-दक्षिणपंथी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा अदालतों और जेलों में बिताया है।

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लंदन: नेपाल में जेन जी प्रोटेस्ट की तरह ही शनिवार ब्रिटेन की सड़कों पर बड़ा जनसैलाब देखा गया। यहां इमिग्रेशन के खिलाफ धुर-दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन की अपील पर शनिवार सेंट्रल लंदन में ‘यूनाइट द किंगडम’ रैली में 1 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए जो हाल के वर्षों में ब्रिटेन में हुई सबसे बड़ी दक्षिणपंथी रैलियों में गिना गया। आयोजकों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन का आंदोलन बताया।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में लकड़ी के क्रॉस, सेंट जॉर्ज के झंडे और यूनियन जैक थे। भीड़ जहां रॉबिन्सन के पक्ष में नारे लगा रही थी, वहीं लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर के खिलाफ गालियाँ भी दी जा रही थीं। पुलिस के अनुसार, रॉबिन्सन समर्थकों और स्टैंड अप टू रेसिज्म नामक संगठन के लगभग 5,000 लोगों की काउंटर-प्रोटेस्ट के बीच झड़पें हुईं।

पुलिस ने बताया कि लगभग 1,000 अधिकारी दोनों पक्षों, रॉबिन्सन समर्थकों और करीब 5,000 लोगों की ‘स्टैंड अप टू रेसिज़्म’ की काउंटर-प्रोटेस्ट को अलग रखने के लिए तैनात किए गए थे। इसके बावजूद झड़पें हुईं। पुलिस ने बताया कि 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, क्योंकि अधिकारियों को भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान लातों-घूसों का सामना करना पड़ा।

रॉबिन्सन ने इस रैली को देश का सबसे बड़ा फ्री स्पीच फेस्टिवल बताया। उन्होंने ने इस दौरान भीड़ से कहा, मौन बहुमत अब और चुप नहीं रहेगा। आज एक सांस्कृतिक क्रांति की चिंगारी है।

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने वेस्टमिंस्टर ब्रिज को पार किया और फिर डाउनिंग स्ट्रीट के पास इकट्ठा हुए, जहाँ उन्होंने यूरोप और उत्तरी अमेरिका के धुर-दक्षिणपंथी नेताओं के भाषण सुने। इनमें फ्रांस के राजनेता एरिक जेम्मूर और जर्मनी के एएफडी से पेट्र बायस्ट्रॉन शामिल थे।

इस रैली में एलोन मस्क भी वीडियो-लिंक के माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “चाहे आप हिंसा चुनें या नहीं, हिंसा आपके पास आ रही है। या तो आप लड़ें या मरें।”

पुलिस के अनुसार, रैली में 1 लाख 10 हजार लोग आए थे, जबकि “स्टैंड अप टू रेसिज्म” द्वारा आयोजित एक जवाबी विरोध प्रदर्शन में लगभग 5,000 लोग शामिल हुए। दोनों समूहों को अलग रखने के लिए लगभग 1,000 पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया था। लेकिन, जब अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

‘हमें हमारा देश वापस चाहिए’

यह प्रदर्शन बढ़ती हुई अप्रवासन विरोधी भावनाओं के बीच हुआ है, जहाँ नाइजेल फराज की रिफॉर्म यूके पार्टी चुनावों में आगे बढ़ रही है।

एएफपी से बात करते हुए 28 वर्षीय रिची ने रिकॉर्ड-स्तर के प्रवासन का जिक्र करते हुए कहा, “यह एक आक्रमण है। वे नहीं समझते कि हम अपना देश वापस चाहते हैं।”

शेफील्ड के एक सेवानिवृत्त बेकर फिलिप डॉज ने कहा कि रोज अखबारों में आप ऐसी बातें पढ़ते हैं और हैरान रह जाते हैं – लोगों को इसलिए गिरफ्तार किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अप्रवासन या लैंगिक मुद्दों के बारे में बात करने की हिम्मत की। मैं बहुत चिंतित हूँ। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस देश में ऐसा देखूंगा।

एंटी इमिग्रेशन प्रदर्शन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

रॉबिन्सन के नेतृत्व में एक तरफ जहां इमिग्रेशन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा था, वहीं इसके खिलाफ स्टैंड अप टू रेसिज्म की ओर से जवाबी विरोध मार्च भी निकाला गया। इसका नेतृत्व लेबर सांसद डायने एबट कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रॉबिन्सन और उनके समर्थक बकवास और खतरनाक झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने स्काई न्यूज से कहा, हमें शरण चाहने वालों के साथ एकजुटता दिखानी चाहिए, और हमें यह दिखाना चाहिए कि हम एकजुट हैं।

पुलिस ने बताया कि पुलिस अधिकारियों को लातों और घूसों का सामना करना पड़ा और उन पर बोतलें, फ्लेयर्स और अन्य चीज़ें फेंकी गईं। रॉबिन्सन के समर्थकों को जवाबी प्रदर्शनकारियों से अलग करने वाली बाधाओं को तोड़ने के प्रयास भी किए गए, जिसके बाद यह हिंसा भड़की।

कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन?

टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन यक्सले-लेन्नन है, एक ब्रिटिश धुर-दक्षिणपंथी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा अदालतों और जेलों में बिताया है।

41 वर्षीय रॉबिन्सन ने अपनी पहचान गुस्से और टकराव की राजनीति पर बनाई है। वह इस्लाम, इमिग्रेशन, मुख्यधारा मीडिया और पुलिस के खिलाफ खुलकर बयान देते रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि समर्थकों से मिली दान राशि का बड़ा हिस्सा उन्होंने शराब, पार्टियों और जुए में उड़ा दिया।

साल 2009 में रॉबिन्सन ने इंग्लिश डिफेंस लीग (EDL) की स्थापना की, जो एक सड़क आंदोलन था और अक्सर हिंसा से जुड़ा रहता था। हालांकि 2013 में उन्होंने इसे ज्यादा चरपंथी होने की बात कहते हुए समूह के नेता का पद छोड़ दिया।लेकिन वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता और ऑनलाइन प्रचारक के रूप में काम करते रहे।

रॉबिन्सन का आपराधिक रिकॉर्ड भी काफी लंबा रहा है। जिसमें हिंसा, अदालत की अवमानना और गिरवी धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। 2018 में, उन्हें एक मुकदमे के बाहर लाइवस्ट्रीमिंग करने के लिए जेल हुई थी। हाल ही (2024) में उन्हें एक सीरियाई शरणार्थी के बारे में झूठे दावे दोहराने के लिए अदालत के आदेश का उल्लंघन करने पर 18 महीने की सजा सुनाई गई थी।

रॉबिन्सन आर्थिक समस्याओं से भी जूझते रहे। 2021 में उन्होंने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। रॉबिन्सन ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने समर्थकों से हजारों पाउंड का दान लेने के बावजूद बड़ी रकम जुए में गँवा दी थी। हालांकि इन सबके बावजदू रॉबिन्सन का प्रभाव कम नहीं हुआ।

साल 2018 में ट्विटर से प्रतिबंधित होने के बाद, एलन मस्क के कार्यकाल में उनकी वापसी हुई और अब एक्स पर उनके 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनके समर्थक उन्हें देशभक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रक्षक के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचकों का तर्क है कि वह एक खतरनाक व्यक्ति हैं जो समाज में विभाजन और नफरत फैलाते हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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