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कौन है ड्रग किंगपिन सलीम डोला जिसे भारत लाया गया?, दाऊद के ‘नार्को-नेटवर्क’ पर सबसे बड़ी चोट!

मुंबई के डोंगरी का निवासी सलीम डोला तीन दशकों से अधिक समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। उसने नार्कोटिक्स के कारोबार में दाऊद के पुराने सहयोगी इकबाल मिर्ची की जगह ली थी।

नई दिल्लीः भारत के मोस्ट वॉन्टेड भगोड़े अपराधी दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी और कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्कर सलीम डोला को तुर्की से डिपोर्ट कर मंगलवार तड़के भारत लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद 59 साल के डोला को सीबीआई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीमों ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

सलीम डोला पिछले कई वर्षों से अपनी पहचान बदलकर इस्तांबुल के बेयलिकडुजु (Beylikduzu) जिले में एक रिहायशी इलाके में छिपा हुआ था। भारतीय एजेंसियों से मिले खुफिया इनपुट के आधार पर तुर्की की नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन और इस्तांबुल पुलिस के नार्कोटिक्स डिवीजन ने 25 अप्रैल (शनिवार) को एक बड़ा ऑपरेशन चलाया।

डोला की सही लोकेशन की पुष्टि के लिए तुर्की अधिकारियों ने कई दिनों तक तकनीकी और शारीरिक निगरानी की, जिसके बाद उसे उसके ठिकाने से गिरफ्तार किया गया। इंटरपोल ने सीबीआई के अनुरोध पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। मुंबई पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) दोनों एजेंसियां लंबे समय से उसे कई मामलों में तलाश रही थीं।

कौन है सलीम डोला, कैसे जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आया ?

मुंबई के डोंगरी का निवासी सलीम डोला तीन दशकों से अधिक समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। उसने नार्कोटिक्स के कारोबार में दाऊद के पुराने सहयोगी इकबाल मिर्ची की जगह ली थी। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, सलीम डोला पहली बार 28 जुलाई 1998 को मुंबई के सहारा एयरपोर्ट पर 40 किलो मंड्रेक्स टैबलेट्स की तस्करी करते हुए पकड़ा गया था। उस समय उसके पास भारी मात्रा में नशीला पदार्थ मिला था।

इसके बाद 2017 में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने उसे एक मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें गुजरात के पिपावाव बंदरगाह और दिल्ली के गोदाम से करीब एक लाख गुटखा पाउच बरामद किए गए थे। इनकी कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी और इन्हें समुद्री रास्ते से कुवैत भेजने की तैयारी थी।

एजेंसियों के मुताबिक, सलीम डोला वर्ष 2018 के आसपास जमानत पर छूटने के बाद भारत से फरार हो गया था। इसके बाद वह संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की से अपने नेटवर्क का संचालन कर रहा था। डोला केवल ड्रग्स की सप्लाई नहीं करता, बल्कि वह महाराष्ट्र और गुजरात के विभिन्न राज्यों में गुप्त लैब चलाता था, जहां ‘मेफेड्रोन’ यानी एमडी का उत्पादन किया जाता था।

हाल ही में 2024 के एक मामले में मुंबई पुलिस ने 126 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त की थी। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने कुबूल किया था कि उन्हें सीधे तुर्की और दुबई में बैठे सलीम डोला से निर्देश मिल रहे थे। इसके अलावा, उस पर 1,000 करोड़ मूल्य की ‘फेंटानिल’ की जब्ती और कई अंतरराज्यीय नार्को-ऑपरेशन्स से जुड़े होने के आरोप हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष डोला के बेटे ताहिर सलीम डोला और भतीजे मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला को भी यूएई से भारत लाया गया था। अधिकारियों का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से डोला का नेटवर्क पहले ही कमजोर पड़ चुका था।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में शुरुआती पूछताछ के बाद सलीम डोला को महाराष्ट्र या गुजरात की जांच एजेंसियों को सौंपा जा सकता है, जहां उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। एनसीबी और अन्य एजेंसियां अब उससे पूछताछ कर पूरे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क, भारत में सक्रिय साथियों, वित्तीय लेनदेन और डी-कंपनी से जुड़े संभावित संबंधों की जानकारी जुटाने की कोशिश में जुटी है।

अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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