
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले से जब बंगाल के सुदूर इलाकों की यात्रा कर रहा था तो राज्य सरकार की जिस एक योजना की चर्चा हर एक की जुबान पर थी, वह थी ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षी ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना। अब जब ममता बनर्जी सत्ता गंवा चुकीं हैं तो भी इस योजना की खूब चर्चा हो रही है।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से महिलाओं के मन में यह सवाल बार बार उठ रहा था कि क्या नई सरकार लक्ष्मी भंडार योजना में कोई फेरबदल करेगी या फिर बंद ही कर देगी ? शायद पश्चिम बंगाल की नई सरकार राज्य की महिलाओं के मन की बात सुन ली है क्योंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नयी भाजपा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की महिलाओं को आर्थिक मदद देने वाली फ्लैगशिप योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ न केवल जारी रहेगी, बल्कि इसे नये कलेवर और बढ़ी हुई राशि के साथ लागू किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा का मानना है कि जनहित की योजनाओं का नाम बदल सकता है, लेकिन लोगों को मिलने वाले लाभ बंद नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि इस बार के चुनाव में महिला वोट बैंक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2026 के बंगाल चुनाव में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया है। इन सबकी निगाहें अब नई सरकार पर है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि लक्ष्मी भंडार के जरिये राज्य की करोड़ों महिलाएं सीधे तौर पर लाभान्वित हो रही हैं और भारतीय जनता पार्टी महिला वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहेगी।
जिस तरह ममता बनर्जी ‘लक्ष्मी भंडार’ के जरिए महिला वोट बैंक में अपनी पैठ बनाए हुए थी, ठीक उसी तरह भारतीय जनता पार्टी भी अपनी एक महत्वाकांक्षी योजना के जरिए राज्य की महिलाओं को लाभ देने जा रही है। भाजपा की भी निगाह महिला वोट बैंक पर है। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में ‘अन्नपूर्णा भंडार’ का वादा किया था। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लक्ष्मी भंडार को इसी योजना में मिला दिया जाएगा, जिसमें आर्थिक सहायता की राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपए तक किया जा सकता है।
ब्रांड के लिहाज से काम करने वाली भाजपा चाहती है कि इस योजना को भी ‘मोदी की गारंटी’ की-वर्ड से जोड़कर रखा जाए। भाजपा हमेशा से डबल इंजन शब्द का इस्तेमाल करती है और इसी रास्ते पर चलकर वह कई राज्यों में सत्ता तक पहुंच रही है।
लक्ष्मी भंडार योजना को लेकर बंगाल की नई सरकार की रणनीति अपने पूर्ववर्ती सरकार से अलग है। नयी सरकार का आरोप रहा है कि पिछली सरकार में इन योजनाओं में लीकेज थी। अब इसे सीधे डीबीटी (DBT) के जरिये और भी पारदर्शी बनाया जायेगा, ताकि बिचौलिये खत्म हो सकें।
मुख्यमंत्री शुभेंदू अधिकारी लक्ष्मी भंडार के लाभार्थियों को केंद्र की ‘आयुष्मान भारत’ योजना से जोड़ना चाहते हैं ताकि महिलाओं को नकद राशि के साथ-साथ मुफ्त इलाज की सुविधा भी मिले। शुभेंदू अधिकारी ने बातचीत में बताया कि उनकी सरकार किसी भी लोक-कल्याणकारी कार्य को बाधित नहीं करेगी, बल्कि उसे केंद्र की योजनाओं के साथ जोड़कर और अधिक प्रभावी व लोककल्याणकारी बनायेगी।
विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस लगातार प्रचार कर रही थी कि यदि भाजपा सत्ता में आएगी तो लक्ष्मी भंडार बंद कर देगी। ऐसे में शुभेंदू अधिकारी के इस कदम को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी ने लंबी चुप्पी साध ली है।
राज्य की नई सरकार और योजनाओं की चर्चा के बीच गुरुवार को बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक नए अवतार में दिखी। ममता बनर्जी बृहस्पतिवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में तृणमूल कार्यकर्ताओं की पैरवी करने पहुंची थीं। वहां उन्होंने बाकायदा काला गाउन पहनकर बहस की।
हालांकि ममता बनर्जी के गाउन में कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश होने के मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
बीसीआई जांच कर रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने अपने लाइसेंस को रिन्यू करने के लिए बार काउंसिल में आवेदन किया था? क्या उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए भी अपना पंजीकरण सक्रिय रखा था? यह बार काउंसिल के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनके पास सक्रिय लाइसेंस नहीं था, तो कानूनी पोशाक (Legal Attire) पहनकर कोर्ट में जिरह करना उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल सकता है।
ममता बनर्जी को भविष्य में वकालत करने से रोका जा सकता है। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को शनिवार तक अपनी रिपोर्ट दिल्ली भेजनी होगी। यदि रिपोर्ट में नियमों की अनदेखी पायी गयी, तो ममता बनर्जी को भविष्य में वकालत करने से रोका भी जा सकता है। फिलहाल, सबकी नजरें बार काउंसिल के अगले कदम पर टिकी हैं। बार काउंसिल ने पूछा कि क्या ममता का लाइसेंस सक्रिय है? बीसीआई ने पूछा है कि क्या ममता बनर्जी का वकालत का लाइसेंस सक्रिय है? क्या मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने नियमों का पालन किया था? इस रिपोर्ट के आने के बाद ममता बनर्जी की ‘प्रोफेशनल’ वकालत की स्थिति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव श्रीरामंतो सेन की ओर से जारी पत्र में कई गंभीर सवाल उठाये गये हैं। बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के सचिव को निर्देश दिया है कि 2 दिन के भीतर ममता बनर्जी के पंजीकरण (Registration) से जुड़ी पूरी जानकारी भेजी जाए। बार काउंसिल जानना चाहता है कि 2011 से 2026 तक, जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर थीं, तब उनके वकालत के लाइसेंस की स्थिति क्या थी।
गौरतलब है कि नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर कार्यरत होता है या किसी अन्य लाभकारी पद पर रहता है, तो उसे वकालत का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित करना होता है। सेवा समाप्त होने के बाद ही इसे पुनः सक्रिय किया जा सकता है। इसी संदर्भ में बीसीआई ने यह जांच शुरू की है कि क्या सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।


