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कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद पर रोक लगाने वाला आदेश रद्द, SC का हाईकोर्ट को फिर से विचार करने का निर्देश

दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी।

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kuldeep singh senger
उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को मिली राहत रद्द की। IANS

Unnao rape case: उन्नाव रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को बड़ा झटका लगा है। सेंगर को राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट को सेंगर की सजा पर रोक लगाने वाली याचिका पर नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में कई ऐसे कानूनी और तथ्यात्मक पहलू हैं, जिन पर दोबारा गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा है कि वह गर्मी की छुट्टियों से पहले सेंगर की सजा पर रोक लगाने की अर्जी पर फिर सुनवाई करे और उनकी दोषसिद्धि तथा उम्रकैद के खिलाफ दाखिल अपील पर दो महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रयास करे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के मेरिट पर कोई राय नहीं दी है और हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से नया फैसला ले सकता है।

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मामला और हाईकोर्ट का फैसला

दरअसल, दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेंगर को पॉक्सो एक्ट की धारा 5(सी) के तहत दोषी ठहराया गया था, जो किसी “लोक सेवक” द्वारा किए गए गंभीर यौन अपराध से जुड़ी है, लेकिन निर्वाचित विधायक भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत “पब्लिक सर्वेंट” की परिभाषा में आते हैं या नहीं, इस पर कानूनी सवाल मौजूद है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि सेंगर सात साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं, इसलिए अपील लंबित रहने के दौरान उनकी सजा पर रोक लगाई जा सकती है। इस फैसले के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। पीड़िता, उसके परिवार और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने आदेश का विरोध किया था।

सीबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने 29 दिसंबर 2025 को ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और निर्देश दिया था कि सेंगर को जेल से रिहा न किया जाए।

कुलदीप सेंगर को साल 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना था। पीड़िता और उसके परिवार ने सेंगर तथा उनके सहयोगियों पर धमकाने, उत्पीड़न और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे।

सेंगर पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े अलग मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं। जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उस मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने की दूसरी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि सेंगर का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है और राहत देने के लिए कोई नया आधार सामने नहीं आया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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