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भाजपा में शामिल हुए राघव चड्ढा, राज्य सभा में AAP के 10 में 7 सांसद टूटे…ये संख्या क्यों है अहम?

आप के 10 में से 7 राज्य सभा सांसदों का एक साथ भाजपा में शामिल होना, यह संख्या अपने आप में खास है। दरअसल यह संविधान के दल-बदल विरोधी कानून के विशेष प्रावधानों से जुड़ा है।

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Raghav Chaddha
फोटो- IANS

नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए। चड्ढा के साथ संदीप सिंह और अशोक मित्तल भी विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा दफ्तर पहुंचे, जहां पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इससे पहले चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया उन्हें मिलाकर ‘आप’ के 7 राज्य सभा सांसद भाजपा में विलय कर रहे हैं।

10 में से 7 सांसदों का एक साथ भाजपा में शामिल होना, यह संख्या अपने आप में खास है। दरअसल यह संविधान के विशिष्ट प्रावधानों से जुड़ा है। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘आप’ से अलग होने का ऐलान करते हुए कहा, ‘हमने निर्णय लिया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के हम दो-तिहाई सदस्य भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए भाजपा में विलय करेंगे।’

राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में ‘आप’ के 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से ज्यादा सांसद इस मुहिम में हमारे साथ हैं। उन्होंने पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं, और आज सुबह हमने सभी जरूरी दस्तावेज, जिनमें हस्ताक्षरित पत्र और अन्य औपचारिक कागजात शामिल हैं, राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए हैं। जैसा कि मैंने बताया, दो-तिहाई से ज्यादा सांसद हमारा समर्थन कर रहे हैं और हम जल्द ही आपको पूरी सूची उपलब्ध करा देंगे। उनमें से तीन सांसद अभी आपके सामने यहां मौजूद हैं।

दो-तिहाई सांसदों का विलय…क्या है इसका मतलब?

नियमों के अनुसार सदन में किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय के लिए सहमत होते हैं, तो इसे वैध विलय माना जाता है। ऐसे मामलों में दल-बदल विरोधी कानून के तहत सदस्यों को अयोग्य घोषित नहीं किया जाता है और सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है। अभी राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसद हैं। अगर विलय करने वाले या दूसरे पार्टी में जाने वाले सांसदों की संख्या 7 से कम रहती तो विलय चाहने वालों को अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़नी पड़ती।

हालांकि, अब चूकी आप नेता चड्ढा के साथ स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी भी हैं, तो सदस्यता खत्म होने का खतरा खत्म हो गया है।

संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दल-बदल रोधी कानून का उद्देश्य सांसदों को निर्वाचित होने के बाद दल-बदल करने से रोकना और संसद में स्थिरता बनाए रखना है। यह कानून किसी सदस्य द्वारा स्वेच्छा से पार्टी सदस्यता छोड़ने या पार्टी व्हिप के विरुद्ध वोट करने पर अयोग्यता का प्रावधान देता है। राज्यसभा में, अयोग्यता का निर्णय अध्यक्ष द्वारा किसी अन्य सदस्य की याचिका के आधार पर लिया जाता है।

यह भी पढ़ें- ‘आप’ में बड़ी टूट, भाजपा में शामिल होंगे राघव चड्ढा; कहा- राज्य सभा के 7 सांसद बीजेपी में करेंगे विलय

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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