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पश्चिम बंगाल: चुनाव ड्यूटी में तैनात 65 अफसरों के SIR में नाम कटने पर याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के नाम SIR से हटाए जाने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है।

supreme court to election officers whose name deleted during sir move to appellate tribunals, सुप्रीम कोर्ट
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

कोलकाताः चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में अजब-गजब मामला सामने आया है। यहां चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के नाम मतदाता सूची से बाहर थे। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए गए लगभग 65 चुनाव ड्यूटी अधिकारियों की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया।

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और विपुल पंचोली की पीठ इसकी सुनवाई कर रही थी।

अधिकारियों के नाम कटे, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर शम्साद ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसे कई अधिकारियों के नाम बिना किसी कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।

उन्होंने कहा “ये 65 याचिकाकर्ता चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं। उनके ड्यूटी आदेशों में ईपीआईसी नंबरों का उल्लेख है। अब वे नंबर हटा दिए गए हैं। अब चुनाव कराने वाले लोग वोट नहीं दे सकते! यह स्पष्ट रूप से मनमाना है। कई मामलों में कारण नहीं बताए गए हैं।”

अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ताओं से कहा कि मतदाताओं के नाम हटाने के संबंध में वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अपीलीय न्यायाधिकरणों (अपीलेट ट्रिब्यूनल्स) में जाएं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि “इन दलीलों को अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष रखें। न्यायाधिकरण को इस पर विचार करने दें।”

जस्टिस बागची ने स्वीकार किया कि जिन लोगों की अपील लंबित है वे वोट नहीं कर पाएंगे। हालांकि वे लोग अपीलों पर जोर दे सकते हैं जिससे मतदाता सूची में उनके नाम बहाल हो जाएं। जस्टिस बागची ने कहा “अदालत द्वारा उचित आदेश पारित किए जाएंगे… इस चुनाव में शायद वे मतदान न कर पाएं। मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने का अधिक महत्वपूर्ण अधिकार सुरक्षित रखा जाएगा।”

SIR को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं लंबित

गौरतलब है कि एसआईआर को चुनौती देने वाली विभिन्न राज्यों की कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसको लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब बड़े पैमाने पर वोट काटे गए।

पश्चिम बंगाल के संदर्भ में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच मतभेदों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की कार्यवाही पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को सौंपी थी।

ईसीआई और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच विश्वास की कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को एसआईआर के सुचारू संचालन के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों सहित जिला न्यायाधीशों और अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों की तैनाती का आदेश दिया था।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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