कोलकाताः पश्चिम बंगाल के पहले चरण के लिए गुरुवार (23 अप्रैल) को वोटिंग हुई। इस दौरान राज्य की 294 सीटों में से 152 सीटों पर मतदान हुआ। हालांकि, इस बीच कुछ इलाकों से छिटपुट हिंसा की भी खबरें आईं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के कार्यकर्ताओं में आपस में झड़प हुई।
मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) और तृणमूल समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। वहीं दक्षिण दिनाजपुर जिले में भाजपा के एक उम्मीदवार पर कथित तौर पर हमला किया गया। छिटपुट घटनाओं के बावजूद मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें दिखाई दे रही थीं। राज्य में शाम 5 बजे तक लगभग 36 लाख मतदाताओं में से 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु में बंपर मतदान
इसी बीच तमिलनाडु में स्थिर मतदान हुआ। यहां शाम 5 बजे तक लगभग 5.67 करोड़ पात्र मतदाताओं में से 82.24 प्रतिशत मतदान हुआ। यह एक चरण के चुनाव में मजबूत भागीदारी को दर्शाता है, जिसमें सत्तारूढ़ डीएमके, एआईएडीएमके-भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और अभिनेता विजय की टीवीके के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था।
मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर की एजेयूपी और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। इसके चलते पुलिस और केंद्रीय बलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। हिंसा के दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई। कबीर को भी टीएमसी समर्थकों के विरोध और “वापस जाओ” के नारों का सामना करना पड़ा, जब वे मतदान करने पहुंचे तो प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को कुछ देर के लिए घेर लिया।
कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने कथित तौर पर हमला किया। जब उन्होंने मतदान केंद्र पर भीड़भाड़ का आरोप लगाते हुए वहां पहुंचने की कोशिश की। एक अन्य मतदान केंद्र पर ईवीएम पर भाजपा के कमल चिह्न पर स्याही पोत दी गई जिससे मतदान प्रक्रिया कुछ समय के लिए बाधित हुई। अधिकारियों द्वारा चिह्न साफ किए जाने के बाद मतदान पुनः शुरू हुआ। पूर्वी मेदिनीपुर में तनाव तब बढ़ गया जब भाजपा समर्थकों ने तृणमूल उम्मीदवार के खिलाफ नारे लगाए। इससे झड़पें हुईं और मतदाताओं में दहशत फैल गई।
भाजपा-टीएमसी के बीच टकराव
बंगाल में मुकाबला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा के बीच सीधा और तीव्र है। भाजपा ने आक्रामक राष्ट्रवादी अभियान चलाया है। इसमें हिंदुत्व के संदेश के साथ-साथ भ्रष्टाचार, बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ और शासन की विफलताओं के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि राज्य में विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा पर हमला करने के बाद टीएमसी को बढ़त हासिल है। उसने भाजपा पर भारतीय चुनाव आयोग के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया और यहां तक कि इस मामले को अदालतों तक ले गई। बंगाल की मतदाता सूची से 91 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए और दो चरणों के चुनावों से पहले लगभग 62 लाख मतदाताओं का भविष्य अनिश्चित है।

