नई दिल्ली: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला बुधवार रात (स्थानीय समय) दो बेहद शक्तिशाली भूकंपों से दहल उठा। महज कुछ सेकेंड के अंतराल पर आए इन दोनों भूकंपों ने राजधानी कराकास समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है और मलबे में बड़ी संख्या में लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। भूकंप के बाद कैरेबियाई क्षेत्र के कई हिस्सों के लिए सुनामी अलर्ट भी जारी किया गया।
हालात को देखते हुए वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपातकाल की घोषणा की है। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने सरकारी टीवी पर अपने संबोधन में लोगों को बताया कि ट्रेन और मेट्रो सेवाएं फिलहाल बंद रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सप्ताह के बाकी दिनों के लिए कक्षाएं भी स्थगित रहेंगी। काराकास के बाहरी इलाके में स्थित माइकेटा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी छत का कुछ हिस्सा गिरने के बाद बंद कर दिया गया है।
वहीं, एएफपी समाचार एजेंसी ने राष्ट्रपति कार्यालय के हवाले से बताया है कि बुधवार को आए शुरुआती भूकंपों के बाद से वेनेजुएला में 20 से ज्यादा झटके (आफ्टरशॉक) महसूस किए गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके देश के उत्तरी तट पर हैं, जिनमें ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कॉन शामिल हैं। ब्राजील में भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की खबरें आई है।
कुछ सेकेंड में दो तेज भूकंप
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, पहला भूकंप 7.1 की तीव्रता का था, जिसका केंद्र वेनेजुएला के कैरेबियाई तट पर स्थित तटीय शहर मोरोन (Moron) के पास था। यह कराकास से लगभग 168 किलोमीटर पश्चिम में आया। इसकी गहराई जमीन से करीब 13 किलोमीटर अंदर थी।
पहले झटके कुछ ही सेकेंड बाद उसी क्षेत्र में 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। इसका केंद्र मोरोन से लगभग 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था और इसकी गहराई धरती की सतह से करीब 10 नीचे दर्ज की गई। यह साल 1900 के बाद वेनेजुएला में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंप है।
कराकास में इमारतों को भारी नुकसान, लोग घरों से भागे
लगातार आए दोनों भूकंपों के कारण लोग घबराकर घरों, कार्यालयों और अन्य इमारतों से बाहर निकल आए। राजधानी कराकास में कई इमारतों की दीवारें और हिस्से ढह गए। सड़कों पर मलबा गिरने से कई इलाकों में धूल के बड़े-बड़े गुबार उठते दिखाई दिए।
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तेज झटकों के दौरान लोग हिलती हुई इमारतों से बाहर निकलकर खुले मैदानों में इकट्ठा हो गए। कई मोहल्लों में पूरी दीवारें गिर गईं, जिससे घरों के अंदर रखा फर्नीचर और अन्य सामान बाहर से दिखाई देने लगा।
हजारों लोगों के हताहत होने की आशंका
भूकंप के बाद अब तक सरकार की ओर से मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है। हालांकि स्थानीय प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कई इमारतें ढह गई हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती अनुमान बताते हैं कि मृतकों की संख्या 10,000 से लेकर 1,00,000 तक भी हो सकती है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आपदा से कितना नुकसान हुआ है, इसकी असल तस्वीर अभी सामने आना बाकी है और अंतिम आंकड़े बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
USGS ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि इस भूकंप में भारी जनहानि और व्यापक नुकसान होने की आशंका है। इसका असर बड़े क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।
कैरेबियाई क्षेत्र में सुनामी अलर्ट
भूकंप के बाद यूएस पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने वर्जिन आइलैंड्स के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया है। वहीं डोमिनिकन रिपब्लिक के अधिकारियों ने भी समुद्र के जलस्तर में संभावित बदलाव को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। हालांकि प्यूर्टो रिको के लिए जारी एहतियाती अलर्ट बाद में वापस ले लिया गया। फिलहाल आपदा राहत दल प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन कर रहे हैं और संभावित आफ्टरशॉक्स की भी आशंका बनी हुई है।
जापान में भी तेज भूकंप
वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के कुछ ही घंटों बाद इधर एशिया में जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर भी 6.9 तीव्रता का भूकंप आया है। इस भूकंप से तोहोकू क्षेत्र में तेज झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक भूकंप का केंद्र इवाते प्रीफेक्चर के समुद्री तट के पास समुद्र के नीचे लगभग 50 किलोमीटर की गहराई में था।
एजेंसी ने कहा कि समुद्र के जलस्तर में मामूली बदलाव संभव है, लेकिन किसी विनाशकारी सुनामी का खतरा नहीं है। भूकंप के झटके जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से के कई प्रांतों में भी महसूस किए गए। भूकंप के तुरंत बाद जापानी सरकार ने हालात पर नजर रखने और राहत कार्यों के समन्वय के लिए एक आपातकालीन टास्क फोर्स का गठन किया है।
न्यूक्लियर साइट्स सुरक्षित…
यह भी बताया गया है कि भूकंप के बाद जापान के सभी परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा जांच की गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार किसी भी परमाणु केंद्र में कोई असामान्य बात नहीं पाई गई।
भूकंप के कारण उत्तर-पूर्वी जापान के परिवहन नेटवर्क पर भी असर पड़ा। ईस्ट जापान रेलवे ने तोहोकू शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल लाइन के कुछ हिस्सों समेत कई ट्रेन सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया। वहीं सुरक्षा जांच के लिए आओमोरी प्रीफेक्चर के कुछ एक्सप्रेसवे भी कुछ समय के लिए बंद कर दिए गए।
ताजा भूकंप ने जापान में मार्च 2011 की उस विनाशकारी त्रासदी की यादें ताजा कर दीं, जब 9.0 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने उत्तर-पूर्वी जापान में भारी तबाही मचाई थी। उस आपदा में हजारों लोगों की जान गई थी और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा था। इस घटना को 1986 की चेरनोबिल परमाणु त्रासदी के बाद दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटनाओं में गिना जाता है।
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